Friday, October 17, 2008

फिल्मसिटी में भोपाल

[रघुवेंद्र सिंह]
भोपाल शहर की तंग गलियां, छोटे-बड़े मकान, एक तरफ मंदिर, दूसरी तरफ मजार। सांप्रदायिक सौहा‌र्द्र की आकर्षक तस्वीर खींचते इस शहर के लक्ष्मी निवास में रहती है चांदनी। ये आकर्षक तस्वीर राजश्री प्रोडक्शन की सोनू सूद एवं ईशा कोप्पिकर अभिनीत नई फिल्म एक विवाह ऐसा भी के सेट की हैं, जो मुंबई के फिल्मसिटी के कालिया मैदान में लगाया गया था।
सूरज बड़जात्या के मुताबिक, हमारी फिल्मों में नायक-नायिका की भांति उनके घर भी किरदार समझे जाते हैं। उस घर में प्रत्येक वह छोटी चीज रखी जाती है, जो दर्शक को उस क्षेत्र की अनुभूति करा सके।
एक विवाह ऐसा भी का सेट डिजायन किया है संजय दवाड़े ने। विवाह का सेट भी संजय ने डिजायन किया था। संजय बताते हैं, सेट तैयार करने से पूर्व मैं सूरज जी और फिल्म के निर्देशक कौशिक घटक के साथ भोपाल गया। वहां के लोकल को-ऑडिनेटर की मदद से हमने भोपाल की गलियों और घरों का गहन अवलोकन किया। वहां के घर कैसे बने हैं? उनका डिजाइन क्या है? घरों में सामान कैसे रखे गए हैं? गलियों की क्या स्थिति है? इन सारी चीजों को हम अपने कैमरे में कैद कर मुंबई ले आए। उसके बाद हमने एक विवाह ऐसा भी का सेट तैयार किया। सेट को तैयार करने में हमें एक महीने का वक्त लगा था। इसमें हमने एक ट्रेन का सेट भी तैयार किया था, जहां चांदनी और प्रेम के बीच गीत फिल्माया गया।

1 comment:

chandrashekhar hada said...

yakinan BHOPAL ek jajbati shahar hai.yahan log gharon main nahi dilon main baste hain.yahan DOST nahin BHAI bante hain.hindu-muslim ki atoot dosti filmon main dekhi hongi,asal jindgi main aap bhopal main dekh sakte hain.bhopal ki yadon main le jane ke liye aapka bahut-2 SHUKRIYA.