Monday, December 14, 2009

ब्रिलिएंट एक्टर हैं आमिर: माधवन

दमदार अभिनय के लिए प्रसिद्ध आर माधवन का कहना है कि आमिर खान के साथ 3 इडियट्स और अमिताभ बच्चन के साथ तीन पत्ती फिल्म में काम करने के बाद उन्हें रियलाइज हुआ कि उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। एक मुलाकात में आर माधवन ने बताया, जब तक आप सोलो हीरो फिल्म में काम करते हैं, तब तक आपको लगता है कि आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन जब आपका सामना अमिताभ बच्चन और आमिर खान जैसे पॉवरफुल कलाकारों से होता है तब पता चलता है कि आप कितने पानी में हैं। अमिताभ बच्चन और आमिर खान के साथ काम करने के बाद मुझे रियलाइज हुआ कि मुझे बहुत कुछ सीखना बाकी है। सच कहूं तो मुझे उनकी आधी एक्टिंग ही आती है। मैं इन कलाकारों के साथ काम करके सम्मानित महसूस कर रहा हूं।
माधवन ने पहली बार रंग दे बसंती फिल्म में मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ काम किया था। विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म 3 इडियट्स में वे दोबारा आमिर खान के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। आमिर खान के बारे में माधवन कहते हैं, आमिर खान के साथ काम करने का अनुभव हमेशा अलग और स्पेशल रहा है। वे ब्रिलिएंट एक्टर हैं। थ्री इडियट्स की शूटिंग के दौरान मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। वे अच्छे दोस्त भी हैं। फिल्म की शूटिंग को हम सभी ने एंज्वॉय किया।
3 इडियट्स के निर्देशक राजकुमार हिरानी हैं। फिल्म के बारे में माधवन कहते हैं, यह राजकुमार हिरानी के स्टाइल की फिल्म है। इसमें बहुत सारे ऐसे मोमेंट हैं, जिन्हें दर्शक भूल नहीं पाएंगे। यह इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन दोस्तों की कहानी है। आमिर खान, शरमन जोशी और मैं तीन दोस्तों की भूमिका निभा रहे हैं। मेरे कैरेक्टर का नाम फरहान कुरैशी है। इसे मैं अपने करियर की स्पेशल फिल्म कहना चाहूंगा। इसकी शूटिंग के मोमेंट मेरे लिए स्पेशल रहे।
इस साल माधवन की दो फिल्में 13बी और सिकंदर रिलीज हुईं। दोनों फिल्मों में माधवन के अभिनय की तारीफ हुई। अब वे बेसब्री से 3 इडियट्स की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं। माधवन कहते हैं, साउथ की फिल्में हों या हिंदी फिल्में मुझे हमेशा दर्शकों का प्यार मिला है। सबका प्यार ही है जो मुझे इतनी फिल्में मिल रही हैं। निर्माता मुझ पर पैसा लगा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि 3 इडियट्स में मेरा काम लोगों को अच्छा लगेगा। यह साल मेरे लिए अच्छा साबित होगा। मैं 3 इडियट्स का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।
माधवन की व्यस्तता इधर हिंदी फिल्मों में बढ़ी है। यह बात माधवन भी मानते हैं। वे कहते हैं, हाल में आई मेरी हिंदी फिल्मों ने अच्छा बिजनेस किया। जिसकी वजह से निर्माताओं का मुझ पर विश्वास बढ़ गया। 3 इडियट्स के बाद मेरी फिल्म तीन पत्ती आएगी। उसके अलावा मैं सहारा, शेमारू और टी-सीरीज की फिल्में भी कर रहा हूं। अगले साल लीना यादव की तीन पत्ती और आनंद राय की फिल्म तनु वेड्स मनु में दर्शक मुझे देखेंगे।
माधवन आजकल कंगना राणावत के साथ तनु वेड्स मनु की शूटिंग कर रहे हैं। इस फिल्म में वे दोनों पहली बार साथ दिखाई देंगे।

अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है अविका गौर

छोटे पर्दे की नन्ही सुपर स्टार अविका गोर की इस ख्वाहिश से सब वाकिफ हैं कि वे बड़ी होकर मिस यूनिवर्स बनना चाहती हैं। उन्होंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए अभी से मेहनत करना शुरू कर दिया है। अविका को लग रहा है कि उनकी हाइट इसमें बाधक हो सकती है। इसलिए वे अपनी हाइट बढ़ाने का भी प्रयास कर रही हैं। आत्मविश्वास से लबरेज अविका कहती हैं, धारावाहिक बालिका वधू की लोकप्रियता और तमाम फिल्मों के ऑफर अभी तक मुझे मिस यूनिवर्स बनने के मेरे लक्ष्य से भटका नहीं पाए हैं। मिस यूनिवर्स बनना मेरा सपना है। मैं जानती हूं कि वहां तक पहुंचने के लिए बहुत नॉलेज चाहिए, इसलिए मैं मेहनत से पढ़ाई कर रही हूं। मैं यह भी जानती हूं कि मेरी हाइट कम है। उस स्पर्धा में जाने वाली लड़कियां लंबी होती हैं। मैं अपनी हाइट बढ़ाने की कोशिश कर रही हूं। आजकल मैं साइक्लिंग करती हूं।
बालिका वधू में आनंदी के रोल से मिली लोकप्रियता से अविका बहुत खुश हैं। वे कहती हैं, मैं जहां भी जाती हूं, लोग मुझे आनंदी, चुहिया, बिंदड़ी कहकर बुलाते हैं। यह सुनकर मुझे अच्छा लगता है। मैं सच कह रही हूं। इस लोकप्रियता का मुझे जरा भी घमंड नहीं है। अभी मुझे बहुत दूर जाना है। मैं आज भी सीधी-सादी और थोड़ी-सी शरारती अविका हूं। मुझे नहीं पता था कि मैं इतनी कम उम्र में इतनी पॉपुलर बन जाऊंगी।
धारावाहिक बालिका वधू में आने वाले ट्विस्ट के बारे में पूछने पर अविका कहती हैं, उसके लिए सीरियल देखना पड़ेगा। मैं इतना बता सकती हूं कि जल्द ही सीरियल में सुखद मोड़ आने वाला है। आनंदी जल्द ही फिर से हंसती-चहचहाती दिखाई देगी।
पिछले दिनों अविका फिल्म मॉर्निग वॉक में थीं। क्या भविष्य में वे फिर किसी फिल्म में नजर आएंगी? वे बताती हैं, वह फिल्म मैंने बालिका वधू स्वीकारने से पहले साइन की थी। मैं खुश हूं कि लोगों को मेरा काम अच्छा लगा। मैंने एक फिल्म पाठशाला में भी काम किया है। उसमें शाहिद कपूर और आयशा टाकिया हैं। वह भी जल्द आएगी। मैं और फिल्मों में काम करना चाहती हूं लेकिन बालिका वधू से फुरसत नहीं मिलती। वैसे भी, इस सीरियल से मुझे वह सब मिल रहा है, जो फिल्मों से मिलता है। मैं खुश हूं। अविका आगे कहती हैं, मैं कलर्स के रिअलिटी शो खतरों के खिलाड़ी में जाना चाहती हूं। मैं उस शो की फैन हूं। खास बात यह है कि मुझे किसी चीज से डर नहीं लगता। मैं उस शो के निर्माताओं से कहना चाहती हूं कि वे बच्चों के लिए भी ऐसा शो बनाएं।

