Saturday, March 26, 2011

भारत पर फिदा एक्स मैन सुपरस्टार ह्यू जैकमैन


फिक्की फोरम में एक मंच पर आए शाहरुख खान और ह्यू जैकमैन

मुम्बई, २६ फरवरी. फिक्की फोरम 2011 के अंतिम दिन शुक्रवार को हॉलीवुड सुपर स्टार ह्यू जैकमैन और हिंदी सिनेमा के किंग शाहरुख खान एक मंच पर आए। दोनों स्टार्स ने न सिर्फ हॉल में एकत्रित लोगों का भरपूर मनोरंजन किया बल्कि बॉलीवुड और हॉलीवुड सिनेमा पर गंभीर चर्चा की। एक्स मैन सीरीज और वुलवरीन फेम ह्यू जैकमैन का परिचय शाहरुख खान ने बॉलीवुड स्टाइल में दिया। जैकमैन की फिल्मों के दृश्य और हिंदी फिल्मों के गीत मिलाकर एक ऑडियो विजुअल तैयार किया गया था। पहली बार हिंदुस्तान आए जैकमैन ने कहा कि मैं मुंबई में 24 घंटे रहा हूं, लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे एक माह से हूं। यहां का कल्चर और डाइवर्सिटी कमाल की है। मैं भारत वापस आना पसंद करूंगा। जैकमैन ने खुद को शाहरुख का फैन बताते हुए कहा कि वे बॉलीवुड फिल्मों में काम करने के इच्छुक हैं। शाहरुख खान ने जैकमैन का स्वागत करते हुए बॉलीवुड फिल्मों में काम करने की बात रखी। शाहरुख खान ने यह भी कहा कि जैकमैन की फिल्में एक्स मैन और वुलवरीन उनकी नई फिल्म रा.वन की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि रा.वन बनाने से पहले उन्होंने जैकमैन की सभी फिल्में देखीं। जैकमैन ने बताया कि उनके देश ऑस्ट्रेलिया में हिंदी फिल्में बहुत लोकप्रिय हैं। गौरतलब है कि शाहरुख और जैकमैन के साथ मंच पर फिल्मकार करण जौहर उपस्थित थे, जो चर्चा को आगे बढ़ा रहे थे। शाहरुख और जैकमैन दोनों ने संभावना जताई कि भविष्य में बॉलीवुड के कलाकारों को लेकर हॉलीवुड में फिल्म बनाएंगे। विदा लेने से पूर्व शाहरुख खान ने जैकमैन से माधुरी दीक्षित के धक धक करने लगा गीत पर ठुमके भी लगवाए। जल्द भारत लौटने की इच्छा जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अब जैक भाई भी बुलाया जा सकता है।
-रघुवेंद्र सिंह 

नए जुनून के साथ अध्ययन का आगाज


कंगना के बॉयफ्रेंड और शेखर सुमन के बेटे की पहचान अध्ययन सुमन को चुभती थी। इस वजह से उन्होंने मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों से भी सपर्क खत्म कर दिया था, लेकिन अब अध्ययन नई सोच, ऊर्जा और तीन नई फिल्मों के साथ लौट आए हैं। अध्ययन कहते हैं, 'जब लोग मुझसे कहते थे कि आप नाम यूज करके आगे बढ़ रहे हैं, तो मुझे बहुत तकलीफ होती थी। मेरा ब्रेकअप हुआ। मेरी फिल्म 'जश्न' नहीं चली। लोग कहने लगे थे कि अध्ययन को फिल्मों में दिलचस्पी नहीं है। मेरे रिलेशनशिप की बात ज्यादा होने लगी। ऐसे में मुझे लगा कि सबसे कट ऑफ करना अच्छा है।'

