Saturday, May 30, 2009

फिल्म निर्माताओं के आगे झुका बिग सिनेमा

मुंबई. सात प्रमुख मल्टीप्लेक्स में से बिग सिनेमा ने फिल्म निर्माताओं की सभी मांगों को सशर्त स्वीकार कर लिया है। अब जल्द ही बिग सिनेमा के सभी थिएटरों में फिल्में प्रदर्शित होंगी। शुक्रवार की शाम बिग पिक्चर्स के चेयरमैन अमित खन्ना ने यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स फोरम (यूपीडीफ) के साथ बैठक में समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत अब निर्माताओं एवं वितरकों को अधिकार होगा कि वे बिग सिनेमा के जिस थिएटर में चाहेंगे, अपनी फिल्में प्रदर्शित करेंगे और इच्छानुसार शो चलाएंगे। हिंदी एवं अंग्रेजी की फिल्मों के लाभांश में अब भेदभाव नहीं होगा। सभी फिल्मों के प्रदर्शन के पहले सप्ताह में 50 प्रतिशत, द्वितीय सप्ताह में 42.5, तृतीय सप्ताह में 37.5 और चौथे सप्ताह में 30 प्रतिशत लाभांश निर्माताओं एवं वितरकों को मिलेगा। जिस राज्य में मनोरंजन कर नहीं लागू होगा, वहां मल्टीप्लेक्स मालिक उसे नहीं लेंगे। निर्माताओं एवं वितरकों ने बिग सिनेमा के साथ समझौता होने के बाद सर्वप्रथम वाशु भगनानी की फिल्म कल किसने देखा प्रदर्शित करने का फैसला किया है।
-रघुवेन्द्र सिंह

Wednesday, May 27, 2009

रोमांटिक फिल्में करने की चाहत-सेलिना जेटली

सेलिना जेटली ने अपने कॅरियर में कॉमेडी फिल्में अधिक की है। आने वाले दिनों में उनकी एक और कॉमेडी फिल्म पेइंग गेस्ट दर्शकों के बीच होगी। प्रस्तुत है सेलिना से बातचीत-
पेइंग गेस्ट किस तरह की फिल्म है?
यह मल्टीस्टारर कॉमेडी है। फिल्म आज की युवा पीढ़ी पर कमेंट करती है। आज लड़के-लड़कियों पर कॉलेज से निकलने के बाद नौकरी का बोझ आ जाता है। वे बड़े शहरों में आकर संघर्ष करने में जुट जाते हैं। पेइंग गेस्ट के तौर पर जीवन जीते हैं।
इसमें आप किस तरह की भूमिका निभा रही है?
मैं थाईलैंड में रह रही पंजाबी फैमिली की लड़की हूं। फिल्म में मुझे ज्यादातर समय डार्लिग कहकर बुलाया जाता है। मेरी भूमिका बहुत मजेदार है। इसे निभाने के लिए मुझे थाई भाषा सीखनी पड़ी।
आप पेइंग गेस्ट के तौर पर रही हैं?
मैं कलकत्ता में दो साल पेइंग गेस्ट के तौर पर रह चुकी हूं। मेरे अनुभव बुरे हैं। करियर के शुरुआती दिनों में मैं मॉडल थी। कलकत्ता में मॉडल को अपने घर में कोई नहीं रखना चाहता था। जो तैयार होते, वे पहले दस हजार रुपए एक्स्ट्रा मांगते और शर्ते अलग से रखते थे। बड़ी मुश्किल से एक महिला ने मुझे अपने घर में रहने की इजाजत दी। उसने कहा कि तुम्हे या तो अपने बाल काटकर छोटे करने पड़ेंगे या फिर दो चोटी बनाकर रखना पड़ेगा। स्थिति यह थी कि मैं रात को अपने घर जाने से डरती थी। काम खत्म होने के बाद आधी रात को दोस्तों को फोन करती और उनके यहां ठहरने की गुजारिश करती थी। मैंने दो साल के भीतर कलकत्ता में आठ ठिकाने बदले।
परितोष पेंटर की यह पहली फिल्म है। उनके निर्देशन में काम करने का अनुभव कैसा रहा?
परितोष थिएटर पृष्ठभूमि के हैं। यह फिल्म उन्हीं के लोकप्रिय नाटक पेइंग गेस्ट पर बनी है। वे शूटिंग के दौरान हमें इतना तक बता देते थे कि पात्र के चलने का अंदाज कैसा होगा? उनके निर्देशन में काम करते हुए मैंने एंज्वॉय किया।
पेइंग गेस्ट के बाद किन फिल्मों में दर्शक आपको देख सकेंगे?
इसके बाद मुक्ता आटर््स की फिल्म हैलो डार्लिग आएगी। फिर रन भोला रन, शो मैन और चाय गरम फिल्में प्रदर्शित होंगी। हाल में मैंने एक थ्रिलर फिल्म एक्सीडेंट ऑन हिल रोड साइन की है। उसमें मैं निगेटिव भूमिका निभा रही हूं। मैं शुद्ध रोमांटिक फिल्म करना चाहती हूं। मेरी ख्वाहिश है कि दिलीप कुमार के साथ एक रोमांटिक फिल्म में काम करूं।
आजकल आप गे समाज के पक्ष में खुलकर आवाज उठा रही हैं। इसके पीछे क्या कारण है?
मैं कॉलेज के दिनों से गे समाज को सपोर्ट कर रही हूं। अब मैं सेलेब्रिटी बन गयी हूं इसलिए लोग मेरी बातों को ध्यान से सुन रहे हैं। यह मुद्दा मेरे दिल के बेहद करीब है। दरअसल, मैं करियर के शुरूआती दिनों में कलकत्ता में अकेले रहती थी। वहां मेरा अपना कोई नहीं था। उस समय एक गे मेकअप आर्टिस्ट ने मेरी बहुत सहायता की। वे मां की तरह मेरा खयाल रखते थे। मैंने निजी जीवन और दुनिया के बारे में उनसे बहुत कुछ सीखा है। उन्हीं की वजह से मैं मिस इंडिया बनी। उन्होंने ही मिस इंडिया का फार्म भरकर भेजा था। मैं आज इस मुकाम पर उनकी वजह से हूं। मेरे बहुत सारे गे दोस्त हैं। मैं चाहती हूं कि समाज उन्हें स्वीकार करे।
-रघुवेन्द्र सिंह

