Tuesday, December 15, 2009

नहीं रखता पैसों का हिसाब: साइरस ब्रोचा

साइरस ब्रोचा एमटीवी के लोकप्रिय वीजे हैं। वे लोगों को हंसाने की कला में निपुण हैं। कुछ समय पहले उनकी फिल्म 99 प्रदर्शित हुई। उसमें उनका अभिनय सबको पसंद आया। अब उनकी मुंबई चकाचक और फ्रूट ऐंड नट प्रदर्शन के लिए तैयार हैं। आजकल साइरस फिल्मों पर अपना ध्यान अधिक लगाए हुए हैं। पिछले दिनों उन्होंने हमें मनी यानी पैसे के प्रति अपने नजरिए से अवगत कराया..।
आपके जीवन में पैसों की क्या अहमियत है?
मैं पैसों की अहमियत नहीं जानता। ऐसा इसलिए, क्योंकि मेरा सारा पैसा पापा के पास रहता है।
आपकी पहली कमाई क्या थी?
ग्यारह सौ रुपये, जो मुझे एक विज्ञापन फिल्म में काम करने के लिए मिले थे।
अपने प्रशंसकों को बचत के लिए क्या सुझाव देंगे?
पैसे को खुद से दूर रखें। तभी बचत संभव है।
आपने जीवन में क्या महत्वपूर्ण बचत की है?
सब डूब गया। अब ज्यादा कुछ नहीं है।
सबसे महंगी चीज, जो आपने खरीदी हो?
मुंबई में घर और गाड़ी। इन्हें खरीदने में पैसा कितना खर्च हुआ, वह नहीं बता सकता।
क्या लगता है कि आप आर्थिक रूप से सिक्योर हैं?
मौजूदा स्थिति में कोई भी आर्थिक रूप से सिक्योर नहीं है। अनिल अंबानी भी नहीं।
आपके आय-व्यय का ब्यौरा कौन रखता है?
पापा। मैं पैसों का हिसाब नहीं रखता। दरअसल, मेरा हिसाब कमजोर है।
क्या आप शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं?
हां, मैंने लगाया था, लेकिन सब डूब गया।
खरीदारी कैश से करते हैं या क्रेडिट कार्ड से?
यात्रा के दौरान के्र डिट कार्ड साथ रखता हूं। मुंबई में कैश से खरीदारी करता हूं।
प्यार, पैसा और परिवार को किस क्रम में रखना पसंद करेंगे?
पहले परिवार, फिर पैसा उसके बाद प्यार। मैंने प्यार को अंत में इसलिए रखा, क्योंकि अभी तक उसका अनुभव नहीं हुआ है।

