Saturday, March 12, 2011

फनी नहीं हूं मैं: साजिद खान

इस साल भी फिल्म पुरस्कार समारोहों के लोकप्रिय होस्ट रहे साजिद खान। समारोह का सीजन खत्म होते ही अब वे अपनी फिल्म हाउसफुल 2 के निर्माण में व्यस्त हो चुके हैं। साजिद से हाउसफुल 2 और पुरस्कार समारोह को होस्ट करने के अनुभवों को लेकर बातचीत हुई। प्रस्तुत हैं अंश..


पुरस्कार समारोह को होस्ट करने का अनुभव कैसा रहा?
इस साल सात पुरस्कार समारोह हुए और ताज्जुब की बात है कि उसमें से पांच मैंने होस्ट किए। खुशी की बात है कि चैनल द्वारा मुझे बुलाया गया। मैं सन 2000 से लगातार पुरस्कार समारोह होस्ट कर रहा हूं। मेरा चूमर लोगों को पसंद आता है। पुरस्कार समारोह की वजह से ही मैं हाउसफुल 2 की स्क्रिप्ट के लिए नहीं बैठ पाया।
लोगों की हंसाने की कला आपने कहां से सीखी?
मुझे तो ऐसा ही लगता है कि मैं अंधों में काना राजा जैसा हूं। मुझे नहीं लगता है कि मैं फनी हूं। चूमर ऐसी चीज है, जिसमें गारंटी नहीं है कि सौ प्रतिशत लोग उसे सुनकर हंसें हीं। हां, ज्यादा लोग हंसेंगे तो आपका काम हो गया। मैं हमेशा बेहतर करने पर ध्यान देता हूं। साफ-सुथरी बातें करता हूं।
आप इंडस्ट्री के अंदर हैं और अधिकतर पुरस्कार समारोह से जुड़े रहते हैं। आपके अनुसार क्या पुरस्कार योग्य लोगों को दिए जाते हैं?
झे कहना नहीं चाहिए, लेकिन एक बात बताइए कि आप और मैं पुरस्कार समारोह क्यों देखते हैं टीवी पर? एक आम आदमी इसलिए नहीं देखता टीवी पर पुरस्कार समारोह कि कौन क्या जीता है? वह नाच देखने के लिए देखता है। उसे यह इंतजार रहता है कि कौन आकर नाचने वाला है। पंद्रह साल पहले फिल्म पुरस्कारों की जो विश्वसनीयता थी, वो आज नहीं है। आज यह टीवी शो हो गए हैं। आज चैनल बताता है कि उसे कौन से ऐक्टर और ऐक्ट्रेस चाहिए। अब ट्रेंड हो गया है। अब वही लोग आते हैं समारोह में जिन्हें पता होता है कि वे अवॉर्ड जीतने वाले हैं या फिर वे लोग आते हैं जिन्हें स्टेज पर परफॉर्म करने के लिए पैसे दिए गए हैं।
दूसरे लोग रिलीज के पहले अपनी फिल्म के बारे में बात करने से बचते हैं, जबकि आप हाउसफुल 2 के बारे में अभी से बात कर रहे हैं?
फिल्म के बारे में लोग जितना ज्यादा जानेंगे, उनमें फिल्म को लेकर उतनी एक्साइटमेंट बढ़ेगी। आज मनोरंजन के तमाम विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे में आपको अपनी फिल्म के लिए दर्शक जुटाने हैं, तो पहले से ही एक्साइटमेंट बनानी पड़ेगी। हाउसफुल 2 में रितेश देशमुख, जॉन अब्राहम, राहुल खन्ना, असिन, जैक्लीन फर्नाडीस और चंकी पांडे आ गए हैं।
नए नाम से फिल्म बनाने की बजाय हाउसफुल 2 नाम से सीक्वल क्यों बना रहे हैं?
सीक्वल तब बनते हैं, जब गारंटी होती है कि फिल्म लोगों को पसंद आएगी। हाउसफुल 2 ऐसा सीक्वल नहीं है कि जहां यह खत्म हुई थी, वहां से यह शुरू होगी। इसमें नई कहानी है और नए किरदार हैं। हम हाउसफुल को ब्रांड बना रहे हैं।
-रघुवेंद्र सिंह 

