Friday, February 25, 2011

तनु वेड्स मनु- मस्त है शादी

मुख्य कलाकार : आर माधवन, कंगना रनौत, जिमी शेरगिल, दीपक डोबरीयाल, राजेन्द्र गुप्ता, के के रैना, इजाज खान, स्वरा भास्कर।
निर्देशक : आनंद एल राय
तकनीकी टीम : विनोद बच्चन, शैलेश आर सिंह, सूया सिंह, कहानी- हिमांशु शर्मा, संगीत- कृष्णा

ब्याह हिंदी फिल्मों का एक सफल और लोकप्रिय विषय रहा है। यश चोपड़ा और सूरज बड़जात्या की फिल्मों में हम सच और कल्पना के मेल से सदैव विवाह का एक आदर्श रूप देखते आए हैं, लेकिन आनंद एल राय की फिल्म तनु वेड्स मनु में उत्तर भारत में लड़की दिखाने के रिवाज से बारात के आगमन तक को बिना किसी लाग-लपेट के असली रंग में पेश किया है। लंदन से दुल्हन की खोज में कानपुर आए डॉक्टर मनोज शर्मा उर्फ मनु परिचित किरदार लग सकते हैं, परंतु शराब और सिगरेट की शौकीन एवं हर हफ्ते एक नया ब्वॉयफ्रेंड बनाने में यकीन रखने वाली तनुजा त्रिवेदी उर्फ तनु फिल्मों में आई अब तक उत्तर प्रदेश की सीधी-सादी, घरेलू, आज्ञाकारी बेटियों सी नहीं है। देव डी में अनुराग कश्यप द्वारा गढ़े पारो के किरदार के बाद तनु वेड्स मनु की तनु भारत के छोटे शहरों की नई पीढ़ी की स्वछंद, निरंकुश, बिंदास, कंफ्यूज लड़की की छवि पेश करती हैं।
तनु के लिए प्यार सिर्फ एस्ट्रोजन, टेस्ट्रोजन जैसे हार्मोस हैं। उसे अरेंज मैरिज से नफरत है। तनु को सहज, सरल और सपाट जीवन पसंद नहीं। मनु जब तनु को पहली बार देखता है तो उसे प्यार हो जाता है। वह शादी के लिए हां कर देता है, लेकिन तनु उससे कहती है कि वह शादी से इंकार कर दे क्योंकि उसका ब्वॉयफ्रेंड है। मनु अपने लिए दूसरी लड़कियां देखना शुरू करता है। किस्मत मनु को पंजाब में उसके दोस्त की शादी में फिर तनु से मिलाती है। तनु की खुशी के लिए मनु उसके मां-पिता को उसके गुंडे ब्वॉयफ्रेंड अवस्थी से शादी के लिए राजी करता है, लेकिन जब सरलता से सब होने लगता है, तनु की अवस्थी से शादी होने लगती है तो वह घबराने लगती है। वह शादी के एक दिन पहले अवस्थी से ब्याह करने से इंकार कर देती है।
लेखक हिमांशु शर्मा ने तनु वेड्स मनु में कानपुर की कहानी में पंजाब का सुंदर छौंक लगाया है। विविध भारती पर अमीन सयानी की आवाज से शुरू हुई फिल्म फ्रेश और रोचक संवादों के साथ खूबसूरती से आगे बढ़ती है। कृष्णा के संगीत पर राजशेखर के बोल कहानी में रूचि बनाए रखने में मदद करते हैं। पृष्ठभूमि में आया गीत रंगरेज का मनु और तनु की भावनाओं के अभिव्यक्ति के लिए अच्छा इस्तेमाल किया गया है। मनु और तनु के व्यक्तित्व का विरोधाभास बांधे रखता है, लेकिन मध्यांतर के बाद पटकथा लचर हो गई है। तनु का मनु के प्रति अचानक प्रेम का अहसास और अवस्थी का अपनी गर्लफ्रेंड तनु की मनु से शादी के लिए रजामंदी खटकती है। छोटे शहर की तनु के किरदार में कंगना रनौत के अभिनय का अलग पहलू देखने को मिलता है। इस किरदार को स्वीकार करके कंगना ने साहस दिखाया है। मनु के किरदार में आर माधवन की उम्दा अदाकारी देखने को मिलती है। छोटी भूमिका में जिमी शेरगिल असर छोड़ जाते हैं। दीपक डोबरियाल, स्वरा भास्कर और एजाज खान सहयोगी भूमिकाओं में प्रभावित करते हैं।