Monday, December 14, 2009

हैप्पी फिल्म है पा: अभिषेक बच्चन | मुलाकात

अमिताभ और अभिषेक बच्चन कई फिल्मों में साथ और पिता-पुत्र के रूप में आए, लेकिन ये दोनों फिल्म पा में पहली बार पुत्र-पिता के रूप में नजर आएंगे। हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब बिग स्क्रीन पर एक पिता अपने बेटे और बेटा अपने पिता के किरदार में नजर आएगा। इस अद्भुत अनुभव और पिता अमिताभ बच्चन से आपसी रिश्ते के बारे में अभिषेक से बातचीत की..।
रियल पिता-पुत्र की जोड़ी को फिल्म में पुत्र-पिता के रूप में पेश करने का आइडिया किसका था?
पा के निर्देशक बाल्की का। वे एक दिन हमारे घर आए थे और उस वक्त पापा और मैं कुछ डिस्कस कर रहे थे। उन्होंने देखा कि जो बेटा है, वह सीरियस बातें कर रहा है और पिता शांति से उसे सुन रहे हैं। उस वक्त उन्हें पिता बेटा लगा। उन्होंने सोचा कि क्यों न इस विषय पर एक फिल्म बनाई जाए, जिसमें अमिताभ बच्चन को अभिषेक के बेटे के रूप में पेश किया जाए। फिर वे सोचने लगे कि इसे संभव कैसे किया जाए। काफी रिसर्च के बाद उन्हें प्रोजेरिया बीमारी के बारे में पता चला। इस तरह उन्होंने फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी।
अमिताभ बच्चन के साथ अपने रिश्तों के बारे में बताएंगे। पिता-पुत्र के अलावा आप दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता है?
निजी जीवन में हमारा रिश्ता दो दोस्तों का है। हमारे दादा जी ने पापा को सिखाया था कि बेटा अपने पिता का उस दिन दोस्त बन जाता है, जिस दिन वह अपने पिता के जूते पहन लेता है। मैं बारह या तेरह साल का था, जब मैंने पापा के जूते पहनने शुरू कर दिए। तब उन्होंने मुझे यह कहानी सुनाई। तबसे हम दोनों बेस्ट फ्रेंड हैं।
घर में क्या आपके सुझाव माने जाते हैं या आपको अभी तक बच्चे की तरह ही ट्रीट किया जाता है?
नहीं, बचपन से लेकर आज तक मां और पा ने हमेशा श्वेता और मेरी बात मानी है। हमेशा हमसे पूछा जाता है कि यह समस्या है और आप दोनों का इस पर क्या सोचना है? अब परिवार में ऐश्वर्या भी हैं, तो हम सब मिल-बैठकर डिसाइड करते हैं कि क्या होना चाहिए और कैसे होना चाहिए?
पा में एक बेटे ने अपने पिता के पिता का रोल किया या एक पिता ने अपने बेटे के बेटे का रोल किया। आप किस रूप में इसे याद करेंगे?
एक पिता ने अपने बेटे के बेटे का रोल निभाया, उस हिसाब से। फिल्म देखेंगे, तब लोगों को पता चलेगा कि इसमें किसका कन्ट्रीब्यूशन ज्यादा है। जब लोग पापा के काम को देखेंगे, तो चौंक जाएंगे। यह पापा के करियर का सबसे मुश्किल रोल है।
फिल्म का नाम पा ही क्यों रखा गया? पापा, बाबूजी या कुछ और क्यों नहीं?
क्योंकि मैं निजी जीवन में पा को पा ही बुलाता हूं, तो बाल्की को लगा कि इसका नाम पा ही रखा जाए।
आपके लिए अपने पिता के पिता का रोल करना चैलेंजिंग रहा होगा। इसके लिए आपने किस ढंग की तैयारी की?
रियल लाइफ में पा जिस तरह मुझसे पेश आते हैं, मैंने वही किया है। फिल्म में मैंने पा के तौर-तरीकों को अपनाया है। उसके अलावा मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि जो कुछ करना था, पा ऐसे ही कर रहे थे। एक ऐक्टर के लिए बहुत मुश्किल होता है, जब उसके पास ऑथोबैक रोल हो। यदि उसमें वह दिखाने की कोशिश करता है कि मैं भी फिल्म में हूं, तो फिल्म खराब हो जाती है। ऐक्टर के लिए साइलेंट सपोर्टर रहना ज्यादा चैलेंजिंग होता है। मैं फिल्म में फ्लो के साथ चला हूं।
पा पुत्र-पिता या पिता-पुत्र किस प्रॉस्पेक्टिव से कही गई कहानी है?
दो प्रॉस्पेक्टिव हैं। एक, पिता-पुत्र और दूसरा, पुत्र-पिता। मैं इसमें अमोल आरते की भूमिका निभा रहा हूं, जो लखनऊ से मेंबर ऑफ पार्लियामेंट है। विद्या बालन मेरी पत्नी बनी हैं और परेश रावल मेरे पिता की भूमिका में हैं। ऑरो की भूमिका पापा निभा रहे हैं। यह अमोल आरते और उसके बेटे ऑरो के रिश्ते की कहानी है। यह स्वीट, सिंपल फिल्म है। इसमें प्रोजेरिया का प्रचार नहीं किया गया है। जब लोग थिएटर से फिल्म देखकर निकलेंगे, तो उनके चेहरे पर स्माइल होगी, इस बात की गारंटी है। मैं इसे हैप्पी फिल्म मानता हूं।

