Saturday, June 22, 2013

मुझे लोग कोलावरी वाला बुलाते हैं: धनुष

तमिल सिनेमा के प्रिंस धनुष हिंदी फिल्मों में रांझणा से एक नई पारी का आगाज कर रहे हैं. रघुवेन्द्र सिंह इस सुपस्टार की विनम्रता से प्रभावित हैं

आजकल तमिल सिनेमा के इंटरनेशनल सुपस्टार धनुष का नाम मुंबई में सबकी जुबान पर है. आनंद एल राय की फिल्म रांझणा में इस तीस वर्षीय युवक ने स्कूल बॉय की भूमिका जीवंत करके सबको चौंका दिया है. सोनम कपूर के साथ उनकी जोड़ी को अपरंपरागत माना जा रहा है, लेकिन यही इस अभिनेता की विशेषता है. उनका चेहरा भी हिंदी फिल्मों के आदर्श हीरो जैसा नहीं है, लेकिन उनके व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण है, जो सबको उनका दिवाना बना देता है. अपने अतुलनीय अभिनय के लिए उन्होंने सबसे कम उम्र (29 वर्ष) में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल करने का कीर्तिमान अपने नाम किया है. अडुकलम (2011) के लिए ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी उन्होंने जीता था. तमिल सिनेमा में 12 वर्षों से राज कर रहे धनुष ने दो वर्ष पहले कोलावरी डी गीत से विश्वस्तरीय लोकप्रियता हासिल करके सबको अचंभित कर दिया था.
वह दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में वह पले-बढ़े और खेले हैं. उनके पिता कस्तुरी राजा और बड़े भाई सिल्वाराघवन तमिल के स्थापित फिल्मकार हैं. वह इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उनके लिए सिनेमा का सितारा बनना तय कर रखा था. सुपस्टार रजनीकांत की बेटी ऐश्वर्या से शादी करने के बाद, लोगों के मन में संशय था कि वह सातवें आसमान पर पहुंच जाएंगे, लेकिन उनकी विनम्रता और मृदुभाषिता की जितनी प्रशंसा की जाए, कम होगी. वक्त के साथ उनके प्रति लोगों का प्यार और सम्मान और बढ़ गया है.
फिल्मफेयर से एक खास मुलाकात में धनुष ने अपने जीवन की किताब खोलकर रख दी.
   

आप 2002 से तमिल फिल्मों में अभिनय कर रहे हैं. हिंदी फिल्मों में आने में इतनी देर क्यों हुई?
यह मौका मुझे अब मिला है. मेरा मानना है कि हर चीज का एक सही समय होता है. रांझणा जैसी स्क्रिप्ट मेरे पास अब आई और मुझे लगा कि यह रोल मेरे लिए ही लिखा गया है. 

आपके पास अनेक हिंदी फिल्मों के ऑफर आए होंगे, लेकिन आपने रांझणा को ही क्यों चुना?
रांझणा मेरे लिए एकदम परफेक्ट है. यह किरदार आइकॉनिक है. यह बहुत अच्छा किरदार है. मैं कुंदन के किरदार के आसानी से कनेक्ट कर सका. मैं इतना जानता हूं कि यह किरदार मेरे लिए ही लिखा गया है.

दक्षिण भारतीय होते हुए एक बनारसी लडक़े का किरदार निभाना आपके लिए चुनौती रही होगी?
मेरे लिए केवल एक चुनौती थी कि मैं हिंदी नहीं जानता था. यह मेरे लिए एक मुश्किल पक्ष था. लेकिन मुझे इस फिल्म की शूटिंग में बहुत मजा आया, क्योंकि इसके लेखक हिमांशु शर्मा ने हिंदी के मामले में मेरी मदद की. उन्होंने लाइंस को समझने में मेरी सहायता की. वो सब लोग बहुत अच्छे इंसान हैं, इसलिए इसकी शूटिंग को मैंने एंजॉय किया. हम नई जगहों पर गए और नए लोगों से मिले. इस वजह से हिंदी की कठिनाई थोड़ी कम हो गई. मैं कहना चाहूंगा कि मेरे लिए इसमें कोई चैलेंज नहीं था. 

