Monday, June 8, 2009

निष्पक्ष फैसला सुनाती हूं-सोनाली

इंडियन आइडल के बाद अब सोनाली कलर्स के नए रिएलिटी शो 'इंडियाज गॉट टैलेंट' में जज की भूमिका में दिखाई दे रही है। प्रस्तुत हैं सोनाली से बातचीत के प्रमुख अंश:
इंडियाज गॉट टैलेंट किस तरह का रिएलिटी शो है?
यह टैलेंट हंट शो है। इसमें हर उम्र के लोग हिस्सा ले सकते हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। इसमें उम्र की सीमा नहीं है और न ही कोई कैटेगरी है। अभिनय, डांस, मिमिक्री, लोकगीत, लोकनृत्य जैसी किसी भी प्रतिभा का प्रदर्शन इसमें किया जा सकता है। इससे पहले यूएस, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और आस्ट्रेलिया में गॉट टैलेंट शो अत्यंत लोकप्रिय हुआ है। सर्वविदित है कि भारत में अन्य देशों की तुलना में अधिक प्रतिभा संपन्न लोग हैं। ऐसे में इस शो की महत्ता बढ़ जाती है। मैं शो को लेकर उत्साहित हूं।
किस आधार पर शो के विजेता का चुनाव किया जाएगा?
यह मुश्किल प्रश्न है। सिंगिंग और डांस रिएलिटी शो में विजेता चुनना आसान होता है, क्योंकि उनमें बेस्ट सिंगर और बेस्ट डांसर चुनना होता है, लेकिन इसमें मुश्किल होगी। यही वजह है कि मैं पहली बार किसी शो में जज बनने के बाद डरी हुई हूं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मुझे शो के लिए तैयारी करनी पड़ रही है। बहरहाल, हमने तय किया है कि जो प्रतियोगी सबसे अधिक मनोरंजन करेगा, उसे ही हम विजेता चुनेंगे।
इसमें आप प्रतियोगियों के किस पक्ष पर नजर रखेंगी?
मैंने जीवन में सिर्फ एक्टिंग की है। मेरे पास एक्टिंग का अनुभव है। मैं प्रतियोगियों के रचनात्मक पक्ष पर नजर रखूंगी। इस तरह का शो मैं पहली बार कर रही हूं। मैं नर्वस महसूस कर रही हूं। खास बात यह है कि इस शो से जुड़ने के बाद मुझे कई बातें सीखने को मिल रही हैं। मेरा साढ़े तीन साल का बेटा है। उम्मीद है कि वह भी शो से कुछ सीखेगा।
जज की जिम्मेदारी निभाना आसान लगता है या मुश्किल?
मेरे लिए यह मुश्किल काम है। जब प्रतियोगी जी-जान से मंच पर परफार्म करता है तो उसकी आंखों में कई सपने होते हैं। हमारा फैसला उनके सपनों को तोड़ने और उनके जीवन का रूख बदलने की क्षमता रखता है, लेकिन क्या करें? हकीकत बताना हमारा काम है। अपने बारे में कड़वी बातें सुनना किसी को अच्छा नहीं लगता, पर सपनों में जीना भी तो अच्छी बात नहीं है। मैं फैसला सुनाने से पहले सौ बार सोचती हूं।
आप स्वयं को बतौर जज कैसा मानती हैं?
मैं निष्पक्ष फैसले सुनाती हूं। प्रतियोगियों को प्यार से उनकी अच्छाई और बुराई बताती हूं। मुझे कड़वी बातें कहना अच्छा नहीं लगता। वह मेरे स्वभाव में नहीं है। मुझे लगता है कि मैं अपना काम अच्छी तरह करती हूं। बाकी, दर्शक बता सकते हैं कि मैं कैसी जज हूं?
क्या अब सिर्फ टीवी कार्यक्रमों में ही काम करेंगी?
फिल्मों की शूटिंग के लिए बहुत वक्त देना पड़ता है और अब मेरे लिए उतना समय निकाल पाना मुमकिन नहीं है। मुझे परिवार और अपने बेटे रनबीर की देखभाल करनी पड़ती है। टीवी कार्यक्रमों की शूटिंग में सप्ताह में एक या दिन लगते हैं। यहां मैं आराम से काम कर रही हूं।
टीवी कितना देखती हैं? आपका पसंदीदा कार्यक्रम कौन-सा है?
मैं बहुत कम टीवी देखती हूं। अपने पति गोल्डी बहल के साथ बैठकर कभी-कभार न्यूज चैनल देखती हूं या फिर जिन कार्यक्रमों में मैं जज होती हूं, उन्हें देख लेती हूं। मैं सीरियल नहीं देखती हूं।
-रघुवेन्द्र सिंह