अपने लिये जगह बनानी है-वैशाली देसाई/ naya chehara

वैशाली देसाई की पहली फिल्म कल किसने देखा प्रदर्शन के लिये तैयार है। इसमें वे वासु भगनानी के बेटे जैकी भगनानी के साथ ग्लैमरस अंदाज में नजर आएंगी।
वैशाली देसाई मॉडलिंग इंडस्ट्री से है। वे 2005 में मिस इंडिया कांटेस्ट की प्रतियोगी रह चुकी हैं। विवेक शर्मा निर्देशित फिल्म कल किसने देखा और अपने कॅरियर से जुड़ी तमाम बातों से वैशाली अवगत करा रही हैं-
[अचानक एक्टिंग में आयी]
मैं साइकैट्रिस्ट बनना चाहती थी, लेकिन 2005 में मिस इंडिया कांटेस्ट में हिस्सा लेने के बाद अचानक मेरी दिशा बदल गयी। मॉडलिंग के प्रस्ताव आने लगे और मैंने उन्हें स्वीकार करना शुरू कर दिया। उसके बाद मैंने कुमार सानू के म्यूजिक वीडियो ऐसे ना देखो मुझे और यूरोफिया बैंड के वीडियो में काम किया। मैंने प्रदीप सरकार के साथ भी म्यूजिक वीडियो महफूज में काम किया है। इस तरह एक्टिंग की तरफ मेरा रूझान बढ़ता गया।
[ड्रीम डेब्यू है]
मैं तीन साल पहले मुंबई आयी। उसके बाद मैंने अनुपम खेर के एक्टिंग स्कूल से एक माह का एक्टिंग कोर्स किया। मॉडलिंग के दिनों में मेरे एक मित्र ने निर्देशक विवेक शर्मा से मुलाकात करवायी थी। वाशु भगनानी से उन्होंने मेरा परिचय कराया। कल किसने देखा का हिस्सा बनकर मैं बहुत खुश हूं। मुझे फिल्म में अपनी एक्टिंग और डांस प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिला है। यह मेरे लिये ड्रीम डेब्यू है।
[मेरा किरदार]
कल किसने देखा सस्पेंस थ्रिलर है। मैं इसमें निशा की भूमिका निभा रही हूं। वह धनी परिवार की घमंडी लड़की है। मैं वैसी बिल्कुल नहीं हूं। इस फिल्म में मेरे ओपोजिट जैकी भगनानी हैं। हम दोनों की यह पहली फिल्म है। एक्टिंग में मैं अपना सम्मानित स्थान बनाना चाहती हूं। यह मेरा आत्मविश्वास है। मैं शाहरुख खान, रितिक रोशन और रणबीर कपूर के साथ खुद को स्क्रीन पर देखना चाहती हूं।
[काम का अनुभव]
जैकी के साथ काम का अनुभव बहुत ही खूबसूरत रहा। उम्मीद है कि जैकी के साथ मेरी केमेस्ट्री सिल्वर स्क्रीन पर खूब जचेगी। हम लोगों ने विदेशी लोकेशनों पर खूब इंज्वाय किया। कहानी भी ऐसी है जो हर युवा को आकर्षित करेगी। हमारे निर्देशक विवेक शर्मा भी बहुत ही सिंसियर है। उनके निर्देशन में काम करके ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता कि वे न्यू कमर को डायरेक्ट कर रहे है।
[अमिनय से है पुराना रिश्ता]
मैं बंगलौर में पली-बढ़ी हूं। फिल्म इंडस्ट्री से मेरा पुराना रिश्ता है। मनमोहन देसाई मेरे डैड के मामा थे। किसी भी प्रोजेक्ट के लिए हां कहने से पहले मैं उनके परिवार की सलाह जरूर लेती हूं।
-रघुवेन्द्र सिंह