Thursday, December 10, 2009

सेहत अच्छी तो सब अच्छा-रितिक रोशन/फिटनेस मंत्र

रितिक रोशन नियमित रूप से व्यायाम करते हैं। वह संतुलित आहार ग्रहण करते हैं। यही कारण है कि वह स्वस्थ व चुस्त-दुरुस्त हैं। उनका सुडौल शरीर लोगों खासकर युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आइए जानते है रितिक की फिटनेस के राज-
[स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन]
''मैं समर्पित भाव से अपनी सेहत का ख्याल रखता हूं। मेरे लिए स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। मैं फिट रहने के लिए पैसा खर्च करने में जरा भी हिचकिचाता नहीं हूं। मेरा मानना है कि शरीर ही सिर्फ आपका है। उस पर पूरी तरह से आपका अधिकार है। उसे आप जिस तरह चाहें उस तरह रख सकते हैं। मैं जब ऐसे लोगों से मिलता हूं जो फिट नहीं होते तो सोचता हूं कि कोई अपने शरीर के साथ इतना गैरजिम्मेदाराना बर्ताव कैसे कर सकता है? ''
[काम में तभी मन लगेगा..]
''यदि आपकी सेहत अच्छी रहती है, तो न केवल आप शारीरिक रूप से सशक्त महसूस करते हैं बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त महसूस करते है। अच्छी सेहत के कारण काम में आपका मन लगेगा और हर चीज आपको सुखदायक लगेगी। आपके चेहरे पर अलग तरीके का तेज दिखायी देगा।''
[राज की बात]
''मेरी फिटनेस का एकमात्र राज कड़ी मेहनत है। मैं प्रतिदिन शूटिंग के दौरान समय निकालकर व्यायाम करता हूं। मैं बहुत नियंत्रित जीवन जीता हूं। मुझे भी मीठे खाद्य पदार्थ बहुत पसंद हैं, लेकिन मैं खुद पर कंट्रोल रखता हूं। मैं फल, जूस व हरी सब्जियां अधिक खाता हूं। मैं योगासनों को सर्वोत्ताम व्यायाम मानता हूं।''
-रघुवेन्द्र सिंह

इंतजार में जिया

फिल्म नि:शब्द से बालीवुड में दस्तक देने वाली जिया खान किसी ब्वायफ्रेंड की तलाश में नहीं है। दरअसल उन्हें अपनी नई फिल्म यंत्र के लिए कोई हीरो नहीं मिल रहा है। अमिताभ बच्चन और आमिर खान जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम कर चुकी जिया हीरो न मिलने की वजह से काफी परेशान हैं। केन घोष की फिल्म चांस पे डांस से आउट होने के बाद जिया ने मिलिंद उके की यह फिल्म साइन की थी। इसमें पहली बार जिया दोहरी भूमिका में नजर आएंगी। जानकारों के मुताबिकइस फिल्म में पहले जिया के अपोजिट हरमन बावेजा काम करने वाले थे लेकिन कुणाल कोहली की फिल्म साइन करने के बाद उन्होंने इसमें काम करने से इंकार कर दिया। अब फिल्म के निर्माता-निर्देशक नए हीरो की तलाश में हैं। इसकी शूटिंग नए साल से होनी थी। लेकिन हीरो न मिलने के कारण शूटिंग भी लटक सकती है। बेचारी जिया, गजनी के बाद उन्हें कोई पूछ नहीं रहा। एक फिल्म मिली भी तो हीरो नहीं मिल रहा। ऐसे में वे इंतजार न करें तो क्या करें।

-raghuvendra Singh

Wednesday, December 9, 2009

कट्रीना ने ठुकराई कृष-2 | खबर

मुंबई। सेक्सी कट्रीना कैफ की ख्वाहिश सुपर स्टार रितिक रोशन के साथ काम करने की थी, लेकिन अब जब फिल्म कृष 2 में उनके हाथ यह हसीन मौका आया तो दिल पर पत्थर रखते हुए उन्हें ना कहना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, दो सप्ताह पहले निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन अपनी सफल फिल्म कृष के सीक्वल कृष 2 का आफर लेकर कट्रीना के पास पहुंचे। उनकी तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। उन्होंने सोचा नहीं था कि इतना जल्दी उनकी रितिक के साथ काम करने की ख्वाहिश पूरी हो जाएगी। उन्होंने तुरंत कृष 2 के लिए अपनी स्वीकृति दे दी, लेकिन शूटिंग की तारीख को लेकर कट्रीना असमंजस में पड़ गईं और चाहते हुए भी फिल्म में काम करने में असमर्थता जाहिर की। कट्रीना की यह प्रतिक्रिया देखकर राकेश ने उनसे इन्कार का कारण पूछा तो कट्रीना ने कहा जो तारीख वे मांग रहे हैं, वह उन्होंने करण जौहर की दोस्ताना 2 फिल्म के लिए दे रखी हैं। कट्रीना की मजबूरी को समझते हुए राकेश ने कट्रीना से कहा कि वे कृष 2 में उन्हें ही रितिक के साथ कास्ट करना चाहते हैं इसलिए वे तारीखों के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश करेंगे। -raghuvendra Singh

