Tuesday, April 28, 2009

असली स्टार थे फिरोज खान | स्मृति

जन्म- 25 सितंबर 1939
मृत्यु- 27 अप्रैल 2009
मुंबई। स्टाइलिश एक्टर एवं फिल्म मेकर फिरोज खान के देहांत से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शोक व्याप्त है। सोमवार सुबह तड़के डेढ़ बजे बंगलौर स्थित अपने फार्म हाउस पर उन्होंने अंतिम सांसें लीं। वे ७० वर्ष के थे। जैकी श्रॉफ उन्हें याद करते हैं, फिरोज जी असली स्टार थे। उनके जैसी स्टाइल और खुद्दारी किसी एक्टर में नहीं है। उन्होंने खुद को कभी बेचा नहीं। वे किसी की शादी या प्राइवेट फंक्शन में कभी नहीं नाचे। हिंदी सिनेमा इंडस्ट्री में उनका स्थान कोई नहीं ले पाएगा। मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं उनके साथ काम नहीं कर सका। हम दोनों एक साथ फिल्म गैर इलाका में काम करने वाले थे। बाद में उन्होंने मुझे अपनी फिल्म मर्यादा पुरूषोत्तम राम में रावण की भूमिका के लिए साइन किया। उसमें राम की भूमिका रितिक रोशन निभाने वाले थे, लेकिन किसी कारणवश वह फिल्म बन न सकी। बाद में उन्होंने मुझे अपनी फिल्म कुर्बानी के रीमेक के लिए संपर्क किया। मैंने हां कह दिया था। वे उस फिल्म की तैयारी में लगे हुए थे, पर अफसोस की वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनकी वह ख्वाहिश अधूरी रह गयी।
फिरोज खान निर्देशित आखिरी फिल्म जांनशीं थी। अभिनेत्री सेलिना जेटली खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें उनके साथ काम करने का मौका मिला। फिरोज खान के बारे में सेलिना कहती हैं, फिरोज जी मेरे मेंटोर और फ्रेंड थे। वे मुझे सेलिना बेबी कहकर बुलाते थे। उनके साथ काम करते हुए मैंने एक्टिंग और जीवन के बारे में बहुत सारी बातें सीखीं। वे आज भले ही मेरे साथ नहीं हैं, लेकिन उनकी बातें और यादें हमेशा मेरी हिम्मत बनकर साथ रहेंगी। मैं उम्मीद करती हूं कि ईश्वर के दरबार में मैं फिर उनसे मिलूंगी। 8
युवा फिल्मकार विवेक शर्मा की फिरोज खान से पहली मुलाकात दस वर्ष पहले महेश भट्ट के एडीटिंग स्टूडियो में हुई थी। उस क्षण को वे याद करते हैं, फिरोज खान को घोड़ों का शौक था। वे घंटों घोड़ों के ऊपर बात करते थे। वे पहले ही बता देते थे कि रेस में कौन सा घोड़ा जीतेगा और कौन हारेगा। आज उस पल को याद करता हूं तो उनका स्टाइलिश अंदाज सामने आ जाता है। वे आधुनिक एवं दूरदर्शी फिल्म मेकर थे। उन्होंने हिंदी सिनेमा के संगीत को कलरफुल बनाया। उन्होंने जीवन के अंतिम समय तक स्टाइलिश फिल्में बनायीं।
-रघुवेन्द्र सिंह