Saturday, October 31, 2009

मैं अपनी इमेज तोड़ना चाहता हूं: शरद केलकर

शरद केलकर काफी समय से ऐसे काम की तलाश में थे, जो दर्शकों में बनी उनकी आदर्श बेटे और आदर्श पति की इमेज तोड़ सके। यही वजह है कि बालाजी टेलीफिल्म्स की ओर से जब उन्हें सीरियल बैरी पिया का ऑफर आया, तब उन्होंने फौरन हां कह दिया। शरद कहते हैं, ऐसा नहीं है कि मुझे गुड ब्वॉय, गुड हसबैंड और गुड सन का रोल करने में मजा नहीं आता। मुझे बहुत मजा आता है, लेकिन मैं ग्रे शेड वाले रोल का मजा लेना चाहता था। सच कहूं, तो मैं अपनी लोकप्रिय इमेज को तोड़ना चाहता था। मेरे मन में अलग और फ्रेश किरदार निभाने की इच्छा थी। मेरा लक अच्छा था कि मेरे पास बैरी पिया का प्रस्ताव आ गया। मैंने सीरियल के बारे में और अपने किरदार के बारे में सुना, तो हां करने में एक पल भी नहीं गंवाया। मैं नहीं चाहता था कि सीरियल मेरे हाथ से जाए।
कलर्स पर प्रसारित सीरियल बैरी पिया शरद के लिए कई वजहों से खास है। वे पहली बार ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित किसी सीरियल में अभिनय कर रहे हैं और पहली बार ठाकुर दिग्विजय सिंह जैसी भूमिका निभा रहे हैं। शरद कहते हैं, इन कारणों से तो यह सीरियल मेरे लिए खास है ही, लेकिन सबसे प्रमुख कारण इसका विषय है। यह हमारे देश के किसानों की विभिन्न समस्याओं को उजागर करने वाला सीरियल है। इसकी कहानी महाराष्ट्र की है, लेकिन यही हाल पूरे देश के किसानों का है। कृषि प्रधान देश में किसानों की आत्महत्या गंभीर मुद्दा है। यदि सीरियल के माध्यम से हम सरकार का ध्यान किसानों की समस्या के प्रति खींच सके, तो हमारी मेहनत सफल हो जाएगी।
शरद के लिए इस सीरियल में काम करने का अनुभव यादगार है। वे कहते हैं, ठाकुर दिग्विजय सिंह जैसी भूमिका मैंने पहले कभी नहीं निभाई थी। मैं सीरियल को एंज्वॉय कर रहा हूं। मुझे लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया भी मिल रही है। मैं खुश हूं। यकीन है कि लोग इसमें ठाकुर दिग्विजय सिंह की मेरी भूमिका को भूल नहीं पाएंगे। खास बात है कि इस सीरियल में मेरे निजी जीवन के अनुभव काम आ रहे हैं। दरअसल, मैं मध्य प्रदेश में रहा हूं। वहां ठाकुरवाद बहुत चलता है। एमपी में मुरैना, दतिया जैसे कई ऐसे इलाके हैं, जहां जमींदार और किसानों के बीच बड़ा भेद है। गौरतलब है कि शरद आजकल एनडीटीवी इमेजिन के रिअलिटी शो पति पत्नी और वो में होस्ट की भूमिका निभा रहे हैं। शो के अनुभव के बारे में वे कहते हैं, मुझे शो को होस्ट करने में मजा आ रहा है। उसका अनुभव भी मेरे लिए एकदम अलग है। खुश हूं कि मुझे अलग-अलग जॉनर का काम करने को मिल रहा है। उम्मीद करता हूं कि ऐसे मौके भविष्य में भी मिलते रहेंगे।
सिंदूर तेरे नाम का और सात फेरे जैसे लोकप्रिय सीरियल का हिस्सा रहे शरद अपने करियर से खुश हैं। उनकी योजना जल्द ही प्रोडक्शन के क्षेत्र में आने की है। वे कहते हैं, मैंने अब तक वही किया, जो मुझे अच्छा लगा। यही कारण है कि मैं अपने करियर से खुश हूं। हालांकि इंडस्ट्री में मुझे शुरुआत में ही बहुत झटके लगे। मेरे कुछ शो बंद हुए, मैं रिप्लेस भी किया गया, लेकिन उम्मीद है, आगे का सफर कष्टदायक नहीं होगा। मैं प्रोडक्शन में आने की योजना बना चुका हूं। मेरे पास कहानियां तैयार हैं।
-raghuvendra singh