हमने पर्दे पर अनेक प्रेम कहानियां देखी हैं. रांझणा की लव स्टोरी किस प्रकार अलग है?

रांझणा का साधारण प्यार ही इसका असाधारण पहलू है. जब आप इसे देखेंगे तो भूल जाएंगे कि यह एक फिल्म है. यह इतनी रियलिस्टिक है. इस फिल्म के 45 मिनट देखने के बाद मुझे तो ऐसा ही महसूस हुआ. इस फिल्म की विशेषता इसकी सरलता और सहजता है.

आप किस तरह के प्रेमी हैं?
मैं प्यार का इजहार करने में विश्वास करता हूं. मैं बहुत पॉजिटिव हूं. मुझे प्यार किया जाना अच्छा लगता है.

क्या आप बचपन के प्यार में यकीन करते हैं?
मैं हर तरह के प्यार में विश्वास करता हूं. प्यार केवल दूसरे के प्रति एक भावना नहीं है. यह एक अलग तरह का अहसास है. यह जरूरी नहीं है कि आपको अपने पहले प्यार से जुड़ाव होना चाहिए. यह एक अहसास है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए.

आपने प्यार में सबसे क्रेजी चीज क्या की है?
मैंने जो भी किया, वह सब क्रेजी था (हंसते हैं). मैं अपने पहले प्यार पर एक फिल्म बना सकता हूं. मुझे नहीं पता कि मुझे अपने किस प्यार का चुनाव करना चाहिए, लेकिन मैं उसके बारे में बात करना चाहूंगा, जिसके साथ मैं हूं. मैं झूठ बोलकर किसी को चोट नहीं पहुंचाना चाहता.

कोलावरी डी की कामयाबी के बाद आपकी लोकप्रियता बहुत बढ़ गई. क्या आपकी पत्नी ऐश्वर्या (रजनीकांत की बड़ी बेटी) असुरक्षित महसूस करती हैं?
उन्हें असुरक्षित क्यों होना चाहिए? बल्कि वह बहुत खुश हैं. असुरक्षित महसूस करने का उनके पास कोई कारण नहीं है.

ऐश्वर्या से आपकी पहली मुलाकात कब हुई? अपनी लव स्टोरी के बारे में बताएं.
वह मेरी फिल्म का फस्र्ट डे फस्र्ट शो देखने थिएटर में गई थीं और मैं पब्लिक का रिएक्शन देखने के लिए वहां मौजूद था. यह मेरी दूसरी फिल्म (कढ़ाल कोंडें) थी. उन्हें फिल्म बहुत अच्छी लगी. बाद में, उन्होंने मुझे एक गुलदस्ते के साथ मैसेज भेजा, ''गुड जॉब एंड कीप इन टचÓÓ. और मैंने उस मैसेज को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया और आज देखिए हम दोनों कहां हैं (हंसते हैं).

सोनम कपूर के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? क्या उन्होंने मुंबई को समझने या हिंदी के मामले में आपकी कोई मदद की?
सोनम कपूर के साथ काम करने का अनुभव शानदार रहा. वे मेरे साथ बहुत प्यार और धैर्य से पेश आईं. धैर्य इसलिए कह रहा हूं क्योंकि हिंदी पर मेरी पकड़ अच्छी नहीं थी, लेकिन वे इस बात को लेकर घबराई नहीं. उन्होंने मेरा पूरा सहयोग किया. उन्होंने कभी अपना स्टारडम दिखाने की कोशिश नहीं की. उन्होंने कभी ऐसे बर्ताव नहीं किया कि वे सुपरस्टार हैं. वे डाउन टू अर्थ हैं. वे रोज अपने घर से हम लोगों के लिए खाना लाती थीं. वे स्वीटहार्ट हैं. जहां तक हिंदी की बात है, तो आनंद सर और हिमांशु अधिकतर समय मेरी मदद करते थे. अगर जरूरत होती थी, तो सोनम स्पॉट पर मेरी मदद करती थीं. सोनम ने क्या किया कि मुझे सहज करवाया. वह मेरे लिए बड़ी मदद थी.