बहुत हो गया इंतजार-दीया मिर्जा

फिल्म इंडस्ट्री में दस साल का सफर पूरा कर रहीं दीया मिर्जा का सोचना है कि इंडस्ट्री उनकी प्रतिभा का समुचित इस्तेमाल नहीं कर पाई। इसीलिए उन्होंने अपने मित्र जाएद खान और साहिल के साथ मिलकर अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया। दीया अपनी बात कहती हैं, मुझे इस बात का दुख है कि मेरी अभिनय प्रतिभा का सही इस्तेमाल इंडस्ट्री ने नहीं किया। मैंने सोचा कि बहुत हो गया इंतजार। अब मैं खुद अपनी प्रतिभा का सही प्रदर्शन करूंगी। यह बात जाएद पर भी लागू होती है। जाएद की प्रतिभा के साथ भी इंडस्ट्री ने न्याय नहीं किया। हमने फैसला किया कि मिलकर अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू करते हैं।
बड़े पर्दे से अपनी लंबी अनुपस्थिति का कारण दीया अपना प्रोडक्शन हाउस बताती हैं। वे कहती हैं, मैंने जिस दिन फैसला किया कि प्रोडक्शन हाउस शुरू करना है, उसी दिन से फिल्में साइन करनी बंद कर दीं। जाएद और साहिल के साथ मिलकर दिन-रात प्रोडक्शन हाउस को सेट करने के लिए काम करती रही। प्रोडक्शन हाउस शुरू करना बच्चों का काम नहीं है। तीन साल पहले दीया, जाएद और साहिल ने साथ काम करने का फैसला किया था। दीया बताती हैं, जाएद और साहिल एक ऐक्शन कॉमेडी पर काम कर रहे थे, लेकिन तभी मेरे दिमाग में लव ब्रेकअप जिंदगी की कहानी आई। मैंने दोनों से कहा कि हमारे बैनर की पहली फिल्म लव स्टोरी होनी चाहिए। प्रोडक्शन कंपनी शुरू करने का फैसला हमने दिल से किया है, इसलिए पहली फिल्म का संबंध दिल से होना चाहिए।
लव ब्रेकअप जिंदगी के निर्माण के साथ ही जाएद और दीया इसमें मुख्य भूमिका भी निभा रहे हैं, जबकि कंपनी के तीसरे पार्टनर साहिल इसका निर्देशन कर रहे हैं। दीया कहती हैं, कैरेक्टर हमें अच्छे लगे। हमें लगा कि हम कैरेक्टर के साथ न्याय कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि हम अपने प्रोडक्शन हाउस की हर फिल्म में काम करेंगे। ऐसी कोई कंडीशन नहीं है। अगर कैरेक्टर हमें सूट करेगा और निर्देशक चाहेगा तो हम अभिनय भी करेंगे। हमने यह कंपनी नई प्रतिभाओं को मौका देने के लिए शुरू की है। लव ब्रेकअप जिंदगी में जाएद और मेरे अलावा उमंग जैन, सत्यदीप, वैभव तलवार, औरित्र घोष जैसे नए चेहरे भी हैं। फिल्म की शूटिंग मुंबई, अलीबाग और चंडीगढ़ में होगी।
दीया की पहली फिल्म रहना है तेरे दिल में 2001 में आई थी। वे इस साल फिल्म इंडस्ट्री में दस साल का सफर पूरा कर रही हैं। दीया कहती हैं, इंडस्ट्री में दस साल पूरा होने की खुशी में मैंने प्रोडक्शन हाउस खोला है। मैंने सोचा कि दस साल में जो काम नहीं किया, उसे अब करते हें। मैंने सही समय पर सही फैसला किया है। शबाना आजमी ने भी मुझसे कहा कि तुमने सही समय पर फिल्म निर्माण में आने का फैसला किया है। तुम्हारी टाइमिंग परफेक्ट है। दीया लव ब्रेकअप जिंदगी की कहानी और अपने किरदार के बारे में विस्तृत जानकारी देने से बचती हैं। वे कहती हैं, फिलहाल मैं इतना ही कहूंगी कि इसमें दर्शक मेरे नए अंदाज से परिचित होंगे। मैं फिल्म को लेकर बहुत उत्साहित हूं। इसे इसी साल रिलीज करने की योजना है। फिल्म की शूटिंग अलीबाग में शुरू हो चुकी है। दीया आगे कहती हैं, मेरे बैनर की अगली फिल्म ऐक्शन कॉमेडी होगी।
-रघुवेंद्र सिंह 