Monday, December 7, 2009

पक्का इडियट का इकबालिया बयान

साताक्रूज में स्थित विधु विनोद चोपड़ा के दफ्तर की पहली मंजिल का विशाल कमरा...दरवाजे के करीब तीन कुर्सियों के साथ लगी है छोटी-सी टेबल और उसके ठीक सामने रखा है आधुनिक शैली का सोफा। लाल टीशर्ट,जींस और स्लीपर पहने आमिर कमरे में प्रवेश करते हैं। उनके हाथों में मोटी-सी किताब है। आमिर दैनिक जागरण की इस पहल का स्वागत करते हैं।
[दिल से चुनता हूं फिल्में]
फिल्म साइन करते समय यह नहीं सोचता हूं कि मुझे यूथ से कनेक्ट करना है या कोई मैसेज देना है। फिल्म की कहानी सुनते समय मैं सिर्फ एक आडियंस होता हूं। देखता हूं कि कहानी सुनते समय मुझे कितना मजा आया? मजा अलग-अलग रीजन से आ सकता है। या तो बहुत एंटरटेनिंग कहानी हो या इमोशनल कहानी हो या फिल्म कोई ऐसी चीज कह रही हो, जो सोचने पर मजबूर कर रही हो। मतलब यह है कि कहानी सुनते समय मेरा पूरा ध्यान उसी में घुसा रहे। केवल उसी के लिए हा करता हूं जिसकी कहानी मेरे दिल को छू लेती है।
['सरफरोश' के बाद का सफर]
पिछले दस सालों के अपने करिअर का रिव्यू करने पर मैं पाता हूं कि मेरी सारी फिल्में एक्सपेरिमेंटल किस्म की हैं। मेनस्ट्रीम से अलग हैं। अगर सोच-समझ कर फैसला लेता तो मैं ये फिल्में कर ही नहीं पाता। मैं अपने दिल को फालो कर रहा हूं। मैं थिंकिंग एक्टर नहीं हूं।
[मेरी प्रिय फिल्म 'तारे जमीं पर']
अपनी सबसे प्रिय फिल्म बताना बहुत मुश्किल काम है। एक फिल्म है, जिसका लोगों पर भयंकर असर हुआ है, इसलिए वह मुझे बहुत अजीज है। वह है 'तारे जमीं पर'। वह इसलिए अजीज नहीं है कि मैंने डायरेक्ट की। 'तारे जमीं पर'से मुझे ऐसी फिल्म का हिस्सा बनने का मौका मिला, जिससे लोगों का चाइल्ड एजुकेशन का नजरिया बदल गया। आफिसर से मिनिस्टर तक इस प्राब्लम को समझ पाए। इस फिल्म के पहले 'लर्निंग डिसएबिलिटी' या 'डिसलेक्सिया' की बात करने पर लोग ऐसे बच्चों के बारे में यही समझते थे कि वे बेवकूफ बना रहे हैं। बच्चा होमवर्क नहीं करता है तो बहाने बना रहा है। उस फिल्म ने सभी के सोचने-समझने का तरीका बदल दिया। देश में कितने बच्चे इस बीमारी से ग्रस्त रहे होंगे। अपने स्कूल लाइफ की बात करूं तो मेरे अनेक दोस्त किसी तरह गिर-पड़कर पास होते थे। उन्हें स्कूल में टीचर और घर में पैरेंट्स की डाट पड़ती थी। उन्हें लगता था कि वे बेवकूफ हैं और उनसे कुछ नहीं होता। इस तरह वे फुस्स हो गए। 'तारे जमीं पर' के बाद ऐसे बच्चों को फुस्स नहीं होना पड़ता।
[स्कूल डेज]