आपको साउथ में राजकुमार माना जाता है. आप रजनीकांत के दामाद हैं. रांझणा साइन करते समय किसी प्रकार का प्रेशर था? 
बिल्कुल नहीं. कर्नाटक में लोग मुझे रजनीकांत का दामाद मान कर सम्मान देते हैं, लेकिन जब मैं उत्तर भारत में आता हूं, तो लोग मुझे कोलावरी वाला कहकर बुलाते हैं (हंसते हैं). जब भी मैं बाहर निकलता हूं, तो लोग कहते हैं, वो देखो कोलावरी वाला, कोलावरी वाला. तो रांझणा साइन करते समय मैं कोलावरी वाला था.

क्या आप रजनीकांत से किसी प्रकार का सुझाव लेते हैं?
नहीं, बिल्कुल नहीं. मैं अपने फैसले खुद लेता हूं.

रजनीकांत से किस तरह का रिश्ता आप शेयर करते हैं? एक दोस्त का या फिर ससुर-दामाद का औपचारिक रिश्ता?
हमारा रिश्ता बहुत स्पेशल और अलग है. मैं शब्दों में इसे बयां नहीं कर सकता. यह शब्दों से परे है. यह मेरे लिए बहुत कीमती है. हम दोनों एक-दूसरे के प्रति ईमानदार हैं. यह रिश्ता अपने आप में अनूठा है.

वो घर में कैसे रहते हैं? ऐसा कहा जाता है कि वह अपनी स्क्रीन इमेज को पर्सनल लाइफ में नहीं लाते?
मुझे उनके बारे में बात नहीं करनी चाहिए. यह उचित नहीं होगा. मैं अपने जीवन के बारे में बात कर सकता हूं, लेकिन उनके नहीं.

अमिताभ बच्चन ने कोलावरी डी की प्रशंसा की थी. उनके साथ अपने संबंध के बारे में कुछ बता सकते हैं?
ईमानदारी से कहूं तो मैंने बच्चन साहब को दूर से देखा है. आठ साल पहले मेरी शादी में वो आए थे. उसके बाद उनसे मेरी मुलाकात नहीं हुई. फिर जब कोलावरी डी आया, तो उन्होंने उसके बारे में ट्विट किया. कोलावरी डी की शानदार सफलता के कारणों में से एक वो हैं. उनके एक ट्विट ने इसे चर्चित कर दिया. बाद में, एक अवॉर्ड फंक्शन में मैंने कोलावरी डी को उन्हें समर्पित किया. मैंने इसके बोल बदल दिए और इस धुन पर उनके बारे में गाया. इसके बदले में उन्होंने मुझे अपने गले लगाया, वह अहसास मेरे दिल के हमेशा करीब रहेगा. ऐसा नहीं है कि मैं उनके बहुत नजदीक हूं, उनके लिए मेरे दिल में बहुत सम्मान है. वह मुझे प्रेरित करते हैं. उनके साथ मुझे कुछ ऐसे पल मिले हैं, जिन्हें मैं जिंदगी भर याद करता रहूंगा.

कोलावरी डी ने किस प्रकार आपकी जिंदगी को परिवर्तित किया?
सबकी जिंदगी में एक हाई पॉइंट आता है. कुछ लोगों के जीवन में यह नौकरी हो सकती है, कुछ के लिए कार हो सकती है. मेरे लिए कोलावरी डी मेरे जीवन का हाई पॉइंट था.

जावेद अख्तर ने इसके लिरिक्स की आलोचना की. आपको इस बात से ठेस पहुंची?
बिल्कुल नहीं. मुझे इस इंडस्ट्री में आए काफी साल हो गए. पहले मैं इस तरह की टिप्पणियों से विचलित हो जाता था, लेकिन बाद में मुझे अहसास हुआ कि हर व्यक्ति को अपने विचार रखने का अधिकार है. कुछ लोगों को वह अच्छा लग सकता है और कुछ को बुरा. मुझे इस बात की खुशी है कि मेरा गाना जावेद साहब जैसे लीजेंड तक पहुंचा. हम सबको इस बात की खुशी थी कि यह गाना इस लेवल के लोगों तक पहुंच सका. मैं उनकी इस टिप्पणी को सकारात्मक रूप से लेता हूं. यह उनके विचार हैं और मैं उनके विचारों का सम्मान करता हूं.