लोग अच्छाइयां देखते हैं: सूरज बड़जात्या | मुलाकात

धारावाहिक में राजश्री प्रोडक्शन की सक्रियता बढ़ती जा रही है। वो रहने वाली महलों की, प्यार के दो नाम एक राधा एक श्याम और मैं तेरी परछाई हूं की सफलता के बाद अब राजश्री जी टीवी पर यहां मैं घर-घर खेली धारावाहिक लेकर आया है। जल्द ही एनडीटीवी इमेजिन पर उनके नए धारावाहिक दो हंसों का जोड़ा का प्रसारण भी आरंभ होगा। सूरज बड़जात्या ने हम से खास मुलाकात में जी टीवी पर प्रसारित हो रहे यहां मैं घर घर खेली और राजश्री की भावी योजनाओं के बारे में बात की..
यहां मैं घर-घर खेली के निर्माण की योजना कब बनी और आपने इसके प्रसारण के लिए जी टीवी को क्यों चुना?
जी टीवी से हमारा पुराना नाता है। हमारी पांचों फिल्मों के अधिकार जी टीवी के पास ही हैं। फरवरी में चैनल से हमारी बात पक्की हुई और नवंबर में इसका प्रसारण शुरू हुआ है। यहां मैं घर घर खेली राजश्री का अब तक का सबसे बड़ा शो है। यह उज्जैन के स्वर्ण भवन की कहानी है। यह पिता-पुत्री की कहानी है। लड़की जिस घर में पैदा होती है, जहां पली-बढ़ी होती है, उस घर की दीवार, तुलसी, आंगन में गिरती धूप से उसका अलग तरह का रिश्ता होता है। मैं खास तौर पर उल्लेख करना चाहूंगा कि यह घटना प्रधान नहीं, किरदार प्रधान धारावाहिक है। इसमें हर किरदार की अच्छाइयां और बुराइयां हैं। इसकी हीरोइन के पिता आलोक नाथ हैं। यह उनका बेस्ट रोल है। उन्होंने अपनी बेटी का नाम स्वर्ण आभा रखा है। इसकी स्टोरी, स्क्रीनप्ले, डायलॉग सब इरशाद कामिल लिख रहे हैं। उनकी लेखनी में रूह है। इसमें हमने संगीत पर भी खास ध्यान दिया है।
धारावाहिक में आपकी क्या भूमिका है?
इस धारावाहिक से मेरा खास लगाव है। इसकी बेसिक राइटिंग मैं देखता हूं। मेरे हिसाब से यही नींव होती है। मैं नींव पर नजर रखता हूं। मैं कास्टिंग देखता हूं। मैं एपीसोड देखता हूं। यह मेरी जिम्मेदारी होती है। राजश्री प्रोडक्शन की टीवी हेड मेरी बहन कविता हैं। वे सभी कार्यक्रम रोजाना देखती हैं।
आजकल टीवी पर रिअलिटी और ग्रामीण प्रधान कार्यक्रमों की अधिकता है। आप उनसे प्रभावित नहीं हुए?
रिअलिटी की तरफ टीवी जा रहा है, यह सही है। यह उन्नति है। हमने कभी किसी ट्रेंड को फॉलो नहीं किया। राजश्री के अंदर है कि हम जो कुछ बनाए, उसमें फैमिली की बांडिंग जरूर होनी चाहिए। हम अपने कार्यक्रमों में अच्छाइयां दिखाते हैं। सामाजिक जीवन में खराबियां बहुत होती हैं, लेकिन अच्छाइयां भी होती हैं। लोग कहते हैं कि बुराइयों से टीआरपी मिलती है। ऐसी बात नहीं है। मेरी समझ से लोग अच्छाइयां देखना चाहते हैं।
टीवी से अपने गहराते रिश्ते के बारे में क्या कहेंगे?
मल्टीप्लेक्स के टिकट की कीमत और वक्त की पाबंदी के कारण बहुत से दर्शक थिएटर में नहीं जाते। कह सकते हैं कि फिल्मों का एक अलग स्तर बन गया है। छोटे शहर के लोग कितना थिएटर जा पाते हैं? वह हार्डकोर राजश्री की आडियंस है। हमने सोचा कि इतनी कहानियां हैं कहने को, तो क्यों न टीवी पर आया जाए। हमारा पहला सीरियल वो रहने वाली महलों की हिट हुआ, तो हमारी हिम्मत बढ़ी। हम जानते हैं कि टीवी की आडियंस क्या चाहती है?
आप टीवी देखने के लिए कितना वक्त निकाल पाते हैं?
मैं काम की वजह से ज्यादा नहीं देख पाता, लेकिन मैं खुद को अपडेट रखता हूं कि किस सीरियल में क्या चल रहा है? मैं स्पोर्ट चैनल देखता हूं। मैं रीअल हीरोज को देखना पसंद करता हूं।
टीवी के लिए राजश्री की भावी योजनाएं क्या हैं?
नवंबर के अंत में एनडीटीवी इमेजिन पर हमारा नया धारावाहिक दो हंसों का जोड़ा शुरू होगा। अगले साल तीन धारावाहिक बनाने की हमारी योजना है।