मैं फालतू नही: पूजा गुप्ता

वर्ष 2007 में मिस इंडिया यूनिवर्स का खिताब जीतने वाली पूजा गुप्ता, वाशु भगनानी की फिल्म फालतू से अभिनय करियर की शुरुआत कर रही हैं। दो साल संघर्ष करने के बाद उन्हें यह फिल्म मिली है। पूजा बताती हैं, मिस इंडिया बनने का लाभ यह हुआ कि लोग मुझे जान गए। मिस इंडिया बनने के बाद ऐसा नहीं होता कि आपके पास फिल्म निर्माता-निर्देशकों की लाइन लग जाती है। पहली फिल्म के लिए मुझे दो साल तक संघर्ष करना पड़ा। मुझे जब पता चलता था कि फलां जगह फिल्म का ऑडिशन चल रहा है, तो मैं ऑडिशन देने जाती थी। किसी ने यह समस्या बताकर मुझे सेलेक्ट नहीं किया कि मेरा उच्चारण सही नहीं है। कोई कहता था कि मैं गोरी हूं। कुछ लोगों ने कहा कि मैं छोटी हूं। अब मेरी किस्मत चमकी है। मेहनत अब सफल हुई है।
फालतू फिल्म का निर्देशन मशहूर कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा ने किया है। पूजा का इस फिल्म से जुड़ने का किस्सा दिलचस्प है। वे अपने एक फ्रेंड के घर पार्टी में गई थीं। उस पार्टी में वाशु भगनानी के बेटे जैकी भी मौजूद थे, जो फिल्म के एक हीरो हैं। उन्हें पूजा बहुत अच्छी लगीं। पूजा बताती हैं, उस पार्टी में जैकी मौजूद थे, लेकिन उनसे मेरी बातचीत नहीं हुई थी। उन्होंने रेमो से जाकर कहा कि पूजा से मिलिए। उन्होंने मेरे फ्रेंड से नंबर लेकर मुझे फोन किया। मैं जब फालतू के लिए ऑडिशन देने गई, तब जैकी से पहली बार मेरी बात हुई। पांच बार ऑडिशन हुआ, फिर रेमो ने मुझे सेलेक्ट किया।
पूजा ने फिल्म में पूजा नाम की लड़की का ही किरदार निभाया है। वह टॉम ब्वॉय टाइप की है। पूजा बताती हैं, वाशु भगनानी के लिए पूजा नाम लकी है। उनकी कंपनी का नाम पूजा एंटरटेनमेंट है। मैंने फिल्म में अपने किरदार का नाम पूजा रखने के लिए उनसे बात की तो वे मान गए। तीन लड़कों के साथ पूजा बड़ी हुई है। उसके पापा चाहते हैं कि वह शादी करके अपना घर बसा ले, लेकिन वह शादी नहीं करना चाहती। वह लाइफ को अपने अंदाज में जीना चाहती है। पूजा के अनुसार फिल्म फालतू भारत के एजुकेशन सिस्टम पर कटाक्ष करती है। वे कहती हैं, कॉलेज में साठ प्रतिशत और अस्सी-नब्बे प्रतिशत अंक पाने वाले लोगों को ही एडमिशन मिलता है। तीस प्रतिशत अंक लाने वालों को नहीं। फिल्म के अंदर पूजा और उसके दोस्तों रितेश, नंज, विष्णु को लोग फालतू कहते हैं, लेकिन उनका कहना है कि वे फालतू नहीं हैं।
पहली फिल्म की शूटिंग का अनुभव पूजा के लिए अच्छा रहा। वे बताती हैं, मैं फिल्म में अकेली लड़की हूं। सेट पर मेरा बहुत ख्याल रखा जाता था। वाशु अपनी बेटी की तरह मेरा ख्याल रखते थे। रेमो भी बहुत अच्छे निर्देशक हैं। मैं लकी हूं कि मुझे ऐसी टीम के साथ काम करने का मौका मिला। पूजा आगे कहती हैं, इस फिल्म में मुझे अपना टैलेंट दिखाने का पूरा अवसर मिला है। मैं खुश हूं कि फालतू मेरी डेब्यू फिल्म है।
दिल्ली में पली-बढ़ी पूजा गुप्ता का बचपन का सपना था ऐक्ट्रेस बनना। वे कहती हैं, यदि मैं मिस इंडिया नहीं बनती, तो भी ऐक्ट्रेस बनती। मैंने होश संभालते ही तय कर लिया था कि मुझे नौ से पांच बजे की नौकरी नहीं करनी। मेरी मां डॉक्टर हैं, भाई इंजीनियर हैं और पापा सीए थे। मैं पहली ऐसी लड़की हूं अपने परिवार में, जिसने गे्रजुएशन नहीं किया। लक्ष्य के बारे में पूछने पर पूजा कहती हैं, मैं आज में जीती हूं। यदि आज अच्छा होगा, तो भविष्य भी अच्छा होगा। मैं मल्टीटास्किंग नहीं हूं। फिलहाल मेरा ध्यान अपनी पहली फिल्म की रिलीज पर है।
-रघुवेंद्र सिंह 