'राज-द मिस्ट्री' के रूप में एक हिट फिल्म और 'जश्न' में सराहनीय अभिनय करने के बावजूद अध्ययन को बड़े बैनर की फिल्मों का ऑफर नहीं आया। अध्ययन कहते हैं, 'मैंने तेइस साल की उम्र में जान लिया कि यहा समालोचकों की तारीफ का कोई फायदा नहीं है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म चलती है, तभी लोग आपके पास आते हैं।'
अध्ययन ने हाल में तीन फिल्में 'दि आउटसाइडर', 'अवेक' और 'देख भाई देख' साइन की हैं। रानी मुखर्जी के भाई राजा मुखर्जी निर्देशित उनकी फिल्म 'लाइफ इसे गले लगा ले' की शूटिंग पूरी हो चुकी है। अध्ययन कहते हैं, 'दि आउडसाइडर' की शूटिंग अगले महीने शुरू होगी। 'अवेक' में मैं डैड के निर्देशन में काम करने जा रहा हूं। इन फिल्मों में मेरी भूमिकाएं मेच्योर और पॉवरफुल हैं।' वह इस बात से इंकार करते हैं कि शेखर सुमन उनके कॅरियर को पुश करने के लिए 'अवेक' फिल्म बना रहे हैं। अध्ययन कहते हैं, 'रितिक रोशन और इमरान खान से ज्यादा मुझे शाहरुख खान का सफर इंट्रेस्टिंग लगता है। डैड को हमेशा से डायरेक्टर बनना था। उन्हें लगता है कि उनकी फिल्म में मैं रोल डिजर्व करता हूं, इसलिए उन्होंने मुझे साइन किया है। मैं अपनी काबिलियत से आगे बढ़ना चाहता हूं। डैड की बदौलत पहचान नहीं बनाना चाहता।'
-रघुवेंद्र सिंह  

आइटम क्वीन की रेस में विद्या


मलाइका अरोरा खान, कट्रीना कैफ, करीना कपूर और मल्लिका सहरावत के बाद आइटम क्वीन की रेस में अब विद्या बालन भी शामिल हो गई हैं। विद्या बालन और आइटम नंबर.. सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन विद्या को किसी भी मामले में दूसरी अभिनेत्रियों से कम नहीं आका जाना चाहिए। सतोष सिवान की मलयालम फिल्म 'उरुमी' में विद्या का आइटम नंबर अभी से चर्चा का विषय बन गया है। विद्या कहती हैं, 'सतोष सिवान ने मुझसे आइटम नंबर करने के लिए कहा। मैं उन्हें ना नहीं कह सकती थी। आइटम नंबर करने में मैं सहज महसूस नहीं कर रही थी, इसीलिए मैंने रिहर्सल की।'

गौरतलब है कि विद्या बालन का आइटम नबर शीला, मुन्नी और रजिया की तरह देसी नहीं होगा। विद्या मादक अंदाज में बेली डास करती नजर आएंगी। विद्या के अनुसार, 'आइटम नबर में मेरे बेली डास मूव हैं। मैं अपने डांस नंबर के बारे में लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए एक्साइटेड हूं। मैं 'उरुमी' के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं।'
विद्या कहती हैं, 'मैंने 'उरुमी' में कुछ दृश्यों में अभिनय भी किया है।' मिलन लूथरिया की फिल्म 'द डर्टी' पिक्चर की शूटिंग की तैयारी में व्यस्त विद्या बालन पिछले साल की अपनी चर्चित फिल्म 'इश्किया' के सीक्वल की घोषणा से भी काफी उत्साहित हैं।
-रघुवेंद्र सिंह 