मुझमें हेमा जी को ढूंढ़ने की कोशिश न करें-अंजोरी अलघ

अंजोरी अलघ ने की चर्चा इन दिनों हेमा मालिनी अभिनीत फिल्म सीता और गीता पर बने इमेजिन चैनल के धारावाहिक सीता और गीता में हेमा जी जैसा दोहरा किरदार निभाने को लेकर है। वे कहती हैं, मैं हेमा जी और उनकी इस फिल्म की बचपन से प्रशंसक हूं। फिल्मों में सीता और गीता जैसी भूमिका निभाने का मौका कम अभिनेत्रियों को मिला है। यह चुनौतीपूर्ण भूमिका है। यदि सीरियल सीता और गीता फिल्म का रीमेक नहीं होता, तो मैं कभी हां नहीं कहती। मेरी प्राथमिकता फिल्में हैं।
अंजोरी बताती हैं, सीरियल साइन करने के बाद मैंने यह फिल्म चार बार और देखी। मैं हेमा जी के अभिनय से प्रभावित हुई। उनसे काफी कुछ सीखा, लेकिन मैंने प्रण किया है कि मैं उनकी नकल बिल्कुल नहीं करूंगी। सीता और गीता एक-दूसरे के विपरीत किरदार हैं। मैंने उन्हें निभाने के लिए बहुत मेहनत की। मैं दर्शकों से विशेष तौर पर गुजारिश करना चाहूंगी कि वे मुझमें हेमा जी को ढूंढ़ने की कोशिश न करें। सीरियल देखते समय सीता और गीता को देखें, न की हेमा मालिनी को।
सीरियल को लेकर हेमा जी से हुई मुलाकात के संदर्भ में अंजोरी कहती है, हेमा जी ने मेरी हौसला अफजाई की। उन्होंने कहा कि मैं खुश हूं कि आप मेरे दोनों किरदारों को निभा रही हैं। मेरा आशिर्वाद आपके साथ है। मुझे उम्मीद है कि आप मुझे निराश नहीं करेंगी। हेमा जी के उन शब्दों से मेरी हिम्मत बढ़ गयी। मैं लकी हूं कि मुझे हेमा जी का आशिर्वाद मिला। उनके साथ शूटिंग करने का मौका मिला। वे सपोर्टिव नेचर की महिला हैं।
सीता और गीता में राका का किरदार गौरव और सिजेन खान सूरज का किरदार निभा रहे हैं। कम समय में हम अच्छे दोस्त बन गए हैं। गौरव हमेशा मुझे हंसाते हैं। सिजेन सीनियर कलाकार हैं। मैं उनसे अभिनय के टिप्स लेती रहती हूं। वे स्वीट और प्रोफेशनल हैं। अब ईश्वर से यही प्रार्थना कर रही हूं कि फिल्म की तरह दर्शकों को सीरियल भी पसंद आए।
अंजोरी सीता और गीता के अलावा कोई अन्य टीवी कार्यक्रम नहीं करेंगी। वे कहती हैं, मैं अपना भविष्य फिल्मों में देखती हूं। इस सीरियल की समाप्ति के बाद मैं फिल्मों में वापस लौट जाऊंगी। मेरी फिल्म मुक्ति की शूटिंग पूरी हो चुकी है। जल्द ही वह प्रदर्शित होगी। मैं कुछ और फिल्में भी कर रही हूं, लेकिन अभी उनके बारे में बात नहीं करना चाहूंगी।
-रघुवेन्द्र सिंह