आया हूं पहचान छोड़कर: अंगद बेदी

क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी के बेटे हैं अंगद बेदी। वे रेमो डिसूजा निर्देशित फिल्म फालतू से अपने अभिनय करियर की शुरुआत कर रहे हैं।

ऐक्टर बनना था सपना: मैं दिल्ली में पला-बढ़ा हूं। सेंट कोलंबस स्कूल में मैंने पढ़ाई की। सेंट स्टीफेंस कॉलेज से मैंने ग्रेजुएशन किया है। मैंने आठ साल क्रिकेट खेला। तेरह साल का था, जब मैंने अंडर 16 में दिल्ली को रिप्रजेंट किया। मन था कि हिंदुस्तान के लिए खेलूं, लेकिन मेरी ख्वाहिश थी एक्टर बनने की। सुनील शेट्टी ने एक मुलाकात में कहा कि आपको फिल्मों में आना चाहिए। उनकी इस बात से मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया। उसके बाद मैंने एक्टिंग स्कूल ज्वॉइन किया।
दाढ़ी-बाल कटवाए: उन्नीस साल का था, तब मैं असमंजस में था कि क्या करूं? क्रिकेट खेलूं या एक्टिंग में करियर बनाऊं। मैं पगड़ी बांधता था। मेरी दाढ़ी थी। मुझे लगा कि पगड़ी बांधकर ऐक्टर तो नहीं बन सकता। मैंने बाल-दाढ़ी कटवाए। मं चाहता था कि लोग मुझे लीड रोल के लिए सोचें। मेरे अंदर उथल-पुथल मची थी। मैंने पैरेंट्स को बिना बताए बाल-दाढ़ी कटवा दिए।
बहुत संघर्ष किया: मेरा कोई गॉडफादर नहीं है। मैंने बहुत संघर्ष किया है, लेकिन मैं अपने संघर्ष के बारे में अभी बात नहीं करूंगा। जिस दिन मैं फेमस हो जाऊंगा, उस दिन लोग मेरा संघर्ष जानना चाहेंगे।
करती है सवाल: फालतू का फुल फॉर्म है फकीरचंद एंड लकीरचंद ट्रस्ट यूनिवर्सिटी। यह फिल्म आजकल के एजुकेशन सिस्टम पर सवाल उठाती है। फिल्म का एक मैसेज है कि पढ़ाई-लिखाई सब कुछ नहीं है। जो जीनियस बने हैं, वे इंटेलीजेंट रहे हैं, एजुकेटेड नहीं।
टूटा नहीं रिश्ता: मैं क्रिकेट से जुड़ा हूं। युवराज सिंह, जहीर खान, हरभजन सिंह के साथ हमने क्रिकेट खेलना शुरू किया था। हम संपर्क में हैं। मैं सोहेल खान की क्रिकेट टीम में हूं। उनके लिए खेलता हूं। सायरस ब्रोचा पीछे पड़े हैं कि मैं बांबे जिमखाना के लिए खेलूं। मैं प्रोफेशनली अब नहीं खेलता हूं। अब मैं एक्टिंग में आ गया हूं। मेरा लक्ष्य शाहारुख खान की तरह लोगों को रुलाना और हंसाना है। वे मेरी प्रेरणा हैं। मेरे अंदर फिल्मों का जुनून है। मैं अपनी एक पहचान छोड़कर नई पहचान बनाने आया हूं। मुझे लोगों का प्यार और सपोर्ट चाहिए।
-रघुवेंद्र सिंह 