जोर का झटका वाली ऋचा


फरीदाबाद (हरियाणा) से 1994 में मुंबई का रुख करने वाली ऋचा शर्मा को अलग आवाज के कारण लंबा संघर्ष जरूर करना पड़ा, पर बाद में उनकी यही आवाज विशेषता बन गई। आज वे लोकप्रिय पा‌र्श्व गायिका हैं। लोग उनकी कद्र कर रहे हैं। ऋचा हंसते हुए कहती हैं, वैसे तो फिल्म इंडस्ट्री के लोग कहते हैं कि उन्हें कुछ हटके चाहिए, पर जब मेरी यूनीक आवाज आई, तो किसी ने मौका नहीं दिया। ऋचा को पहला ब्रेक 1996 में निर्माता-निर्देशक सावन कुमार ने सलमा पे दिल आ गया फिल्म में दिया। उसकी वजह थी कि एक कंसर्ट में उन्होंने ऋचा से वादा किया था कि वे उन्हें ब्रेक देंगे। उस फिल्म से ऋचा को इंडस्ट्री में अपना परिचय देने में आसानी हो गई, पर उनकी किस्मत बदली फिल्म ताल से, जिसमें उन्होंने एआर रहमान के निर्देशन में नी मैं समझ गई.. गीत गाया।

इंडस्ट्री में पंद्रह वर्ष की जर्नी तय कर चुकीं ऋचा कहती हैं, आज टैलेंट हंट शो में बच्चों को अपना गाना जुबैदा की ठुमरी, ताल का गीत, कांटे का माही वे.., गोल का बिल्लो रानी.., बागबान का टाइटिल सॉन्ग, माई नेम इज खान का सजदा.., ऐक्शन रिप्ले का जोर का झटका.. गाते देखकर गर्व महसूस होता है। ये मेरी उपलब्धियां हैं। इसे मेहनत से हासिल किया है। आज इन गीतों के बगैर मेरे शो पूरे नहीं होते। ऋचा साफ शब्दों में कहती हैं कि उन्होंने अपने सफर में किसी को साइड करने की राजनीति नहीं की और न ही किसी के साथ चापलूसी की, मैं न तो राजनीति करती हूं और न मुझसे जी हुजूरी होती है। मैं किसी के साथ कॉफी पीने भी नहीं जाती। मुझसे यह सब होता नहीं है। हां, अगर मुझे किसी का गाना अच्छा लगता है, तो मैं फोन करके उसे बधाई जरूर देती हूं, लेकिन आज तक मैंने काम मांगने के लिए किसी को फोन नहीं किया। ऋचा शर्मा के पहले गुरु उनके पिता पंडित दयाशंकर उपाध्याय रहे। वे बताती हैं, उन्होंने गायन तो सिखाया ही, जीवन जीने का