अजमेर शरीफ पहुंची कट्रीना | खबर

अपनी नई फिल्म अजब प्रेम की गजब कहानी की सफलता की दुआ मांगने कट्रीना कैफ शुक्रवार को अजमेर शरीफ की दरगाह पहुंची। कट्रीना इस वक्त जयपुर में अपनी इस फिल्म के प्रचार के लिए गई हैं। उनके साथ रणबीर कपूर भी हैं। देर शाम कट्रीना अकेले ही अजमेर शरीफ की दरगाह में मत्था टेकने गई थीं। गौरतलब है कि लोकप्रिय अभिनेत्री कट्रीना कैफ अपनी प्रत्येक फिल्म की रिलीज से पहले अजमेर शरीफ की दरगाह में मत्था टेकने जाती हैं। राजकुमार संतोषी निर्देशित अजब प्रेम की गजब कहानी छह नवंबर को प्रदर्शित हो रही है। इसमें कट्रीना कैफ और रणबीर कपूर की जोड़ी पहली बार साथ नजर आएगी।
-रघुवेन्द्र सिंह

Thursday, October 29, 2009

अलादीन से कई ख्वाहिशें पूरी हो गई- सुजॉय घोष | मुलाकात

सुजॉय घोष अपनी नई फिल्म अलादीन की प्रेरणा मनमोहन देसाई को मानते हैं। पहली दोनों फिल्मों झंकार बीट्स और होम डिलीवरी से दर्शकों से वाहवाही लूटने में असफल रहे सुजॉय को उम्मीद है कि अलादीन से वे इस उद्देश्य में सफल होंगे। प्रस्तुत है सुजॉय घोष से बातचीत..
अलादीन किस प्रकार मनमोहन देसाई से प्रेरित है?
इसमें मनमोहन देसाई की फिल्मों की तरह मनोरंजन के सभी तत्व हैं। इसका अंत भी उन्हीं की फिल्मों की तरह है। हीरो, हीरोइन, विलेन सब अंत में एक स्थान पर मिलते हैं और नाच-गाना होता है और फिर मार-धाड़ होती है। बुराई पर अच्छाई की जीत होती है। मैं मनमोहन देसाई की फिल्में देखकर बड़ा हुआ हूं। मैं बचपन से उनकी तरह कॉमर्शिअल फिल्म बनाना चाहता था। इस फिल्म से मेरी वह ख्वाहिश पूरी हो गई।
अलादीन के निर्माण की योजना कब बनी?
होम डिलीवरी की रिलीज के बाद मेरे मन में इस फिल्म का विचार आया। मेरी पहली फिल्म झंकार बीट्स सफल हुई थी, लेकिन होम डिलीवरी बुरी तरह फ्लॉप हो गई। उन फिल्मों से मेरा दर्शकों से व्यापक स्तर पर संपर्क नहीं बना। मैं नई फिल्म ऐसी बनाना चाहता था, जिससे मुझे विस्तृत पहचान मिले। अलादीन की कहानी फाइनल करने और इसके प्री-प्रोडक्शन में मुझे दो साल लग गए।
अलादीन की कहानी और इसके कलाकारों के चयन के बारे में बताएंगे?
मेरी फिल्म के हीरो का नाम अलादीन है, लेकिन वह लैंप वाला अलादीन नहीं है। अलादीन को उसके कॉलेज के लड़के हमेशा चिढ़ाते हैं और उससे लैंप घिसवाते हैं। अलादीन के कॉलेज में एक लड़की जैसमीन आती है और उसे उससे प्यार हो जाता है, लेकिन जैसमीन को उसके दूसरे दोस्त अपने ग्रुप में शामिल कर लेते हैं। एक दिन जैसमीन के सामने अलादीन से लड़के लैंप घिसवाते हैं और तभी पीछे से अचानक एक आदमी आ जाता है। वह जिन्न है। जिन्न अलादीन से कहता है कि मैं दो महीने में रिटायर होने वाला हूं। जल्दी से मुझसे तीन विश ले लो। यहीं से कहानी में मोड़ आता है। अलादीन नई बोतल में पुरानी शराब की तरह है। अमिताभ बच्चन, संजय दत्त और रितेश देशमुख के बिना मैं इस फिल्म की कल्पना ही नहीं कर सकता था।
अमिताभ बच्चन को फिल्म के लिए राजी करने में आपको दिक्कत नहीं हुई?
बिल्कुल नहीं। मैं बच्चन जी के साथ काम करने की इच्छा लेकर इस फील्ड में आया था। मैं उनके पास कई फिल्मों की स्क्रिप्ट लेकर गया। उनमें से अलादीन उन्हें पसंद आई। उन्होंने जब मुझसे कहा कि वे इसमें काम करेंगे, तो मैं तो खुशी से पागल हो गया। मैं किसी फिल्म स्कूल नहीं गया, लेकिन इस फिल्म में सत्तर दिन उनके साथ काम करने के बाद मुझे लगा कि मैं किसी फिल्म के स्कूल से हो आया।
इस फिल्म का अनुभव आपके लिए सुखद रहा?
हां। अलादीन से मेरी कई ख्वाहिशें पूरी हो गई। मनमोहन देसाई जैसी पिक्चर बना ली और अमिताभ बच्चन के साथ काम भी कर लिया। भगवान मुझ पर मेहरबान थे, इसीलिए यह सब इतनी जल्दी हो गया। अब यही चाहता हूं कि फिल्म दर्शकों को पसंद आ जाए। इसमें मैंने आधुनिक तकनीकों का खूब इस्तेमाल किया है।
आपने किसी नई फिल्म पर काम शुरू किया है?
हां, मेरी अगली फिल्म थ्रिलर होगी। उसका हीरो एक हीरोइन है। उसके लिए विद्या बालन से संपर्ककिया है। जब फाइनल होगा, मैं सभी को बताऊंगा। मैं तय करके आया हूं कि हमेशा अलग जॉनर की फिल्म बनाऊंगा। खुद को एक तरह के सिनेमा तक सीमित नहीं रखूंगा। इस पर अलादीन की रिलीज के बाद काम शुरू करूंगा।
-raghuvendra singh