मेरे गीतों को याद रखेंगे लोग-अली ज़फ़र

-रघुवेंद्र सिंह

अली जफर की रुहानी और दिलकश आवाज आजकल हिंदुस्तान और पाकिस्तान की फिजाओं में गूंज रही है। अली का नया म्यूजिक एलबम झूम दोनों देश के संगीत प्रेमियों को बेहद पसंद आ रहा है। खास तौर से अपने एलबम के प्रचार के लिए मुंबई पहुंचे अली जफर ने मुलाकात में बताया, पाकिस्तान में मैंने अपने लेबल अलीफ रिकॉ‌र्ड्स के जरिए झूम को रिलीज किया है। पहले दिन हमने इसकी दस हजार कॉपी रिलीज की। मुझे बेहद खुशी है कि हिंदुस्तान में यशराज ने मेरे एलबम को रिलीज किया है। यह मेरे लिए सम्मान की बात है। प्रिंस ऑफ पॉप कहे जाने वाले अली जफर का झूम तीसरा एलबम है। 2003 में उनका पहला म्यूजिक एलबम हुक्का पानी और 2006 में मस्ती रिलीज हुआ था। दोनों बेहद लोकप्रिय हुए।
अली अभिनय भी करते हैं। पिछले साल आई फिल्म तेरे बिन लादेन में उन्होंने कमाल का अभिनय किया। उन्हें यकीन है कि इस लोकप्रियता का फायदा एलबम झूम को मिलेगा। एलबम के बारे में अली बताते हैं, इस पर मैंने दो-तीन साल पहले काम शुरू किया था। इसकी खासियत यह है कि इसमें मैंने सूफियाना कलाम का इस्तेमाल किया है। यह सुकून देने वाला एलबम है। म्यूजिक मैंने खुद अरेंज और कंपोज किया है। हिंदुस्तान और पाकिस्तान के लोग बड़े स्प्रिचुअल हैं। झूम में मैंने ऐसा म्यूजिक बनाया है, जो टाइमलेस है। मैं जब ना रहूं, तब भी इसके गीत लोगों को याद रहें।
झूम में बारह गाने हैं, जिन्हें अली ने लिखे हैं। टाइटिल सांग के बारे में वे कहते हैं, गीत झूम.. जिंदगी के बारे में बात करता है। कहते हैं कि जब आप मर रहे होते हैं, तो अंतिम पल में पूरी जिंदगी आपके सामने घूमती है। मैंने किसी को टारगेट करके यह गीत नहीं बनाया है। जो मेरे दिल ने कहा, वही मैंने लिखा और गाया है। मिर्जा गालिब की दो गजलें भी हैं इस एलबम में। एक है जी ढूंढता है.. और दूसरा है कोई उम्मीद..। इस तरह का कुछ सीरियस काम करने की कोशिश मैंने की है। इसमें रोमांटिक गाने भी हैं। यह एलबम मेरी पर्सनैल्टी का एक अलग हिस्सा है। उम्मीद है कि लोग इसके वीडियो को पसंद करेंगे।
अली जफर ने हाल में यशराज बैनर की फिल्म मेरे ब्रदर की दुल्हन की शूटिंग की है। इसमें उनके साथ इमरान खान और कट्रीना कैफ भी हैं। अली बताते हैं, इस फिल्म में मैंने तीन गीत गाए हैं। संगीत सोहेल सेन ने दिया है। वे एक और बात कहते हैं, एलबम झूम बनाने की एक वजह यह भी थी कि मेरे फैन यह न समझें कि मैं सिंगिंग छोड़कर एक्टिंग में चला गया हूं। म्यूजिक एलबम रिलीज करने की दूसरी वजह यह थी कि लोग कह रहे हैं कि पॉप म्यूजिक अब नहीं चल रहा है, तो मेरा कहना है कि आपके फेवर में हालात ना भी हों, लेकिन आप काम करते जाएं। अच्छी चीज खुद-ब-खुद रास्ता बना लेती है। अली अपनी तीसरी हिंदी फिल्म को लेकर खुश हैं। वे कहते हैं, मेरी इस फिल्म का नाम अभी तय नहीं है, लेकिन यह चश्मेबद्दूर की रिमेक होगी। उसका निर्देशन करेंगे डेविड धवन।


Friday, February 25, 2011

तनु वेड्स मनु- मस्त है शादी

मुख्य कलाकार : आर माधवन, कंगना रनौत, जिमी शेरगिल, दीपक डोबरीयाल, राजेन्द्र गुप्ता, के के रैना, इजाज खान, स्वरा भास्कर।
निर्देशक : आनंद एल राय
तकनीकी टीम : विनोद बच्चन, शैलेश आर सिंह, सूया सिंह, कहानी- हिमांशु शर्मा, संगीत- कृष्णा