भावुक हो जाती हूं मैं-विद्या बालन

विद्या बालन इतनी संवेदनशील एवं भावुक अभिनेत्री हैं कि वह किसी की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पातीं। प्रत्येक फिल्म की शूटिंग के आखिरी दिन उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। अभिषेक चौबे निर्देशित विशाल भारद्वाज की फिल्म इश्कियां के सेट पर ऐसा दृश्य देखने को मिला। जब इस संदर्भ में विद्या बालन से पूछा गया, तो उन्होंने रूंआसी आवाज में कहा, फिल्म की शूटिंग करते हुए मुझे निर्देशक, सह-कलाकारों एवं यूनिट के सदस्यों से विशेष लगाव हो जाता है। जिस दिन शूटिंग का आखिरी दिन होता है, बरबस ही मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं। मैं भाव-विह्वल हो जाती हूं। पहली फिल्म परिणीता से मेरी यह आदत है। हर फिल्म की शूटिंग का आखिरी दिन मेरे लिए दुख भरा होता है। सच कहूं, तो मुझसे जुदाई बर्दाश्त नहीं होती। मैं बहुत भावुक हूं।
गौरतलब है कि इश्किया में विद्या बालन नसीरूद्दीन शाह एवं अरशद वारसी के साथ स्क्रीन शेयर करती दिखाई देंगी। इस फिल्म में ग्रामीण युवती की भूमिका निभा रही हैं। विद्या को इस फिल्म के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार है।
वैसे विद्या की व्यस्तता में कोई कमी नहीं है। अब वह अपनी नई फिल्मों पा एवं चिनाब गांधी की शूटिंग आरंभ करने जा रही हैं, बालकृष्णन की फिल्म पा में वह अमिताभ बच्चन एवं अभिषेक बच्चन के साथ नजर आएंगी। वहीं संजय लीला भंसाली की फिल्म चिनाब गांधी में जॉन अब्राहम के साथ काम करेंगी।
-रघुवेन्द्र सिंह