ब्रिलिएंट एक्टर हैं आमिर: माधवन

दमदार अभिनय के लिए प्रसिद्ध आर माधवन का कहना है कि आमिर खान के साथ 3 इडियट्स और अमिताभ बच्चन के साथ तीन पत्ती फिल्म में काम करने के बाद उन्हें रियलाइज हुआ कि उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। एक मुलाकात में आर माधवन ने बताया, जब तक आप सोलो हीरो फिल्म में काम करते हैं, तब तक आपको लगता है कि आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन जब आपका सामना अमिताभ बच्चन और आमिर खान जैसे पॉवरफुल कलाकारों से होता है तब पता चलता है कि आप कितने पानी में हैं। अमिताभ बच्चन और आमिर खान के साथ काम करने के बाद मुझे रियलाइज हुआ कि मुझे बहुत कुछ सीखना बाकी है। सच कहूं तो मुझे उनकी आधी एक्टिंग ही आती है। मैं इन कलाकारों के साथ काम करके सम्मानित महसूस कर रहा हूं।
माधवन ने पहली बार रंग दे बसंती फिल्म में मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ काम किया था। विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म 3 इडियट्स में वे दोबारा आमिर खान के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। आमिर खान के बारे में माधवन कहते हैं, आमिर खान के साथ काम करने का अनुभव हमेशा अलग और स्पेशल रहा है। वे ब्रिलिएंट एक्टर हैं। थ्री इडियट्स की शूटिंग के दौरान मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। वे अच्छे दोस्त भी हैं। फिल्म की शूटिंग को हम सभी ने एंज्वॉय किया।
3 इडियट्स के निर्देशक राजकुमार हिरानी हैं। फिल्म के बारे में माधवन कहते हैं, यह राजकुमार हिरानी के स्टाइल की फिल्म है। इसमें बहुत सारे ऐसे मोमेंट हैं, जिन्हें दर्शक भूल नहीं पाएंगे। यह इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन दोस्तों की कहानी है। आमिर खान, शरमन जोशी और मैं तीन दोस्तों की भूमिका निभा रहे हैं। मेरे कैरेक्टर का नाम फरहान कुरैशी है। इसे मैं अपने करियर की स्पेशल फिल्म कहना चाहूंगा। इसकी शूटिंग के मोमेंट मेरे लिए स्पेशल रहे।
इस साल माधवन की दो फिल्में 13बी और सिकंदर रिलीज हुईं। दोनों फिल्मों में माधवन के अभिनय की तारीफ हुई। अब वे बेसब्री से 3 इडियट्स की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं। माधवन कहते हैं, साउथ की फिल्में हों या हिंदी फिल्में मुझे हमेशा दर्शकों का प्यार मिला है। सबका प्यार ही है जो मुझे इतनी फिल्में मिल रही हैं। निर्माता मुझ पर पैसा लगा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि 3 इडियट्स में मेरा काम लोगों को अच्छा लगेगा। यह साल मेरे लिए अच्छा साबित होगा। मैं 3 इडियट्स का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।
माधवन की व्यस्तता इधर हिंदी फिल्मों में बढ़ी है। यह बात माधवन भी मानते हैं। वे कहते हैं, हाल में आई मेरी हिंदी फिल्मों ने अच्छा बिजनेस किया। जिसकी वजह से निर्माताओं का मुझ पर विश्वास बढ़ गया। 3 इडियट्स के बाद मेरी फिल्म तीन पत्ती आएगी। उसके अलावा मैं सहारा, शेमारू और टी-सीरीज की फिल्में भी कर रहा हूं। अगले साल लीना यादव की तीन पत्ती और आनंद राय की फिल्म तनु वेड्स मनु में दर्शक मुझे देखेंगे।
माधवन आजकल कंगना राणावत के साथ तनु वेड्स मनु की शूटिंग कर रहे हैं। इस फिल्म में वे दोनों पहली बार साथ दिखाई देंगे।

अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है अविका गौर

छोटे पर्दे की नन्ही सुपर स्टार अविका गोर की इस ख्वाहिश से सब वाकिफ हैं कि वे बड़ी होकर मिस यूनिवर्स बनना चाहती हैं। उन्होंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए अभी से मेहनत करना शुरू कर दिया है। अविका को लग रहा है कि उनकी हाइट इसमें बाधक हो सकती है। इसलिए वे अपनी हाइट बढ़ाने का भी प्रयास कर रही हैं। आत्मविश्वास से लबरेज अविका कहती हैं, धारावाहिक बालिका वधू की लोकप्रियता और तमाम फिल्मों के ऑफर अभी तक मुझे मिस यूनिवर्स बनने के मेरे लक्ष्य से भटका नहीं पाए हैं। मिस यूनिवर्स बनना मेरा सपना है। मैं जानती हूं कि वहां तक पहुंचने के लिए बहुत नॉलेज चाहिए, इसलिए मैं मेहनत से पढ़ाई कर रही हूं। मैं यह भी जानती हूं कि मेरी हाइट कम है। उस स्पर्धा में जाने वाली लड़कियां लंबी होती हैं। मैं अपनी हाइट बढ़ाने की कोशिश कर रही हूं। आजकल मैं साइक्लिंग करती हूं।
बालिका वधू में आनंदी के रोल से मिली लोकप्रियता से अविका बहुत खुश हैं। वे कहती हैं, मैं जहां भी जाती हूं, लोग मुझे आनंदी, चुहिया, बिंदड़ी कहकर बुलाते हैं। यह सुनकर मुझे अच्छा लगता है। मैं सच कह रही हूं। इस लोकप्रियता का मुझे जरा भी घमंड नहीं है। अभी मुझे बहुत दूर जाना है। मैं आज भी सीधी-सादी और थोड़ी-सी शरारती अविका हूं। मुझे नहीं पता था कि मैं इतनी कम उम्र में इतनी पॉपुलर बन जाऊंगी।
धारावाहिक बालिका वधू में आने वाले ट्विस्ट के बारे में पूछने पर अविका कहती हैं, उसके लिए सीरियल देखना पड़ेगा। मैं इतना बता सकती हूं कि जल्द ही सीरियल में सुखद मोड़ आने वाला है। आनंदी जल्द ही फिर से हंसती-चहचहाती दिखाई देगी।
पिछले दिनों अविका फिल्म मॉर्निग वॉक में थीं। क्या भविष्य में वे फिर किसी फिल्म में नजर आएंगी? वे बताती हैं, वह फिल्म मैंने बालिका वधू स्वीकारने से पहले साइन की थी। मैं खुश हूं कि लोगों को मेरा काम अच्छा लगा। मैंने एक फिल्म पाठशाला में भी काम किया है। उसमें शाहिद कपूर और आयशा टाकिया हैं। वह भी जल्द आएगी। मैं और फिल्मों में काम करना चाहती हूं लेकिन बालिका वधू से फुरसत नहीं मिलती। वैसे भी, इस सीरियल से मुझे वह सब मिल रहा है, जो फिल्मों से मिलता है। मैं खुश हूं। अविका आगे कहती हैं, मैं कलर्स के रिअलिटी शो खतरों के खिलाड़ी में जाना चाहती हूं। मैं उस शो की फैन हूं। खास बात यह है कि मुझे किसी चीज से डर नहीं लगता। मैं उस शो के निर्माताओं से कहना चाहती हूं कि वे बच्चों के लिए भी ऐसा शो बनाएं।