आनंद एल राय के साथ कैसा अनुभव रहा?
आनंद जी मेरे सीक्रेट सैंटा हैं. मैं उनके जैसा बनना चाहूंगा. अनेक कारणों में से एक वो हैं, जिनकी वजह से मैं हिंदी फिल्मों में यकीन करता हूं. वह हमेशा दूसरों के हित के बारे में सोचते हैं. वह बहुत सुलझे इंसान हैं. उन्होंने सेट पर मुझे बहुत अच्छे से रखा. मुझे नहीं पता कि रांझणा से मुझे प्रोफेशनल लाइफ में क्या मिलेगा, लेकिन मुझे इसका यकीन है कि मुझे एक बहुत अच्छा इंसान भाई के रूप में मिल चुका है.

क्या यह सच है कि आप आनंद राय के साथ एक हिंदी फिल्म बनाने जा रहे हैं?
हां, हमारी ऐसी योजना है. लेकिन हम अभी उसके बारे में बात कर रहे हैं. हिंदी फिल्मों में मैं आगे क्या करूंगा, यह रांझणा की रिलीज के बाद पता चलेगा.

क्या आप हिंदी फिल्मों में गाने के लिए तैयार हैं?
बिल्कुल, और क्यों नहीं? अगर मुझे मौका मिलता है, तो मैं जरूर हिंदी फिल्म में गाना गाना चाहूंगा.

हिंदी और तमिल फिल्म इंडस्ट्री में आपने क्या फर्क महसूस किया?
कोई फर्क नहीं है. केवल भाषा अलग है. कल्चर के मामले में भी थोड़ा विभिन्नता है. भावनाएं एक ही हैं. फिल्मों के लिए लोगों को प्यार भी एक समान ही है. मुझे कोई बड़ा अंतर नहीं दिखा.

क्या दक्षिण भारतीय फिल्मों के हिंदी रिमेक के आप पक्षधर हैं?
आजकल हिंदी फिल्मों का रिमेक तमिल में हो रहा है, तो तमिल फिल्मों का हिंदी में रिमेक होना चाहिए. तमिल फिल्मों का तेलुगू और कन्नड़ में रिमेक होता है. ऐसा हर इंडस्ट्री में हो रहा है. इसमें गलत बात नहीं है. यह एक अच्छी चीज है.

अपनी कौन-सी फिल्म का आप चाहेंगे कि हिंदी में रिमेक हो?
मैं चाहता था कि पोल्लाधवन (२००७) हिंदी में बने. लेकिन मैंने सुना है कि किसी ने उसके अधिकार खरीद लिए हैं और इसे हिंदी में बना रहा है.

क्या आपको इस बात का डर है कि आपको हिंदी फिल्म दर्शकों के बीच स्वीकृति मिलेगी या नहीं?
नहीं, मेरे अंदर ऐसी कोई फीलिंग नहीं है. मैं नर्वस भी नहीं हूं. बल्कि मैं तो खुश हूं कि मैं रांझणा जैसी फिल्म कर सका. और मैं ऐसे लोगों के बीच हूं, जो वाकई अच्छे इंसान हैं. मैंने जितनी चाह की थी, उससे कहीं ज्यादा ईश्वर ने मुझे दिया है. इसलिए जिंदगी से मेरी कोई अपेक्षा नहीं है. इसलिए मुझे कभी निराशा नहीं होती और मैं सरप्राइजेज के लिए हमेशा तैयार रहता हूं.

कोलावरी डी के बाद कोई क्रेजी फैन मोमेंट, जो आप शेयर कर सकें.
मुझे लगता है कि कोलावरी डी अपने आप में सबसे क्रेजी चीज थी. मेरे हिसाब से कोलावरी डी का हर वर्जन, सोनू निगम के बेटे के वर्जन के अलावा, जो इंटरनेट पर आया, मेरे लिए क्रेजी था.