हुनर भी सिखाया। वे कहते थे कि इंसान की सोच अमीर होनी चाहिए। जीवन राजा की तरह जीना चाहिए। गौर करने वाली बात यह है कि ऋचा के लिए तब मुश्किल हो गया था, जब लोग लोग समझते थे कि वे केवल नाक से ही गा सकती हैं। वे कहती हैं, मैं परेशान हो गई थी। हेरा फेरी के गीत तुनक तुनक तुन.. से वह ब्रेक हुआ, लेकिन लोग पहचान नहीं पाते थे कि मैंने ही गाया है। खैर, मैं जाने के लिए नहीं आई थी। मैं और आगे जाने के लिए आई थी। बिल्लो रानी.. से वह पूरी तरह ब्रेक हो गया। लोगों को यकीन हुआ कि मैं दूसरे किस्म के गाने भी गा सकती हूं, लेकिन ऐक्शन रिप्ले का जोर का झटका.. के बाद फिर वैसे ही गीत मिलने लगे हैं। थैंक्यू में एक गाना मैंने फिर नेजल वॉयस में गाया है।
करियर में सभी स्थापित संगीतकारों के लिए गीत गा चुकीं ऋचा जतिन-ललित की जोड़ी को बहुत मिस करती हैं। उनका मानना है, निजी समस्याओं को खत्म करके दोनों को फिर साथ काम करना चाहिए। ऋचा इंडस्ट्री के इस ट्रेंड से नाखुश हैं कि अब फिल्म के म्यूजिक रिलीज के वक्त गायक-गायिकाओं को याद नहीं किया जाता। वे कहती हैं, पहले बहुत बुरा लगता था, लेकिन अब आदत हो गई है। हमें लोग बताते भी नहीं कि एलबम रिलीज हो रहा है। हमें टीवी के जरिए पता चलता है। फिल्म इंडस्ट्री बाहर से परिवार जैसी दिखती है, लेकिन अंदर इसमें सिंगर, ऐक्टर और टीवी ऐक्टर के तीन परिवार बन चुके हैं।
ऋचा मानती हैं कि टीवी रियलिटी शो के आने से गायकों का चेहरा पब्लिक पहचानने लगी है। वे कहती हैं, रियलिटी शो की लोग लाख बुराई करें, पर गायकों को इससे लाभ हुआ है। लोग हमारा चेहरा पहचानने लगे हैं। सौ फिल्मों का आंकड़ा पार कर चुकीं ऋचा अब सेटल होना चाहती हैं। वे कहती हैं, मुझे ऐसे जीवनसाथी का इंतजार है, जो मेरे काम का सम्मान करे। मेरे लिए संगीत सब कुछ है। जिस दिन ऐसा इंसान मुझे मिल गया, सबको शादी का न्योता भेज दूंगी।
-रघुवेंद्र सिंह  