-तीन स्टार
-रघुवेन्द्र सिंह


Thursday, February 24, 2011

पापा है कमाल

बॉबी देओल के लिए नए वर्ष की शुरुआत धमाकेदार हुई है। यमला पगला दीवाना फिल्म के रूप में उन्होंने साल के आरंभ में अपने नाम एक सुपरहिट फिल्म कर ली है। बॉबी अपनी खुशी बांटते हैं, मैं पहले से कॉन्फिडेंट था कि फिल्म अच्छी बनी है। कितनी चलेगी, यह रिलीज के बाद पता चलता है। मुझे इस बात की खुशी हुई कि फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने यमला पगला दीवाना के बारे में ट्विटर पर बात की। लोग इसके बारे में ऐसे बात कर रहे थे जैसे उनकी फिल्म हो। फिल्म की सफलता से मुझे अहसास हुआ कि दुनिया में हमारे परिवार के लिए लोगों में कितना ज्यादा प्यार है।
यमला पगला दीवाना की सफलता की बड़ी वजह बॉबी पापा धमर्ेंद्र को मानते हैं। उन्हें गर्व है कि उनके पापा ने पचहत्तर साल की उम्र में एक सुपरहिट फिल्म दी है। बॉबी कहते हैं, पापा के इंडस्ट्री में पचास साल पूरे हो गए। पचहत्तर की उम्र में कोई ऐसी हिट फिल्म दे, तो कमाल की बात है। पापा को लोग बहुत प्यार करते हैं। लोग उन्हें बार-बार पर्दे पर देखना चाहते हैं। उनकी वजह से हमें प्यार मिलता है। सबका बहुत-बहुत शुक्त्रिया!
धर्मेद्र, सनी देओल और बॉबी तीन साल पहले पहली बार एक साथ अपने फिल्म में आए थे। यमला पगला दीवाना की तरह वह फिल्म भी सफल हुई थी। धर्मेद्र, सनी और बॉबी के बारे में कहा जा रहा है कि तीनों देओल एक-दूसरे के लिए लकी हैं। बॉबी इस बारे में हंसते हुए कहते हैं, हम ऐसा नहीं सोचते हैं। हम तीनों लकी हैं कि हम साथ हैं। उससे ज्यादा लक क्या हो सकता है? जिंदगी में फिल्म चले या न चले, हमारा साथ रहना जरूरी है। मैं लकी हूं कि मुझे पापा और भैया के साथ फिल्म में काम करने का अवसर मिलता है। हमें एक साथ देखना दर्शकों को भी अच्छा लगता है। हम भविष्य में भी साथ काम करेंगे।
पिता-पुत्र की लोकप्रिय और सफल तिकड़ी ने अपनी अगली फिल्म के बारे में सोचना शुरू कर दिया है। देओल परिवार ने यमला पगला दीवाना के युवा लेखक जसविंदर सिंह बथ पर इसका सीक्वल लिखने की जिम्मेदारी सौंप दी है। बॉबी बताते हैं, हम इसका पार्ट 2 बनाने जा रहे हैं। अपने के बाद हमें तीन साल लगा दोबारा साथ आने में, लेकिन इस बार इतना समय नहीं लगेगा। बस जल्दी से एक अच्छी कहानी हमारे लेखक लिख दें। कहानी अच्छी बननी चाहिए। यदि यमला पगला दीवाना की स्क्रिप्ट अच्छी नहीं होती, तो हम तीनों के रहने से फिल्म नहीं चलती। पापा, भैया और मुझे साथ लेकर कई निर्माता फिल्म बनाना चाहते हैं, लेकिन जब तक कहानी अच्छी नहीं मिलेगी, हम साथ काम नहीं करेंगे। बॉबी की अगली फिल्म होगी अनीस बज्मी की थैंक्यू। यह कॉमेडी फिल्म है। बॉबी बताते हैं, फिल्म थैंक्यू के अलावा मैं अब्बास-मस्तान की प्लेयर फिल्म भी कर रहा हूं। अब्बास-मस्तान तो मेरे घर के लोग हैं। दोनों फिल्मों को लेकर मैं बहुत एक्साइटेड हूं। इस साल यही दो फिल्में आएंगी। मैं और स्क्रिप्ट पढ़ रहा हूं। जब तक मुझे अच्छी स्क्रिप्ट के साथ अच्छी टीम नहीं मिलेगी, मैं कोई फिल्म साइन नहीं करूंगा। क्रिकेट की तरह फिल्म में भी अच्छी टीम का होना बहुत जरूरी है, वरना जीत नहीं मिलेगी।
-रघुवेंद्र सिंह