मैं पढने में एवरेज था। होमवर्क में मेरा इंटरेस्ट नहीं रहता था। खेल-कूद में ज्यादा इंटरेस्ट था। लकली मेरे पैरेंट्स ऐसे नहीं थे कि मुझ पर प्रेशर डालते। वैसे मैं कभी फेल नहीं हुआ। हमेशा सिक्सटी पसर्ेंट मार्क्स तो मिलते ही थे। मैं खेल-कूद में अच्छा था, इसलिए मेरा सेल्फ स्टीम बचा रहा। अगर आप बच्चे को हमेशा कोसते रहें या उसकी कमियों के बारे में बताते रहें तो उसे लगने लगता है कि वाकई मुझे कुछ नहीं आता। 'तारे जमीन पर'में एक सीन था, जिसमें निकुंभ जाकर बताता है कि कैसे प्राचीन समय में आदिवासी किसी पेड़ के पास आकर लगातार कोसते थे तो वह सूख जाता था। अपने आप मर जाता था। उसे काटने की जरूरत नहीं पड़ती थी। ज्यादातर बच्चों के साथ यही होता है। वे बच्चे ब्लूम ही नहीं कर पाते। स्कूल डेज बहुत खास होते हैं। बच्चों की खास केयर होनी चाहिए।
['थ्री इडियट' का आइडिया]
इसके बारे में मैं दो लोगों के कमेंट बताऊंगा। चेतन भगत की किताब 'फाइव प्वाइंट समवन' मैंने अभी तक नहीं पढ़ी है। बंगलुरू में शूटिंग के समय चेतन भगत मिलने आए थे। मैंने उनसे कहा कि चेतन, मैंने आप की किताब पढ़ी नहीं है। मैं पढना भी नहीं चाहूंगा, क्योंकि मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी है और उससे डिस्ट्रैक्ट नहीं होना चाहता। चेतन ने कहा कि पढना भी मत, क्योंकि राजू ने इतना बदल दिया है कि अब जो फिल्म बन रही है, वह मेरी किताब ही नहीं है। राजू से जब मैंने बात की तो उन्होंने कहा फिल्म की प्रेरणा बुक से ही मिली है, लेकिन यह फिल्म चेतन की बुक पर आधारित नहीं है।
[कैरेक्टर का माइंड]
मेरे लिए अहम चीज स्क्रिप्ट होती है। उसके बाद मैं जो किरदार प्ले कर रहा होता हूं, उसे समझना बहुत जरूरी होता है। उसके माइंड को पकडऩा होता है। लुक और स्टाइल तो कैरेक्टर के फिजिकल आस्पेक्ट्स हैं। मेरा अपियरेंस एक लेयर भर है। उसके अंदर कई लेयर होते हैं, जिनसे वह किरदार उभरता है। 'गजनी' का संजय सिंहानिया, 'लगान' का भुवन, 'दिल चाहता है' का आकाश, 'तारे जमीन पर' का निकुंभ, 'मंगल पाडे' और अभी '3 इडियट' का रैंचो..इन सभी के माइंड्स को समझने के बाद ही मैं इन कैरेक्टर्स को प्ले कर पाया। मुझे कैरेक्टर का हेड समझ में आ जाए तो सुर मिल जाता है। फिर वाइब्रेशन मिलने लगता है। उसके बाद बाहरी चीजों पर ध्यान देता हूं। सिर्फ हेयर कट और कपड़ों से किरदार नहीं बनता।
['थ्री इडियट' का रैंचो]
मैंने राजू से कहा था कि मुझे कहानी बहुत पसंद आई है और मैं आप के साथ काम भी करना चाहता हूं, लेकिन जो किरदार आप मुझे दे रहे हैं, वह 20 साल का है। मैं अभी 43 का हूं और फिल्म रिलीज होने तक 44 का हो जाऊंगा। आप ऐसे एक्टर को चुनें जो 20 साल का लगे। राजू ने पलट कर कहा था, 'मेरे किरदार का नाम है रैंचो। जितना अजीब नाम है उसका, उतनी ही अजीब उसकी पर्सनैलिटी है। जैसे, आप नार्मल इंसान नहीं हो और टोटली अजीबोगरीब डिसीजन लेते हो। वैसा ही वह है।' रैंचो की फिलासफी है कि काबिलियत के पीछे भागो, उसके बाद कामयाबी आप के पीछे भागेगी। लाइफ में मेरी भी यही फिलासफी रही है। राजू का यही कहना था कि आप रैंचो प्ले करोगे तो रियल लगेगा। कोई और करेगा तो झूठ लगेगा। यही वजह है कि मैंने रैंचो को चैलेंज के तौर पर लिया। 20 साल का बन कर दिखाया।