जो दिल कहे ऑलवेज वही करें: रोशन अब्बास


टीवी, रेडियो, थिएटर की दुनिया में शोहरत और सम्मान हासिल करने के बाद रोशन अब्बास अब फिल्म मेकिंग में आ गए हैं। ऑलवेज कभी कभी उनकी पहली फिल्म है। रोशन ने 1999 में एक नाटक लिखा था ग्रैफिटी। यह फिल्म उसी लोकप्रिय नाटक पर आधारित है। रोशन कहते हैं, मुझे युवाओं से जुड़े विषय आकर्षित करते हैं। 1999 में मैंने एक अंग्रेजी नाटक ग्रैफिटी लिखा था। नेहा धूपिया, सायरस ब्रोचा, समीर कोचर, गौरव कपूर ने उसमें अभिनय किया था। मैं अपने उस नाटक पर फिल्म बनाना चाहता था।

ऑलवेज कभी कभी को रोशन टीन कमिंग एज फिल्म मानते हैं। वे कहते हैं, यह जॉनर वेस्ट में पॉपुलर है। यह फिल्म किशोरों के बारे में बात करती है। उनकी मानसिक अवस्था की बात है इसमें। विडंबना है कि किशोर अपने विचारों में स्पष्ट नहीं हैं। हमारी फिल्म में एक लाइन है, कभी कभी जो दिल कहे, ऑलवेज वही करें।
फिल्म में गिजेल मोंटेरियो, जोया मोरानी और सत्यजीत दुबे ने मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्माण शाहरुख खान ने किया है, लेकिन रोशन ने उनके संबंधों का लाभ नहीं उठाया। उन्होंने पॉपुलर कलाकारों को साइन नहीं किया। रोशन कहते हैं, मुझे इसके लिए फ्रेश चेहरे चाहिए थे। मेरे किरदार की मांग वही थे, इसलिए मैंने गिजेल, जोया, सत्यजीत का चयन किया। जोया एक बातूनी लड़की का किरदार निभा रही हैं और गिजेल फिल्म में बहुत कम बोलती दिखेंगी। गिजेल का नाम मुझे शाहरुख ने ही सुझाया। उन्होंने कहा कि लव आज कल में वे थीं, देख लीजिए। मुझे इन फ्रेश टैलेंट्स के साथ काम करके मजा आया। वे मुझे अब्बा कहते थे। मेरे नाम से स हटा दिया था। वे मेरे पास आकर सुझाव मांगते थे।
रोशन खुश हैं कि उनकी फिल्म को शाहरुख खान जैसा निर्माता मिला। वे बताते हैं, 2008 में मैं शाहरुख के साथ लाइव शो करता था। हम दुबई में थे। शाहरुख ने स्टेज के पीछे ऐसे ही सामान्य सा एक सवाल पूछा कि आजकल क्या कर रहे हैं? मैंने कहा कि एक स्क्रिप्ट लिखी है। उसमें फ्रेश चेहरे होंगे, लेकिन उसे एक बड़े प्रोडक्शन हाउस का सपोर्ट चाहिए। शाहरुख ने कहा कि हम ऐसा प्रोजेक्ट करना चाहते हैं। आप मुंबई हमारे ऑफिस में आकर मिलिए। फिर बात बन गई। मैंने फिल्म की शूटिंग दिल्ली, लखनऊ, मुंबई और गोवा में की है। मैं चाहता तो विदेश में फिल्म की शूटिंग कर सकता था, लेकिन मैं बताना चाहता था कि हिंदुस्तान में खूबसूरत लोकेशन हैं।
ऑलवेज कभी कभी शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म जरूर है, लेकिन उसमें उनकी झलक देखने को जरा भी नहीं मिलेगी। रोशन ने ग्रैफिटी नाटक में प्रिंसिपल की भूमिका निभाई थी, पर उन्होंने भी इस फिल्म में अभिनय करना उचित नहीं समझा। इस बारे में वे कहते हैं, मेरे असिस्टेंट रोज सेट पर एक कलाकार कम बुलाते थे और मुझसे कहते थे कि सर, आप फलां रोल कर दीजिए। लेकिन मैंने नहीं किया। प्रिंसिपल का रोल इसमें आकाश खुराना ने किया है। जहां तक शाहरुख खान की बात है, तो मेरी फिल्म बहुत छोटी है। शाहरुख के आने से दर्शकों की उम्मीदें बढ़ जातीं और मैं नहीं चाहता था कि ऐसा हो। वैसे भी यह मेरी आखिरी फिल्म नहीं है। लखनऊ में पले-बढ़े रोशन अब्बास का लक्ष्य अपना फिल्म प्रोडक्शन हाउस खोलना है। आगामी योजनाओं के बारे में वे कहते हैं, दो प्रोडक्शन हाउस से अगली फिल्म के लिए मेरी बात चल रही है। जल्दी ही सब तय हो जाएगा।