सपना हो रहा है पूरा-रतन राजपूत

रतन राजपूत जब दिल्ली में थिएटर में थीं, तब अक्सर उन्हें नौकरानी या दूसरे किस्म के साधारण किरदार निभाने के लिए दिए जाते थे। नाटक का हीरो उन्हें तवज्जो नहीं देता था। इसका कारण रतन का साधारण लुक और दुबली-पतली काया थी, लेकिन वही रतन जब जी टीवी के सीरियल अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो की लाली के रूप में प्रसिद्ध हुई तो उनके चाहने वालों की संख्या असंख्य हो गई। बहुत जल्द एक राष्ट्रीय चैनल पर अब वही रतन देश भर से आए नवयुवकों में से अपने लिए वर का चुनाव करेंगी। रतन के लिए यह गर्व का पल है। वे कहती हैं, मेरे पिता कमिश्नर हैं। उनका सिर किसी के सामने नहीं झुकता, लेकिन एक बेटी के पिता के तौर पर मैंने उन्हें सिर झुकाते देखा है। मैं पांच बहनों में सबसे छोटी हूं। स्वयंवर रचाकर मैं पिताजी को बेटा होने का अहसास कराऊंगी। पहली बार बेटी का बाप होने के बावजूद उनका सिर मेरी शादी में नहीं झुकेगा।
रतन ने पटना से दिल्ली और दिल्ली से मुंबई का सफर तय करके अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो से अभिनय जगत में सम्मान अर्जित कर छोटे शहर की लड़कियों की प्रेरणा बन गई। उनके द्वारा इमेजिन चैनल पर रियलिटी शो स्वयंवर 3 : रतन का रिश्ता के जरिए अपने लिए पति ढूंढना एक ऐतिहासिक कदम है। दुनिया हैरत में है। रतन आत्मविश्वास के साथ कहती हैं, इसमें हैरानी की क्या बात है! हर लड़की के जीवन में यह पड़ाव आता है। मैं बहुत खुश हूं। सीता जी मिथिलांचल से थीं। उनका स्वयंवर हुआ था। मैं भी मिथिलांचल से हूं और अब मेरा स्वयंवर होने जा रहा है। मैं बहुत उत्साहित हूं। मैं खुश हूं कि मुझे अपना वर चुनने का मौका मिल रहा है। आज के जमाने में कितनी लड़कियों को ऐसा मौका मिलता है? शादी मेरे बचपन का सपना था। मेरा वह सपना पूरा होने जा रहा है।
रतन के स्वयंवर की तैयारियां इन दिनों जोर-शोर से चल रही है। वे बैठकर सब देख रही हैं। इस बाबत रतन कहती हैं, अरे भाई लड़की की शादी होती है, तो वह खुद काम थोड़े ही करती है। मैं बैठकर सारी तैयारियां देख रही हूं। इमेजिन के लोग तैयारियां कर रहे हैं। रतन के मन में आजकल अनेक प्रकार की भावनाएं उमड़ रही हैं। कैसे-कैसे लड़के आएंगे? क्या उन्हें उनके सपनों का राजकुमार मिलेगा? रतन कहती हैं, मैं बहुत नर्वस हूं। मुझे डर भी है कि कहीं लोग लाली को ढूंढते हुए मेरे स्वयंवर में न आ पहुंचें। गौरतलब है कि रतन ने अपने परिवार और रिश्तेदारों की सहमति के बाद रियलिटी शो में स्वयंवर करने का फैसला किया है।
रतन को केयरिंग, सपोर्टिव, इंडिपेंडेंट और दूसरों का सम्मान करने वाला लड़का चाहिए। उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता की लड़का गांव से है या शहर से। रतन कॉन्फिडेंट हैं कि स्वयंवर का असर उनके करियर पर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है, मैं शादी करने के बाद एक्टिंग को भूल नहीं जाऊंगी। दर्शकों को इससे क्या फर्क पड़ेगा कि रतन शादीशुदा है या नहीं। मैं पॉजिटिव सोचती हूं। देखते हैं कि शादी के बाद क्या होता है? रतन मानती हैं, इंसान ऊपर वाले के हाथ की कठपुतली है। वह जैसे नचाएगा, वैसे नाचना पड़ेगा। वैसे, जो होगा, अच्छा होगा, मैं इसी बात में यकीन करती हूं। मैं अपने स्वयंवर को लेकर पॉजिटिव हूं। मुझे आशा है कि मेरा जीवनसाथी शो में मिल जाएगा।
-रघुवेंद्र सिंह