[करीना से केमिस्ट्री]
केमिस्ट्री के बारे में बताने के पहले बॉयोलोजी बताता हूं। करीना के साथ '3 इडियट' करने का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि उनके जैसी खूबसूरत अभिनेत्री के साथ समय बिताने का मौका मिला। दिन बड़ा अच्छा कटता था। खूबसूरत सा चेहरा देखने को मिलता है तो बड़ा अच्छा लगता है। आखें सेंकने का मौका मिलता है। उनके साथ काम करना अच्छा रहा। वे ग्रेट एक्टर हैं। वह बहुत अच्छी इंसान भी हैं। वह डाउन टू अर्थ हैं। वेरी कैजुअल और ग्रेट फ्रेंड हैं। हमारे बीच कोई इश्यू नहीं रहा। कह सकता हूं कि करीना के साथ केमिस्ट्री बहुत अच्छी रही।
[किरण ले आईं तब्दीली]
हा, इधर कुछ सालों से मैं बदल रहा हूं। पिछले चार-पाच सालों में मेरी जिंदगी में सबसे बड़ी तब्दीली के रूप में किरण आई हैं और उनकी वजह से मुझ में तब्दीली आ गई है। किरण की ब्राइट पर्सनैलिटी है। पॉजीटिव हैं वह..कैसे एक्सप्लेन करूं? पहाड़ी नदी होती है ना वाइब्रेंट और प्लेफुल, वैसी हैं किरण। उन्हें जानने और उनके साथ रहने के बाद मेरी पर्सनैलिटी में फर्क आया है। मैं थोड़ा रिलैक्स हुआ हूं। पहले मैं थोड़ा शात और खामोश रहता था। किरण से रिलेशनशिप बढऩे के बाद खुल गया हूं। मुझ में बदलाव आ गया है। अब मैं अपने ब्लाग के जरिए यूथ से कनेक्ट हो पाता हूं। अपनी फीलिंग्स शेयर कर पाता हूं। मैं उनकी जबान में ही बातें करता हूं। मुझे लगता है कि अगर मैं पाच साल पहले ब्लाग लिखता तो बहुत सीरियस होता और बोरिंग होता।
[फुर्सत में पढ़ाई]
फुर्सत मिलती है तो बच्चे, बीवी और फैमिली के साथ वक्त बिताना अच्छा लगता है। मुझे किताबें पढने का बेहद शौक है। रात में पढने के बाद ही सोता हूं। वर्किंग डे में फुर्सत नहीं मिलती तो गाड़ी में पढ़ता हूं। मुंबई में कहीं आने-जाने में आधे घटे का समय मिल ही जाता है। मैं बहुत तेजी से पढ़ता हूं। 500-600 पेज की किताब दो दिनों में खत्म कर देता हूं।
[रूबिक क्यूब और थ्री डाइमेंशनल सोच]
लोग यह तो जानते हैं कि रूबिक क्यूब में मेरा इंटरेस्ट है, लेकिन शायद यह नहीं जानते कि मेरा फास्टेस्ट टाइम 28 सेकेंड्स है। कालेज के फ‌र्स्ट ईयर के समय से यह कर रहा हूं। रूबिक क्यूब मेरा एक्सटेंशन है। '3 इडियट' का रैंचो भी इसे खेलता रहता है। रूबिक क्यूब वास्तव में मैथ है। यदि आप की सोच थ्री डायमेंशनल है तो आप इसे सुलझा सकते हैं। एक समय मैं इसकी व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में हंगरी जाना चाहता था, पर नहीं जा पाया।
-सौम्या अपराजिता/रघुवेन्द्र सिंह