-रघुवेंद्र सिंह   

Sunday, March 20, 2011

खूब मस्ती करती थी होली पर-रानी मुखर्जी

पूरे दिन रंग की फुहार और गुलाल क आनन्द लेने के बाद आज रात बारह बजे तारीख बदलते ही करीबी दोस्तों और परिजनों की मौजूदगी में प्रिय भतीजी माएशा के साथ अपने जन्मदिन क केक काटेंगी रानी  मुखर्जी .  
होली और जन्मदिन का जिक्र करते ही रानी मुखर्जी को बचपन के दिन याद आ जाते हैं। जुहू स्थित अपने नए आलीशान बगले कृष्णाराम में बैठी रानी उत्साह के साथ बताती हैं, 'मैं तब जानकी कुटीर में रहती थी। वहा एक क्लब था। क्लब में पकौड़े, चाट और तरह-तरह की मिठाइया हमारा आकर्षण होती थीं। हम खूब खाते थे और रंगों से खेलते थे। उसी वक्त मेरे एक्जाम भी चल रहे होते थे, जिसके कारण मैं दूसरों की तरह होली ज्यादा नहीं खेल पाती थी।'
रानी को अमिताभ बच्चन के घर की होली याद है। वह बताती हैं, 'बच्चन परिवार के घर मैंने एक-दो बार होली मनाई है। वैसे मैं ज्यादा होली नहीं खेलती हूं, क्योंकि अब मुझे रंग लगाना बड़ा अजीब लगता है। मैं होली के दिन मम्मी-डैडी के चरणों में रंग डालती हूं। उनका आशीर्वाद लेती हूं।'
होली के अगले दिन अपने 33वें जन्मदिन को लेकर उत्साहित रानी कहती हैं, 'जन्मदिन पर हम सब बच्चे बन जाते हैं। केक काटना अच्छा लगता है। आप स्पेशल फील करते हैं। हालाकि आपकी उम्र एक साल और बढ़ जाती है, पर मैं इससे दुखी नहीं होती। मैं तो खुश होती हूं, क्योंकि हर साल नई चुनौतिया लेकर आता है। मैं इस साल ऐसी फिल्में साइन करना चाहती हूं जिसमें मेरा रोल जबर्दस्त हो।' गौरतलब है कि रानी इस साल रीमा कागती की फिल्म में आमिर खान के साथ नजर आएंगी।
रानी मुखर्जी यह बात शेयर करने से हिचकिचाती नहीं हैं कि उनके मम्मी-डैडी उनकी शादी को लेकर फिक्रमद हैं। रानी कहती हैं,'मम्मी-डैडी को मेरी शादी की फिक्र है। वे चाहते हैं कि जब भी मेरी शादी हो अच्छे से हो। वे कभी-कभी पूछते हैं कि तुम शादी कब कर रही हो? मैं जवाब में कहती हूं कि जल्द करूंगी।'
रानी कहती हैं कि मैं भतीजी माएशा के साथ जन्मदिन का केक काटने के बाद एक सप्ताह के लिए देश के बाहर घूमने निकल जाऊंगी।
जागरण परिवार की ओर से रानी को जन्मदिन की शुभकामनाएं।
-रघुवेन्द्र सिह

Saturday, March 19, 2011

आज भी गाढ़ा है वह रंग-अमिताभ बच्चन

होली के त्योहार से अमिताभ बच्चन का संबंध निजी जीवन में ही नहीं, बड़े पर्दे पर भी मधुर एवं अविस्मरणीय रहा है। होली पर विशेष बातचीत
होली का नाम आते ही आपके जेहन में कैसी छवियां उभर आती हैं?
होली का संबंध पहले तो मौसम बदलने से है। शीतकाल समाप्त और गर्मी का मौसम आरंभ। फिर रंग, होली का जश्न, मित्रों के साथ मिलकर रंगों का मिलन, स्वादिष्ट पकवान, संगीत और नृत्य और शाम को मिलना।
बाबूजी के जमाने की होली की यादें बांटें?
बाबूजी होली बहुत ही खुले दिल से मनाते थे। बहुत सारे उनके मित्र, विद्यार्थी घर आकर के साथ में होली खेला करते थे। होली का वह रंग आज भी मेरी स्मृतियों में जीवंत है। उत्तर प्रदेश की लोक धुनों पर आधारित गीत सुनाया करते थे, जिनमें से कई तो मैंने अपनी फिल्मों में गाए हैं।
आपकी अब तक की यादगार होली कौन सी रही है?
प्रत्येक होली का त्योहार मेरे लिए यादगार रहा है।
क्या दर्शकों की तरह हिंदी फिल्मों से गायब हो रहे होली के त्योहार की फिक्र आपको भी है?
ऐसा तो नहीं कहा जा सकता। जब-जब फिल्म की कहानी में होली के त्योहार को दर्शाने की आवश्यकता पड़ती है तो उसे दर्शाया जाता है। होली ही क्यों, हर अन्य त्योहार के लिए भी यही भावना है। चाहे वो दीवाली हो, ईद हो, गणेश उत्सव हो या क्रिसमस एवं न्यू ईयर।
आपके पसंदीदा होली गीत कौन से हैं?
रंग बरसे और होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें..।
क्या इस बार आप होली मना रहे हैं?
इस बार शायद होली हमारे यहां नहीं मनाई जाएगी। परिवार के निकट संबंधी के निधन के कारण।
-रघुवेंद्र सिंह