शाहिद की बर्थडे पार्टी में प्रियका को नहीं बुलावा

शाहिद कपूर की गर्लफ्रेंड हैं प्रियका चोपड़ा। जाहिर है कि शाहिद की जिंदगी में प्रियका की खास जगह है, इसके बावजूद शाहिद की बर्थडे पार्टी का निमत्रण प्रियका चोपड़ा को नहीं मिला है। मिली जानकारी के मुताबिक शाहिद के खास दोस्तों ने उनके लिए 24 फरवरी की रात सरप्राइज बर्थडे पार्टी देने की योजना बनाई है। यह पार्टी शाहिद के फिल्म इंडस्ट्री के दोस्त नहीं, बल्कि उनके गैर फिल्मी दोस्त दे रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इस पार्टी में शाहिद कपूर की गर्लफ्रेंड प्रियका चोपड़ा को आमत्रित नहीं किया है। वे शाहिद के तीसवें जन्मदिन को अलग ढंग से सेलीब्रेट करना चाहते हैं। शाहिद के दोस्त नहीं चाहते हैं कि उनके बीच फिल्म इंडस्ट्री के लोग मौजूद हों।
गौरतलब है कि पच्चीस फरवरी, 1981 को पैदा हुए शाहिद कपूर का कल जन्मदिन है। पच्चीस फरवरी का दिन शाहिद अपने परिवार और मित्रों के सग व्यतीत करेंगे। शाहिद के लिए यह साल बेहद खास है। इस साल पिता पकज कपूर निर्देशित उनकी फिल्म 'मौसम' रिलीज होगी। जिसे लेकर शाहिद बेहद उत्साहित हैं। हमारी ओर से शाहिद कपूर को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं!