ब्याह हिंदी फिल्मों का एक सफल और लोकप्रिय विषय रहा है। यश चोपड़ा और सूरज बड़जात्या की फिल्मों में हम सच और कल्पना के मेल से सदैव विवाह का एक आदर्श रूप देखते आए हैं, लेकिन आनंद एल राय की फिल्म तनु वेड्स मनु में उत्तर भारत में लड़की दिखाने के रिवाज से बारात के आगमन तक को बिना किसी लाग-लपेट के असली रंग में पेश किया है। लंदन से दुल्हन की खोज में कानपुर आए डॉक्टर मनोज शर्मा उर्फ मनु परिचित किरदार लग सकते हैं, परंतु शराब और सिगरेट की शौकीन एवं हर हफ्ते एक नया ब्वॉयफ्रेंड बनाने में यकीन रखने वाली तनुजा त्रिवेदी उर्फ तनु फिल्मों में आई अब तक उत्तर प्रदेश की सीधी-सादी, घरेलू, आज्ञाकारी बेटियों सी नहीं है। देव डी में अनुराग कश्यप द्वारा गढ़े पारो के किरदार के बाद तनु वेड्स मनु की तनु भारत के छोटे शहरों की नई पीढ़ी की स्वछंद, निरंकुश, बिंदास, कंफ्यूज लड़की की छवि पेश करती हैं।
तनु के लिए प्यार सिर्फ एस्ट्रोजन, टेस्ट्रोजन जैसे हार्मोस हैं। उसे अरेंज मैरिज से नफरत है। तनु को सहज, सरल और सपाट जीवन पसंद नहीं। मनु जब तनु को पहली बार देखता है तो उसे प्यार हो जाता है। वह शादी के लिए हां कर देता है, लेकिन तनु उससे कहती है कि वह शादी से इंकार कर दे क्योंकि उसका ब्वॉयफ्रेंड है। मनु अपने लिए दूसरी लड़कियां देखना शुरू करता है। किस्मत मनु को पंजाब में उसके दोस्त की शादी में फिर तनु से मिलाती है। तनु की खुशी के लिए मनु उसके मां-पिता को उसके गुंडे ब्वॉयफ्रेंड अवस्थी से शादी के लिए राजी करता है, लेकिन जब सरलता से सब होने लगता है, तनु की अवस्थी से शादी होने लगती है तो वह घबराने लगती है। वह शादी के एक दिन पहले अवस्थी से ब्याह करने से इंकार कर देती है।
लेखक हिमांशु शर्मा ने तनु वेड्स मनु में कानपुर की कहानी में पंजाब का सुंदर छौंक लगाया है। विविध भारती पर अमीन सयानी की आवाज से शुरू हुई फिल्म फ्रेश और रोचक संवादों के साथ खूबसूरती से आगे बढ़ती है। कृष्णा के संगीत पर राजशेखर के बोल कहानी में रूचि बनाए रखने में मदद करते हैं। पृष्ठभूमि में आया गीत रंगरेज का मनु और तनु की भावनाओं के अभिव्यक्ति के लिए अच्छा इस्तेमाल किया गया है। मनु और तनु के व्यक्तित्व का विरोधाभास बांधे रखता है, लेकिन मध्यांतर के बाद पटकथा लचर हो गई है। तनु का मनु के प्रति अचानक प्रेम का अहसास और अवस्थी का अपनी गर्लफ्रेंड तनु की मनु से शादी के लिए रजामंदी खटकती है। छोटे शहर की तनु के किरदार में कंगना रनौत के अभिनय का अलग पहलू देखने को मिलता है। इस किरदार को स्वीकार करके कंगना ने साहस दिखाया है। मनु के किरदार में आर माधवन की उम्दा अदाकारी देखने को मिलती है। छोटी भूमिका में जिमी शेरगिल असर छोड़ जाते हैं। दीपक डोबरियाल, स्वरा भास्कर और एजाज खान सहयोगी भूमिकाओं में प्रभावित करते हैं।