Wednesday, October 28, 2009

बेटे को लेकर फिल्म बनाएंगे अनुपम खेर | खबर

मुंबई। छह साल के बाद प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर फिर निर्देशक की जिम्मेदारी उठाने जा रहे हैं। उनके बेटे सिंकदर खेर फिल्म में नायक की भूमिका निभाएंगे। फिल्म का निर्माण अनुपम खेर स्वयं करेंगे। इकलौते बेटे सिंकदर खेर के करियर को नया जीवन देने के उद्देश्य से अनुपम खेर फिल्म निर्देशित करने जा रहे हैं।
गौरतलब है कि सिंकदर खेर ने पिछले साल हंसल मेहता की फिल्म वुडस्टॉक विला से अभिनय करियर की शुरूआत की। उनकी दूसरी फिल्म समर 2007 थी। दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल हो गईं। सिकंदर खेर को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अब अनुपम खेर ने फैसला किया है कि वे अपने बेटे को रीलांच करेंगे। फिल्म का प्री प्रोडक्शन काम पूरा हो चुका है। नए साल के आरंभ फिल्म की शूटिंग में शुरू होगी।
उल्लेखनीय है कि अनुपम खेर निर्देशित पहली फिल्म ओम जय जगदीश 2003 में प्रदर्शित हुई थी।
-रघुवेन्द्र सिंह