देसी कुड़ी कंगना

आनद एल राय निर्देशित 'तनु वेड्स मनु' फिल्म की सफलता को लेकर कंगना निश्चित हैं। कंगना आत्मविश्वास के साथ कहती हैं, 'तनु वेड्स मनु' अच्छी फिल्म है और अच्छी फिल्म को चलने से कोई नहीं रोक सकता है।'
गौरतलब है कि 'तनु वेड्स मनु' में कंगना ने कानपुर की तनुजा त्रिवेदी की भूमिका निभाई है। तनुजा उर्फ तनु बेहद चचल, स्मार्ट और इंटेलीजेंट है। वह अपने अंदाज में जिंदगी जीती है। इस किरदार में कंगना पहली बार देसी अवतार में नजर आएंगी। कंगना कहती हैं, 'अब तक दर्शकों ने मुझे मॉडर्न ड्रेस में देखा था। इसमें मैंने शुद्ध भारतीय ड्रेस पहने हैं। मैंने सलवार-कमीज पहनी है। मेरा लुक फिल्म का एक विशेष आकर्षण है।'
'तनु वेड्स मनु' में कंगना रनौत के साथ आर माधवन हैं। 'वस अपॉन अ टाइम इन मुंबई', 'नॉकआउट' और 'नो प्रॉब्लम' जैसी फिल्मों के बाद 'तनु वेड्स मनु' जैसी फिल्म, जिसमें कोई स्टार अभिनेता नहीं है, में काम करने की वजह क्या रही? इस सवाल पर कंगना कहती हैं, 'मैं हीरो का हाथ पकड़कर नहीं चलती हूं। मैं हीरो देखकर या बड़ा निर्देशक देखकर फिल्म साइन नहीं करती हूं। यदि मुझे भरोसा है कि फिल्म चलेगी, स्क्रिप्ट अच्छी है, निर्देशक अच्छे हैं, तो मैं काम करती हूं। आनद की यह दूसरी फिल्म है, लेकिन मुझे उनकी स्क्रिप्ट अच्छी लगी, इसलिए मैंने उनके साथ काम किया। 'तनु वेड्स मनु' में जयमाल लेकर खड़ी कंगना निजी जीवन में कब तक शादी करेंगी? जवाब में कंगना कहती हैं, 'मुझे अब तक ऐसा कोई मिला ही नहीं है, जिसके साथ घर बसा सकूं। फिलहाल मैं अपने काम में बिजी हूं।'
इधर पिछले कुछ समय से कंगना ने अपने कॅरियर का रुख बदल दिया है। अब वह कॉमेडी फिल्मों को तरजीह दे रही हैं। कंगना बताती हैं, 'आजकल मैं डेविड धवन की फिल्म 'रासकल' की शूटिंग कर रही हूं। यह भी कॉमेडी फिल्म है। इसके अलावा मैं इन्द्र कुमार की कॉमेडी फिल्म 'डबल धमाल' कर रही हूं। 'तनु वेड्स मनु' भी रोमाटिक कॉमेडी है। मुझे कॉमेडी फिल्मों की शूटिंग में मजा आ रहा है। खास बात यह है कि कॉमेडी फिल्मों का दर्शक वर्ग बहुत बड़ा है। इन फिल्मों से मेरी लोकप्रियता बढ़ेगी। मेरी पहचान का दायरा बड़ा होगा।
आनद एल राय निर्देशित यह फिल्म दो विपरीत स्वभाव के लोगों की कहानी है। मनोज शर्मा उर्फ मनु सीधा-सादा लड़का है। लदन में रहने के बावजूद वह अरेंज मैरिज में विश्वास करता है। परिवार के कहने पर मनु लदन से कानपुर अपने लिए लड़की देखने आता है। तनुजा त्रिवेदी उर्फ तनु चचल, शरारती, लेकिन समझदार और बुद्धिमान लड़की है। वह दुनिया के नियम-कानून नहीं मानती। अरेंज मैरिज में उसका यकीन नहीं है। विपरीत स्वभाव के तनु और मनु की शादी क्या होगी और यदि होगी तो कैसे? यह देखना रोचक होगा। इसकी शूटिंग कानपुर और पजाब के कुछ शहरों में हुई है। निर्माता शैलेश सिह तनु वेड्स मनु के बारे में कहते हैं कि लबे समय के बाद भारत का असली रंग और मि˜ी की खुशबू इस फिल्म में मिलेगी। फिल्म के गीतकार हैं राजशेखर और सगीतकार हैं कृष्णा। कंगना और आर माधवन के साथ मुख्य भूमिकाओं में है जिमी शेरगिल, स्वरा भास्कर, दीपक डोबरियाल आदि।
-रघुवेन्द्र सिह