Thursday, December 10, 2009

सेहत अच्छी तो सब अच्छा-रितिक रोशन/फिटनेस मंत्र

रितिक रोशन नियमित रूप से व्यायाम करते हैं। वह संतुलित आहार ग्रहण करते हैं। यही कारण है कि वह स्वस्थ व चुस्त-दुरुस्त हैं। उनका सुडौल शरीर लोगों खासकर युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आइए जानते है रितिक की फिटनेस के राज-
[स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन]
''मैं समर्पित भाव से अपनी सेहत का ख्याल रखता हूं। मेरे लिए स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। मैं फिट रहने के लिए पैसा खर्च करने में जरा भी हिचकिचाता नहीं हूं। मेरा मानना है कि शरीर ही सिर्फ आपका है। उस पर पूरी तरह से आपका अधिकार है। उसे आप जिस तरह चाहें उस तरह रख सकते हैं। मैं जब ऐसे लोगों से मिलता हूं जो फिट नहीं होते तो सोचता हूं कि कोई अपने शरीर के साथ इतना गैरजिम्मेदाराना बर्ताव कैसे कर सकता है? ''
[काम में तभी मन लगेगा..]
''यदि आपकी सेहत अच्छी रहती है, तो न केवल आप शारीरिक रूप से सशक्त महसूस करते हैं बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त महसूस करते है। अच्छी सेहत के कारण काम में आपका मन लगेगा और हर चीज आपको सुखदायक लगेगी। आपके चेहरे पर अलग तरीके का तेज दिखायी देगा।''
[राज की बात]
''मेरी फिटनेस का एकमात्र राज कड़ी मेहनत है। मैं प्रतिदिन शूटिंग के दौरान समय निकालकर व्यायाम करता हूं। मैं बहुत नियंत्रित जीवन जीता हूं। मुझे भी मीठे खाद्य पदार्थ बहुत पसंद हैं, लेकिन मैं खुद पर कंट्रोल रखता हूं। मैं फल, जूस व हरी सब्जियां अधिक खाता हूं। मैं योगासनों को सर्वोत्ताम व्यायाम मानता हूं।''
-रघुवेन्द्र सिंह

इंतजार में जिया

फिल्म नि:शब्द से बालीवुड में दस्तक देने वाली जिया खान किसी ब्वायफ्रेंड की तलाश में नहीं है। दरअसल उन्हें अपनी नई फिल्म यंत्र के लिए कोई हीरो नहीं मिल रहा है। अमिताभ बच्चन और आमिर खान जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम कर चुकी जिया हीरो न मिलने की वजह से काफी परेशान हैं। केन घोष की फिल्म चांस पे डांस से आउट होने के बाद जिया ने मिलिंद उके की यह फिल्म साइन की थी। इसमें पहली बार जिया दोहरी भूमिका में नजर आएंगी। जानकारों के मुताबिकइस फिल्म में पहले जिया के अपोजिट हरमन बावेजा काम करने वाले थे लेकिन कुणाल कोहली की फिल्म साइन करने के बाद उन्होंने इसमें काम करने से इंकार कर दिया। अब फिल्म के निर्माता-निर्देशक नए हीरो की तलाश में हैं। इसकी शूटिंग नए साल से होनी थी। लेकिन हीरो न मिलने के कारण शूटिंग भी लटक सकती है। बेचारी जिया, गजनी के बाद उन्हें कोई पूछ नहीं रहा। एक फिल्म मिली भी तो हीरो नहीं मिल रहा। ऐसे में वे इंतजार न करें तो क्या करें।

-raghuvendra Singh