Friday, March 6, 2009

मेरी आदर्श महिलाएं/ महिला दिवस विशेष

हर पुरुष की सफलता के पीछे किसी महिला का हाथ होता है और जिंदगी संवारने में भी। ग्लैमर जगत से जुड़े कुछ प्रसिद्ध व्यक्ति बता रहे है अपने जीवन की आदर्श महिलाओं के बारे में-
आशुतोष गोवारिकर (निर्माता-निर्देशक)
प्रसिद्ध फिल्मकार आशुतोष गोवारिकर का कहना है कि मैं तीन महिलाओं को अपना आदर्श मानता हूं। खुशी की बात यह है कि ये तीनों महिलाएं मेरे निजी जीवन से जुड़ी हैं। आज मैं जो कुछ हूं, उन्हीं की बदौलत हूं। मैं अपनी सफलता का सारा श्रेय उन्हीं को दूंगा। ये महिलाएं है मेरी मां किशोरी जी, बहन अस्लेष और पत्नी सुनीता। ये तीनों मेरी शक्ति हैं। यदि मेरी मां ने मुझे पाल-पोसकर और पढ़ा-लिखाकर बड़ा न किया होता, तो आज मेरा नामोनिशां न होता। अपनी बहन से मैंने सुख-दुख बांटे हैं। सुनीता के बारे में क्या कहूं? वह तो हर कदम पर मेरे साथ रहती है और मेरा उत्साहव‌र्द्धन करती है। सच कहूं तो उसके बिना मैं कुछ भी नहीं हूं। महिला दिवस के अवसर पर मैं अपनी तीनों आदर्श महिलाओं को दिल से धन्यवाद दूंगा और चाहूंगा कि हर दम इनका साथ यूं ही बना रहे।
जैकी श्रॉफ (अभिनेता)
लोकप्रिय फिल्म अभिनेता जैकी श्रॉफ अपनी मां रीता को अपना आदर्श मानते हैं। जैकी श्रॉफ का कहना है कि दुनिया को दिखाने के लिए तो मैं कई महिलाओं को अपना आदर्श बता सकता हूं, लेकिन मैं वैसा नहीं करूंगा। मैं सिर्फ अपनी मां को अपना आदर्श मानता हूं। मां से मेरा अस्तित्व है। मैं उन्हीं में अपने ईश्वर के दर्शन करता हूं। उनकी पूजा करता हूं। उनका बखान करने बैठूं, तो शब्द कम पड़ जाएंगे। महिला दिवस के मौके पर मैं ईश्वर का शुक्रिया अदा करूंगा कि उन्होंने मुझे प्यारी सी मां दी। मेरा मानना है कि जो शख्स मां की इज्जत करना जानता है, वह हर महिला की इज्जत करता है। महिलाओं को सम्मान देना हमारा क‌र्त्तव्य है। उनके बिना हम कुछ भी नहीं हैं।
हरमन बावेजा (अभिनेता)
[मां]
मां ही मेरी दुनिया हैं। उन्हीं से मेरी शुरुआत होती है और उन्हीं के कदमों में जाकर मैं सिमट जाता हूं। उन्होंने ही मुझे विपरीत परिस्थितियों से लड़ना सिखाया है। उन्हीं की सीख है, जो आज मैं कठिन परिस्थिति का सामना सहजता से कर लेता हूं।
[बहन]
मेरी बहन रोविना दुनिया में सबसे जुदा हैं। वे घरेलू कामकाज के साथ ही पापा के कामकाज में भी हाथ बंटाती हैं। मैं उन्हें अपना सबसे अच्छा दोस्त मानता हूं। उनका हार्डवर्किग नेचर मुझे बेहद पसंद है। मैं उन्हीं की तरह हार्डवर्क करने की कोशिश करता हूं।
[शाहिदा परवीन]
वे कोई सेलेब्रिटी नहीं हैं। वे जम्मू कश्मीर में पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी बहादुरी और साहस के किस्से लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। हाल में मेरी मुलाकात उनसे हुई। मैं उनकी पर्सनैलिटी से बेहद प्रभावित हुआ। महिला होने के बावजूद वे हिम्मत के साथ वहां विपरीत परिस्थितियों के बीच ड्यूटी कर रही हैं।
-रघुवेंद्र सिंह

2 comments:

संगीता पुरी said...

आपका कहना बिल्‍कुल सही है कि हर पुरुष की सफलता के पीछे किसी महिला का हाथ होता है .... जैसा कि हरेक सफल पुरूष स्‍वीकार करते हें ... पर काश हर महिला की सफलता के पीछे किसी पुरूष का भी हाथ होता है .... इसके अभाव से महिलाओं का संघर्ष दुगुना हो जाता है।

mayur said...

`सोशल ट्रीटमेंट´का संकल्प लेना होगा

महिला दिवस पर कुछ सार्थक इधर भी पड़ सकते हैं । महिला सशक्त हों.राष्ट्र सशक्त होगा