Friday, February 18, 2011

कच्चा लिंबू- किशोरावस्था की उलझनें

मुख्य कलाकार : ताहिर सुतरवाला, चिन्मय कांबली विनय पाठक, रुखसार, इरावती हर्षे, भैरवी गोस्वामी, अतुल कुलकर्णी, राजेश खट्टर

निर्देशक : सागर बल्लारी

तकनीकी टीम : निर्माता- सीमांतो रॉय, संगीत- अमरदीप निज्जर

किशोरावस्था में प्रवेश करते समय एक लड़के के जीवन में कई बदलाव होते हैं। खास तौर से स्वतंत्र सोच का निर्माण, लड़कियों की ओर आकर्षण, दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने की ललक।
कच्चा लिंबू फिल्म का केंद्रीय पात्र तेरह वर्षीय शंभू व्यक्तित्व निर्माण के इसी रचनात्मक दौर से गुजर रहा है। वह स्कूल में ढेर सारे दोस्त बनाना चाहता है, अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन करना चाहता है, लंच ब्रेक में दूसरे स्कूल में जाकर एक लड़की को छुपकर निहारता है, लेकिन शंभू का दोस्त कोई नहीं बनना चाहता। सब उससे दूर भागते हैं। उससे नफरत करते हैं। उसकी हीरो बनने की कोशिश हर बार फेल हो जाती है। शंभू घर में भी अकेला है। उसकी मम्मी ने दूसरी शादी की है। वह न तो मम्मी और न ही पापा से मन की बात कहता है। अंत में शंभू घर छोड़कर भाग जाता है। कोलीवाड़ा में उसकी मुलाकात विट्ठल से होती है। विट्ठल अनपढ़ है, लेकिन बिंदास है। वह किसी से दबता और डरता नहीं। विट्ठल और शंभू गहरे दोस्त बन जाते हैं। नन्हा विट्ठल अपने घर के झगड़ों से परेशान होकर शंभू के साथ घर छोड़कर भाग जाता है। शंभू और विट्ठल अभिभावकों के मित्रतापूर्ण व्यवहार और उचित मार्गदर्शन से वंचित हैं।
शंभू और विट्ठल के किरदार को ताहिर सुतरवाला और चिन्मय कांबली ने सुंदरता से निभाया है। मोटे शंभू के रूप में सागर बल्लारी ऐसे पात्र को केंद्र में लाए हैं, जो अमूमन फिल्मों में गौण रहा है। सागर का यह साहस सराहनीय है। किशोरावस्था की उलझनों और रोचक बदलावों को सहज और संवेदनशील तरीके से वे पेश करने में सफल हैं। वे इंगित करते हैं कि किशोर बच्चों को अभिभावकों के स्नेह के साथ मित्रवत व्यवहार की बहुत जरूरत होती है। शंभू का चरित्र स्थापित होने के बाद भी सागर का चरित्र निर्माण के लिए बार-बार साधारण घटनाओं का जोड़ फिल्म को लंबा एवं उबाऊ बना देता है। लंबे-लंबे संवाद मराठी भाषा में रखने से लेखक-निर्देशक को बचना चाहिए था।
-ढाई स्टार
-रघुवेन्द्र सिंह


Monday, February 14, 2011

मेरा परफेक्ट वैलेंटाइन

आजकल की युवा पीढ़ी को 'परफेक्ट वैलेंटाइन' की तलाश होती है, जिनके साथ 'वैलेंटाइन डे' के दिन कुछ मधुर, खुशनुमा और प्यार-भरे पल बिताकर अपने प्रेम-संबंध को गहराई दे सकें। सिल्वर स्क्रीन के कुछ सितारों को तो उनका हमसफर मिल गया है, पर कुछ अभी भी अपने 'परफेक्ट वैलेंटाइन' की तलाश कर रहे हैं।

मेरी फैमिली का सम्मान करे: रणबीर कपूर

सबसे पहले जरूरी है कि मेरी वैलेंटाइन एक अच्छी ह्यूमन बीइंग हो। वह मेरी फैमिली का सम्मान करे। मैं सिर्फ उससे उम्मीद नहीं करूंगा। उसकी उम्मीदों पर भी खरा उतरने की कोशिश करूंगा। उम्र और रंग-रूप मेरे लिए बहुत अधिक मायने नहीं रखता है। मेरा मानना है कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती है। मैंने तय किया है कि जब मुझे प्यार होगा, तभी मैं शादी करूंगा।