-तीन स्टार
-रघुवेन्द्र सिंह


Thursday, February 24, 2011

पापा है कमाल

बॉबी देओल के लिए नए वर्ष की शुरुआत धमाकेदार हुई है। यमला पगला दीवाना फिल्म के रूप में उन्होंने साल के आरंभ में अपने नाम एक सुपरहिट फिल्म कर ली है। बॉबी अपनी खुशी बांटते हैं, मैं पहले से कॉन्फिडेंट था कि फिल्म अच्छी बनी है। कितनी चलेगी, यह रिलीज के बाद पता चलता है। मुझे इस बात की खुशी हुई कि फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने यमला पगला दीवाना के बारे में ट्विटर पर बात की। लोग इसके बारे में ऐसे बात कर रहे थे जैसे उनकी फिल्म हो। फिल्म की सफलता से मुझे अहसास हुआ कि दुनिया में हमारे परिवार के लिए लोगों में कितना ज्यादा प्यार है।
यमला पगला दीवाना की सफलता की बड़ी वजह बॉबी पापा धमर्ेंद्र को मानते हैं। उन्हें गर्व है कि उनके पापा ने पचहत्तर साल की उम्र में एक सुपरहिट फिल्म दी है। बॉबी कहते हैं, पापा के इंडस्ट्री में पचास साल पूरे हो गए। पचहत्तर की उम्र में कोई ऐसी हिट फिल्म दे, तो कमाल की बात है। पापा को लोग बहुत प्यार करते हैं। लोग उन्हें बार-बार पर्दे पर देखना चाहते हैं। उनकी वजह से हमें प्यार मिलता है। सबका बहुत-बहुत शुक्त्रिया!
धर्मेद्र, सनी देओल और बॉबी तीन साल पहले पहली बार एक साथ अपने फिल्म में आए थे। यमला पगला दीवाना की तरह वह फिल्म भी सफल हुई थी। धर्मेद्र, सनी और बॉबी के बारे में कहा जा रहा है कि तीनों देओल एक-दूसरे के लिए लकी हैं। बॉबी इस बारे में हंसते हुए कहते हैं, हम ऐसा नहीं सोचते हैं। हम तीनों लकी हैं कि हम साथ हैं। उससे ज्यादा लक क्या हो सकता है? जिंदगी में फिल्म चले या न चले, हमारा साथ रहना जरूरी है। मैं लकी हूं कि मुझे पापा और भैया के साथ फिल्म में काम करने का अवसर मिलता है। हमें एक साथ देखना दर्शकों को भी अच्छा लगता है। हम भविष्य में भी साथ काम करेंगे।
पिता-पुत्र की लोकप्रिय और सफल तिकड़ी ने अपनी अगली फिल्म के बारे में सोचना शुरू कर दिया है। देओल परिवार ने यमला पगला दीवाना के युवा लेखक जसविंदर सिंह बथ पर इसका सीक्वल लिखने की जिम्मेदारी सौंप दी है। बॉबी बताते हैं, हम इसका पार्ट 2 बनाने जा रहे हैं। अपने के बाद हमें तीन साल लगा दोबारा साथ आने में, लेकिन इस बार इतना समय नहीं लगेगा। बस जल्दी से एक अच्छी कहानी हमारे लेखक लिख दें। कहानी अच्छी बननी चाहिए। यदि यमला पगला दीवाना की स्क्रिप्ट अच्छी नहीं होती, तो हम तीनों के रहने से फिल्म नहीं चलती। पापा, भैया और मुझे साथ लेकर कई निर्माता फिल्म बनाना चाहते हैं, लेकिन जब तक कहानी अच्छी नहीं मिलेगी, हम साथ काम नहीं करेंगे। बॉबी की अगली फिल्म होगी अनीस बज्मी की थैंक्यू। यह कॉमेडी फिल्म है। बॉबी बताते हैं, फिल्म थैंक्यू के अलावा मैं अब्बास-मस्तान की प्लेयर फिल्म भी कर रहा हूं। अब्बास-मस्तान तो मेरे घर के लोग हैं। दोनों फिल्मों को लेकर मैं बहुत एक्साइटेड हूं। इस साल यही दो फिल्में आएंगी। मैं और स्क्रिप्ट पढ़ रहा हूं। जब तक मुझे अच्छी स्क्रिप्ट के साथ अच्छी टीम नहीं मिलेगी, मैं कोई फिल्म साइन नहीं करूंगा। क्रिकेट की तरह फिल्म में भी अच्छी टीम का होना बहुत जरूरी है, वरना जीत नहीं मिलेगी।
-रघुवेंद्र सिंह