Saturday, November 22, 2008

मुझे कुछ मुश्किल नहीं लगता: निखिल द्विवेदी | मुलाकात

-रघुवेंद्र सिंह
माई नेम इज एंथोनी गोंजाल्विस फिल्म से इस साल सिने जगत को निखिल द्विवेदी के रूप में आत्मविश्वास से भरा नया चेहरा मिला। अब निखिल की दूसरी फिल्म खलबली प्रदर्शित हो रही है। अजय चंडोक निर्देशित यह कॉमेडी फिल्म है। तेजी से आगे बढ़ रहे गैर फिल्मी पृष्ठभूमि के युवा निखिल ने साबित कर दिया किमेहनत के बल पर सब कुछ हासिल किया जा सकता है। प्रस्तुत है, निखिल द्विवेदी से बातचीत।
खलबली तक का सफर कैसा रहा?
बहुत अच्छा। मेरी पहली फिल्म माई नेम इज एंथोनी बॉक्स-ऑफिस पर नहीं चली, लेकिन उसमें मेरे काम की तारीफ हुई। जिसकी वजह से मेरे लिए दरवाजे खुल गए। पहले मेरी एक्टिंग पर कोई यकीन नहीं करता था, लेकिन अब लोग करने लगे हैं। उस फिल्म की असफलता से मैंने सीखा कि सिर्फ अच्छा एक्टर होने से कुछ नहीं होता। आपको टिकट बेचना भी आना चाहिए।
खलबली की कहानी एवं अपने किरदार के बारे में बताएं?
यह नौजवान युवक आदित्य की कहानी है। मर्जी के खिलाफ उसकी शादी करायी जाती है, इसलिए वह देश छोड़कर भाग जाता है। वह बैंकॉक के एक होटल में जाकर छुपता है। उस होटल में जितने लोग भी रूके हैं, सबकी जिंदगी एक-दूसरे से जुड़ी होती है। उस होटल में अचानक ऐसी घटना घटती है कि खलबली मच जाती है। मैं इसमें आदित्य का किरदार निभा रहा हूं। मेरे ओपोजिट सदा हैं। मेरे अतिरिक्त इसमें उनतीस जाने-माने हास्य कलाकार हैं। यह धमाल फिल्म है। यह लोगों को इतनी हंसाएगी कि वे फिल्म केअंत तक सीट के नीचे होंगे।
माई नेम इज एंथोनी के एंथोनी और खलबली के आदित्य में क्या फर्क है?
एंथोनी लीड कैरेक्टर जरूर था, लेकिन वह हीरो नहीं था। आदित्य पूरी तरह से हिंदी फिल्म का हीरो है। मैं बचपन से आदित्य जैसा ही किरदार निभाना चाहता था। मेरा बचपन का सपना अब पूरा हो गया।
तीस कलाकारों की भीड़ में आपको कितना स्पेस मिला है?
इस फिल्म में सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि बाकी के सभी कलाकारों को भी सम्मानित स्पेस मिला है। इसका श्रेय निर्देशक अजय चंडोक को जाता है। उन्होंने किसी पात्र को कहीं दबने नहीं दिया है। मैं सच कह रहा हूं। मैंने जब फिल्म साइन की थी तब मुझे इससे ज्यादा उम्मीद नहीं थी, लेकिन हाल में जब मैंने फिल्म की डबिंग की तब मैं अजय चंडोक का लोहा मान गया। उन्होंने यादगार कॉमेडी फिल्म बनायी है।
कॉमेडी करना मुश्किल लगा या आसान?
मैंने बचपन से सिर्फ एक्टर बनने का सपना देखा है। फिर मुझे एक्टिंग मुश्किल कैसे लग सकती है? मेरे लिए चार साल का वह सफर जरूर मुश्किल था जो मैंने यहां तक आने के लिए तय किया। अब मुझे कुछ भी मुश्किल नहीं लगता। मैंने कॉमेडी को एंज्वॉय किया। मैंने किसी की नकल करने की कोशिश नहीं की बल्कि अपने अंदाज में कॉमेडी की।
अजय चंडोक के निर्देशन में काम करने का अनुभव बताएं।
वे कमाल के निर्देशक हैं। उनके साथ काम करकेमजा आया। वे एक दिन कॉमर्शियल सिनेमा के बड़े निर्देशक बनेंगे। ये बात मैं एक्टर की हैसियत से नहीं बल्कि दर्शक के तौर पर कह रहा हूं।
पिछली बार आपके मित्र शाहरूख ने आपकी फिल्म प्रमोट की थी और अमृता राव के साथ प्रेम-प्रसंग की काफी चर्चा हुई थी। इस बार दोनों नदारद हैं। क्या कहेंगे?
मैंने पहले भी कहा था कि शाहरूख मेरे मित्र नहीं हैं। मैं उन्हें आदर्श मानता हूं। वे उम्र में मुझसे बड़े हैं। मैं उन्हें अपना दोस्त कैसे कह सकता हूं? दोस्ती अपने बराबर वालों से की जाती है। उन्होंने मेरी फिल्म इसलिए प्रमोट की थी क्योंकि वे उसके निर्माता था। मेरे उनसे अच्छे संबंध हैं। जहां तक अमृता से मेरे प्रेम-प्रसंग की बात है तो उसमें कभी सच्चाई नहीं थी। हम दोनों की सोच, पसंद, रहन-सहन सब कुछ अलग है। हम दोनों एक नहीं हो सकते।
खलबली के बाद किन फिल्मों में नजर आएंगे?
मैं शिवम नायर की कॉमिक-थ्रिलर, साउथ के निर्देशक गिरिधरन के साथ एक लव स्टोरी और एक अन्य कॉमेडी फिल्म कर रहा हूं। बहुत जल्द इन फिल्मों की औपचारिक तौर पर घोषणा की जाएगी। मैं रामगोपाल वर्मा के साथ जल्द ही एकफिल्म साइन करने वाला हूं।

1 comment:

आदर्श राठौर said...

जहां तक मुझे लग रहा है आप टेक वन में पढ़े रघुवेंद्र भाई हैं।
मैं हूं आदर्श राठौर।
आपका ब्लॉग बेहतरीन है।
शुभकामनाएं।
मेरे ब्लॉग पर भी आएं