मुझे खुश रखे: दीपिका पादुकोण

फिल्म स्टार की लाइफ बेहद कठिन होती है। त्याग और समझौते करने पड़ते हैं। मेरा 'परफेक्ट वैलेंटाइन' वही होगा जो मुझे और मेरे प्रोफेशन की जरूरतों और मजबूरियों को समझते हुए मुझे जीवन की छोटी-छोटी खुशियां दे पाए। मेरी लाइफ में सक्सेस और मनी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। छोटी-छोटी चीजें मुझे खुश करती हैं। मैं चाहूंगी कि मेरा वैलेंटाइन मेरी भावनाओं को समझे। एक और बात मैं बेहद व्यवस्थित रहती हूं तो उसे भी मेरी तरह व्यवस्थित और अनुशासित होना चाहिए।

जो सरल और सहज हो: रजत बरमेचा

मैं चाहता हूं कि मेरी वैलेंटाइन स्वभाव से घरेलू हो जो मेरे परिवार में घुल-मिल जाए और उन्हें अपना बना ले। वह सरल हो और सहज हो। सबसे खास बात कि वह वर्किंग हो ताकि जब हम रिलेशनशिप में आगे बढ़ें तो उसे मेरी व्यस्तता से प्रॉब्लम न हो। वह भी अपने कॅरियर पर फोकस करे। वह भी व्यस्त रहे। मैं 21 का ही हूं, तो अभी मेरे पास अपनी 'परफेक्ट वैलेंटाइन' ढूंढ़ने के लिए काफी वक्त है।

मेरे लिए कविताएं लिखे: कट्रीना कैफ

आज के जवान लड़के-लड़कियां दोस्त होते हैं। समय बीतने और साथ रहने के बाद उन्हें एहसास होता है कि वे प्रेमी हैं। मैं चाहती हूं कि मेरा वैलेंटाइन सबसे पहले मेरा अच्छा दोस्त हो। मुझे पता है कि प्यार का दूसरा नाम दर्द है, पर मेरा नजरिया पॉजिटिव है। मुझे लगता है कि प्यार जीवन का सबसे खूबसूरत एहसास है, जो मुझे यह एहसास दिला सके। वही मेरी नजर में मेरा परफेक्ट वैलेंटाइन है। एक और बात किसी ने मेरे लिए आज तक कविता नहीं लिखी है। अगर वह मेरे लिए कविता लिखेगा, तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा।

मिल गया परफेक्ट वैलेंटाइन: सेलिना जेटली

जो संस्कारी हो, जिसमें ग्रेट सेंस ऑफ ह्यूंमर हो, मेरे मम्मी-पापा को रिस्पेक्ट दे तथा लंबा और हैंडसम हो, वही मेरे वैलेंटाइन हो सकता है। मुझे काले और गोरे से फर्क नहीं पड़ता। खुशी की बात है कि मुझे मेरा परफेक्ट वैलेंटाइन मिल गया है। मुझे ये सारी खूबियां मेरे मंगेतर पीटर हाग में मिल गयी हैं। इसलिए मैंने उनके साथ सितंबर में शादी करने का फैसला कर लिया है।

मेरे पापा की तरह हो: सोनम कपूर

चाहती हूं कि मेरा वैलेंटाइन मेरे पापा की तरह स्मार्ट, इंटेलीजेंट, केयरिंग और समझदार हो। फैमिली वैल्यूज में उसका यकीन हो। हां, एक बात और है उसकी मूंछें मेरे पापा की तरह ही होनी चाहिए। उसमें मुझे मेरे पापा की छवि दिखनी चाहिए। मुझे पता है कि ऐसे लड़के की तलाश करना मुश्किल है। फिर भी उम्मीद पर दुनिया कायम है।

सौम्या अपराजिता/रघुवेन्द्र सिंह