आंखें बंद कर मेरी नकल मत करे-आमिर खान

फिल्म गजनी के लिए आमिर खान ने महज तेरह महीने में 'एट पैक एब्स' बनाकर तमाम लोगों को हैरत में डाल दिया था। प्रतिदिन जिम में घंटों वर्कआउट करने वाले देश भर के नवयुवकों के लिए वह अचानक आदर्श बन गए। अब आमिर ने नई फिल्म थ्री इडियट्स के लिए अपनी बॉडी को एक नया लुक दिया है। आइए जानते है आमिर खान की फिटनेस के राज
'एट पैक एब्स' की चुनौती
आमिर खान के अनुसार, ''मैं हमेशा फिल्म की पटकथा का अनुसरण करता हूं। मेरे किरदार की जो मांग होती है, मैं वही करता हूं। गजनी का संजय सिंघानिया शारीरिक रूप से ताकतवर था। मेरा शारीरिक रूप से शक्तिशाली होना उस किरदार की मांग थी। शुरू में मुझे पता नहीं था कि मैं यह किरदार निभा सकूंगा या नहीं। ऐसा इसलिए, क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी में कभी 'बॉडी बिल्डिंग' नहीं की थी। मुझे पता है कि 'प्रॉपर बॉडी' बनाने में कम से कम दो साल का वक्त लगता है। उस दौरान मेरे पास छह महीने का समय था। मैंने जिस तीव्रता के साथ शरीर को शक्तिशाली बनाने की प्रक्रिया शुरू की, उस तरह का प्रयास एक सामान्य व्यक्ति को कभी नहीं करना चाहिए। यह बात सेहत के लिए अच्छी नहीं है। सौभाग्यवश मुझे बॉडी बनाने के लिए 13 महीने का समय मिल गया।''
इन बातों पर दें ध्यान
''मैं थ्री इडियट्स में 20 साल के युवक की भूमिका निभा रहा हूं। इस किरदार के लिए मुझे 'लीन बॉडी' की दरकार थी। इसके लिए मुझे मांसपेशियों को ढीला करना था। इस कार्य के लिए मैंने कोई प्रशिक्षक नहीं रखा। प्रतिदिन सुबह मैं दो घंटे बैडमिंटन खेलता था। संतुलित-पौष्टिक भोजन ग्रहण करता था। गजनी के लिए तो मैं रोज साढ़े तीन घंटे वर्कआउट करता था। एक निश्चित आहार ग्रहण करता था। हफ्ते में छह दिन वर्कआउट करता था और एक दिन छुंट्टी लेता था। उस दौर में सत्यजीत चौरसिया मेरे प्रशिक्षक थे। मुझे पता नहीं है कि मैं इस उम्र में अपनी बॉडी के साथ जो कर रहा हूं वह सही है या गलत। बहरहाल, मैं किसी अन्य व्यक्ति को अपने फिटनेस कार्यक्रम का अनुसरण करने की सलाह नहीं दूंगा। मुझे नहीं लगता कि डॉक्टर भी किसी को ऐसा करने की सलाह देंगे।''
डाइटिंग का मतलब समझें
''डाइटिंग का मतलब है सही और स्वास्थ्यकर आहार ग्रहण करना। जो लोग डाइटिंग के नाम पर खाना बंद कर देते हैं, वह गलत तरीका है। डाइटिंग का आशय है कि आप स्वास्थ्यकर खाना खाएं। इसका यह मतलब नहीं है कि आप कम खाना खाएं। जब आप भूख से कम खाते हैं, तो इसका दुष्प्रभाव आपकी सेहत पर पड़ता है। कम खाना कभी नहीं खाना चाहिए।''
कारगर टिप्स
''अगर आपका वजन अधिक है और आपके शरीर में वसा की मात्रा ज्यादा है, तो आपको अधिक कैलोरी वाले फूड्स से परहेज करना चाहिए। तभी धीरे-धीरे आपका वजन नियंत्रित होगा। वहीं अगर आप शरीर को मजबूत बनाना चाहते है, तो आपको खान-पान में प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी चाहिए। जब आप प्रोटीनयुक्त आहार की मात्रा को बढ़ाते है, तो मेरी राय में आपको हर महीने अपने डॉक्टर के परामर्श से अपना चेकअॅप करवाना चाहिए। यह जानने के लिए कि आपके लिवर, गुर्दे और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंग ठीक तरह से काम कर रहे हैं या नहीं।''
-रघुवेन्द्र सिंह