ड्रीम-गर्ल की तलाश: रितेश | मुलाकात

रितेश देशमुख को कॉमेडी किंग का टैग पसंद नहीं। इसीलिए उन्होंने अब इस टैग से छुटकारा पाने के लिए गंभीर फिल्मों की ओर रुख किया है। और क्या इरादे हैं उनके एक नजर..
कॉमेडी किंग का टैग क्यों नहीं पसंद है?
मैं इसके योग्य नहीं हूं। अभी मुझे बहुत कुछ करना बाकी है। लोगों का बड़प्पन है कि वे मुझे कॉमेडी किंग कहते हैं। मुझे तो खुशी होती है, लेकिन मैं किसी खास टैग से जुड़ना नहीं चाहता।
अलादीन किस विधा की फिल्म है? इससे कैसे जुड़े?
अलादीन में फन, मैजिक, फैंटेसी, रोमांस, एक्शन सब कुछ है। एक फैमिली एंटरटेनर फिल्म है। इसके निर्देशक सुजॉय घोष हैं। मस्ती के प्रीमियर पर उन्होंने मुझसे कहा था कि वे मेरे साथ काम करना चाहते हैं। मैंने हामी भर दी, लेकिन मुश्किल यह थी कि कैसी फिल्म बनाएं? सुजॉय और मैं एक दिन इसी पर चर्चा कर रहे थे कि सामने अलादीन की बुक और डीवीडी दिख गई। उन्होंने कहा कि अलादीन पर फिल्म बनाते हैं, मुझे अच्छा लगा।
अलादीन में नया क्या है?
अलादीन को नए तरह से बनाने की चुनौती हम सबके सामने थी। सुजॉय एक साल तक इसी पर काम करते रहे। पहले इसकी कहानी बहुत मॉडर्न थी। वह न्यूयॉर्क बेस्ड रोबोटिक फिल्म थी। उसका नाम सुजॉय ने अलादीन और चालीस चोर रखा था। इसे अलादीन और चालीस चोर की कहानी से जोड़ रहे थे।
अलादीन की कहानी के बारे में बताएं?
अलादीन की कहानी 2009 में बेस्ड है। मैं अलादीन की भूमिका निभा रहा हूं, जिसके माता-पिता मर चुके हैं। वे अलादीन के लैंप की खोज में थे इसलिए उन्होंने अपने बेटे का नाम अलादीन रखा। अलादीन को लैंप से सख्त नफरत है, क्योंकि स्कूल में बच्चे उसे छेड़ते हैं कि तू ही लैंप वाला अलादीन है क्या? वे उसे परेशान करते हैं और उससे लैंप रगड़वाते हैं। अलादीन की लाइफ में जीनियस के आने के बाद सब कुछ बदल जाता है। अलादीन को उसके प्यार जैसमीन से मिलाने में जीनियस मदद करता है। मूल कहानी के साथ संजय दत्त का पैरलर ट्रैक चलता है। वह भी लैंप की खोज में हैं।
अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अनुभव बताएं?
वे लीजेंड हैं। यहां जीनियस की भूमिका में हैं। वे आपको अपने अनुसार सीन करने का मौका देते हैं। उन्होंने कभी अहसास नहीं होने देते कि वे अमिताभ बच्चन हैं।
जैकलीन फर्नाडीज की यह पहली फिल्म है। हिंदी फिल्मों में उनका भविष्य कैसा देखते हैं?
जैकलीन में काम करने का जज्बा है। वे समय की पाबंद और मेहनती हैं। उन्हें हिंदी नहीं आती, लेकिन उन्होंने शूटिंग आरंभ होने से दो महीने पहले अलादीन के अपने सारे डायलॉग रट लिए थे। मैं उनके साथ एक और फिल्म जाने कहां से आई है कर रहा हूं। हिंदी फिल्मों में वे अच्छा मुकाम बनाएंगी।
फिल्म करते हुए कलाकार के रूप में क्या कुछ सीखे?
अलादीन से मुझे बहुत कुछ मिला। यह मेरे करियर की बड़ी फिल्म है। इसमें मुझे अमिताभ बच्चन और संजय दत्त सरीखे कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला। मैंने पिछली फिल्मों से इसमें अच्छा काम करने की कोशिश की है।
आपकी ड्रीम गर्ल कैसी होगी?
मैंने इस बारे में सोचा नहीं है। मैं लड़कियों को कैटेगराइज करके नहीं देखता। हर लड़का सोचता है कि उसकी ड्रीम गर्ल में फलां खूबियां होंगी, लेकिन दिल उसके जस्ट अपोजिट लड़की पर आ जाता है। जिसके साथ जोड़ी बननी होगी, बन जाएगी।
अलादीन के बाद कौन सी फिल्म आएगी?
अगले वर्ष राम गोपाल वर्मा की रण और मिलाप झावेरी की जाने कहां से आई है फिल्में प्रदर्शित होंगी।
-raghuvendra singh