आने वाला कल सुखदायी होगा-नारायणी शास्त्री

नारायणी शास्त्री रीयल चैनल के सीरियल नमक हराम में आईपीएस अधिकारी की भूमिका निभा रही हैं। उनका नॉन ग्लैमरस अंदाज और दमदार अभिनय दर्शकों के बीच सराहा जा रहा है। नारायणी खुशी व्यक्त करती हैं, दर्शकों को मेरा काम अच्छा लग रहा है। मुझे और क्या चाहिए? मैंने अपने करियर में हमेशा एक-दूसरे से भिन्न भूमिकाएं करने का प्रयास किया हैं और खुशी की बात यह है कि दर्शकों ने हमेशा मेरे काम की सराहना की है।
नमक हराम की कहानी विवाहित जोड़े स्वाति और करन सहगल के इर्द-गिर्द घूमती है। सीरियल एवं अपनी भूमिका के बारे में नारायणी कहती हैं, सीरियल की कहानी नयी है। खास बात है कि यह सास-बहू का नाटक नहीं है। स्वाति के पति करन बिजनेसमैन हैं। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन उनके बीच सिद्धांतों की लड़ाई चलती रहती है। सीरियल के निर्माता ने जब मुझसे संपर्क किया तो मैंने तुरंत हां कह दिया था। दरअसल, मुझे अंदाजा हो गया था कि टीवी के दर्शक ऐसा ही नया सीरियल देखना चाहते हैं। नारायणी अब तक कहानी सात फेरों की, क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कुसुम और पिया का घर आदि सीरियल में काम कर चुकी हैं। वे अपने अब तक के सफर से संतुष्ट हैं।
नारायणी व्यक्तिगत जीवन के बारे में बात करना पसंद नहीं करती हैं। वे काम और सह-कलाकारों के बारे में बातें करती हैं। नमक हराम में वे पहली बार सचिन त्यागी के साथ काम कर रही हैं। उनके साथ अनुभव के बारे में वे कहती हैं, सचिन के साथ मेरी अच्छी केमिस्ट्री है। दर्शक हमारी जोड़ी को पसंद कर रहे हैं। हम दोनों अपने-अपने काम में शत प्रतिशत देते हैं। सचिन अच्छे अभिनेता है।

-रघुवेन्द्र सिंह

Thursday, May 21, 2009

शोले जैसा हश्र न हो सीता और गीता का-हेमा मालिनी

फिल्म सीता और गीता हेमा मालिनी के करियर की खास फिल्म है। इसमें सीता की सहमी और तेज-तर्रार गीता की भूमिका में ड्रीम गर्ल को हर उम्र के लोगों ने पसंद किया था। हेमा को उम्दा अभिनेत्री के तौर पर पहचान दिलाने में इस फिल्म की अहम भूमिका रही। वे स्वयं यह बात स्वीकार करती हैं, फिल्म सीता और गीता मेरी यादगार फिल्मों में से एक है। उसने वर्सटाइल ऐक्ट्रेस के रूप में मेरी पहचान बनाई। मेरी लोकप्रियता बढ़ाने में उस फिल्म की अहम भूमिका है। लोग आज भी उस फिल्म को भूले नहीं हैं। यही कारण है कि जब मुझे इस बात की जानकारी मिली की इस फिल्म पर टीवी सीरियल बन रहा है, तो मैं डर-सी गई। उल्लेखनीय है कि सीता और गीता फिल्म पर इसी नाम से पच्चीस मई से एनडीटीवी इमेजिन पर एक सीरियल प्रसारित होने जा रहा है। उसमें अभिनेत्री अंजोरी अलघ हेमा वाली दोहरी भूमिका निभा रही हैं। हेमा आगे कहती हैं कि कुछ समय पहले फिल्म शोले का रिमेक रामगोपाल वर्मा ने रामगोपाल वर्मा की शोले बनाया था। वह फिल्म देखकर मैं बुरी तरह डर गई। वह डर अभी तक मेरे मन मैं बैठा हुआ है। शुक्र है कि सीता और गीता की कहानी सीरियल में आ रही है। मैं खुश हूं। पहली बार किसी फिल्म का रिमेक सीरियल के रूप में हो रहा है। शोले का भी रिमेक सीरियल के रूप में होना चाहिए था। हेमा मालिनी आगे कहती हैं किअंजोरी खूबसूरत और अच्छी अभिनेत्री हैं, लेकिन मुझे डर है कि लोग उनकी तुलना मुझसे जरूर करेंगे। मेरी नजर में यह गलत होगा। बहरहाल, अब अंजोरी की परफॉर्मेस पर निर्भर करेगा कि वे सीता और गीता को कितना यादगार बना पाती हैं। मैंने उन्हें सलाह दी है कि वे मुझे कॉपी करने का प्रयास न करें। उनमें और मुझमें बहुत फर्क है। यदि वे यह बात समझ गई, तो संभव है कि कुछ अच्छा कर जाएं। मैंने सुना है कि धरम जी और संजीव कुमार जी के रोल के लिए जिन कलाकारों गौरव और सिजेन खान को चुना गया है, वे अच्छे हैं। उम्मीद करती हूं कि फिल्म की तरह सीरियल भी हर उम्र के लोगों को पसंद आएगा और शोले जैसा हश्र सीता और गीता का नहीं होगा।
रघुवेन्द्र सिंह