हमने आपको रांझणा के सेट पर देखा. आपमें कोई स्टार वाला एट्टियूड नहीं है. क्या आप ऐसे ही हैं?
आपने मुझे वैसे ही देखा, जैसा मैं हूं. मुझे ऑफ कैमरा एक्टिंग करनी नहीं आती (हंसते हैं). यह हमेशा से मेरी समस्या रही है.

आप एक्टिंग में कैसे आए?
मैंने एक्टिंग में आने का फैसला नहीं किया था. मैं हमेशा एक इंजीनियर बनना चाहता था, लेकिन इस करियर ने मुझे चूज किया. मेरे पिता (कस्तूरी राजा) एक निर्माता-निर्देशक हैं. मुझे याद है कि एक इमर्जेन्सी आ गई थी और उन्हें एक सप्ताह में अपनी फिल्म की शूटिंग शुरू करनी थी और उस रोल के लिए उन्हें एक स्कूल बॉय की जरूरत थी और उस समय मैं स्कूल में था. बस, मैं आ गया फिल्मों में.

ऐसा कहा जाता है कि शादी के बाद स्टार्स की फैन फॉलोइंग कम हो जाती है. क्या आप मानते हैं?
मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ है.

क्या आप मानते हैं कि एक स्टार को कम उम्र में शादी नहीं करनी चाहिए?
बिल्कुल नहीं. लोगों को उस समय शादी कर लेनी चाहिए, जब उन्हें लगे कि यह सही समय है.

आप दो बच्चों (यात्रा और लिंगा) के पिता हैं, जिस बात पर आपको देखने के बाद कोई यकीन नहीं करेगा. क्या आप सख्त पिता हैं?
मैं किसी भी दूसरे पिता की तरह हूं. एक पिता के तौर पर मेरे अंदर कोई स्पेशल बात नहीं है. मैं अपने बच्चों के लिए एक नॉर्मल डैड हूं. हर पिता अपने बच्चों के लिए बेस्ट करना चाहता है और मैं भी ऐसा ही करता हूं. हर पिता चाहता है कि उसके बच्चे हर चीज में सबसे आगे हों, ऐसा ही मैं भी चाहता हूं.

आपके बच्चे एक सेलीब्रिटी परिवार में बड़े हो रहे हैं, आप उन्हें ग्राउंडेड कैसे रखते हैं?
मुझे इस तरह का कोई प्रयास नहीं करना पड़ा है क्योंकि मेरा बड़ा बेटा छह साल का है और छोटा तीन साल का है. हां, मैं उन्हें मीडिया से दूर रखने की हर संभव कोशिश करता हूं. मैं उन्हें एक सामान्य बचपन देने की कोशिश करता हूं.

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में किन निर्देशकों के साथ आप काम करना चाहते हैं?
मैं राजकुमार हिरानी, अनुराग बासु, अनुराग कश्यप और अभिषेक कपूर के साथ  काम करना पसंद करूंगा.

आप इनके बारे में कैसे जानते हैं? क्या आपने इनकी फिल्में देखी हैं?
नहीं, ऐसा नहीं है. मेरे पास फिल्में देखने के लिए समय नहीं मिल पाता, लेकिन ये निर्देशक हैं, जिनका नाम मेरे दिमाग में घूमता रहता है, इसलिए मैंने इनका नाम लिया.

आप किन एक्ट्रेसेस के साथ रोमांस करना चाहते हैं?
यह मेरे निर्देशकों पर निर्भर करेगा (हंसते हैं).

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आपके दोस्त कौन हैं?
फिलहाल, आनंद सर, हिमांशु, सोनम कपूर, स्वरा भास्कर, जिशान और मेरे सिनेमैटोग्राफर विशाल सर.





1 comment:

दीपक की बातें said...

धनुष के अनछुए पहलुओं से रूबरू कराने के लिए शुक्रिया!