रहा खट्टा-मीठा अनुभव: गुरमीत-देबिना

गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी छोटे पर्दे के लोकप्रिय प्रेमी युगल हैं। पहली बार दोनों धारावाहिक रामायण में राम और सीता की भूमिका में साथ दिखे। और अब वे एक बार फिर एनडीटीवी इमैजिन के रियलिटी शो पति पत्नी और वो में साथ-साथ नजर आ रहे हैं। गुरमीत कहते हैं, हम दोनों सचमुच भाग्यशाली हैं। हम चाहेंगे कि भविष्य में भी हमें साथ काम करने का मौका मिलता रहे। संभव है कि दर्शक नच बलिये के नए सीजन में हमें तीसरी बार साथ-साथ देखें।
देबिना और गुरमीत मुंबई में साथ रहते हैं। हालांकि दोनों ने अभी शादी नहीं की है। देबिना कहती हैं, शादी के बारे में हमने अभी तक सोचा नहीं है। इस वक्त हम दोनों का फोकस अपने-अपने करियर पर है। गुरमीत कहते हैं, क्या पता? हम शो से निकलने के तुरंत बाद शादी कर लें। ईश्वर ने हमें मिलाया है, उसने शादी का समय भी तय किया होगा। हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं। एक-दूसरे का साथ हमें अच्छा लगता है। अगर हमने शादी कर भी ली, तो अगले दस साल तक बच्चा पैदा नहीं करेंगे। यह हमने इस शो पति पत्नी और वो में आने के बाद फैसला किया है।
पति पत्नी और वो गुरमीत और देबिना का पहला रियलिटी शो है। क्या उन्होंने राम और सीता की छवि से बाहर निकलने के लिए यह शो साइन किया? गुरमीत का जवाब होता है, राम और सीता की भूमिका में दर्शकों ने हमें पसंद किया। हमें किसी छवि में बंधने का डर नहीं है। हम दोनों एक्टर हैं और हमें जो काम मिलेगा, उसे ईमानदारी और मेहनत से करेंगे। देबिना कहती हैं, इस शो का कांसेप्ट हमें मजेदार लगा। खास बात यह थी कि इसमें गाली-गलौज, एलिमिनेशन और विनर आदि का टेंशन नहीं था। हमने सोचा कि आज नहीं तो कल शादी करेंगे और बच्चे पैदा होंगे, तो क्यों न उससे पहले बच्चे पालने का अनुभव ले लें।
गुरमीत शो का अनुभव बांटते हुए बताते हैं, खट्टा-मीठा अनुभव है। दरअसल, हम दोनों सोचकर आए थे कि इसमें मस्ती करेंगे, एक-दूसरे के साथ वक्त बिताएंगे, लेकिन यहां आने के बाद हमारी नींद हराम हो गई है। हम रात को चैन से सो नहीं पाते। हर समय बच्चे की टेंशन रहती है। शो में आने के बाद हम दोनों का वजन भी कम हो गया। देबिना कहती हैं, शो में आकर मुझे अहसास हुआ है कि गुरमीत अच्छे पति और पिता साबित होंगे। मैं गुरमीत को पिछले साढ़े चार साल से जानती हूं, लेकिन इस शो में मुझे हर दिन उनका नया रूप देखने को मिलता है। मेरे लिए शो का अनुभव मजेदार है।
भावी योजनाओं के संदर्भ में पूछने पर गुरमीत कहते हैं, मैंने धारावाहिक रामायण से करियर की शुरुआत की और अब पति पत्नी और वो कर रहा हूं। मैंने दोनों अलग तरह के शो किए। भविष्य में भी मेरी कोशिश कुछ नया करने की रहेगी। देबिना कहती हैं, मैं भी गुरमीत की तरह कुछ नए तरह के शो करना चाहूंगी।
-raghuvendra singh

Tuesday, October 27, 2009